प्रधानमंत्री की नियुक्ति कार्य शक्तियां व अधिकार | Appointment, Work, Powers, Rights Of Prime Minister in Hindi

प्रधानमंत्री की नियुक्ति कार्य शक्तियां व अधिकार | Appointment, Work, Powers, Rights Of Prime Minister in Hindi: भारत में भले ही सभी संवैधानिक अधिकार राष्ट्रपति को प्रदान किये गये हैं, मगर प्रधानमंत्री को ही कार्यपालिका का वास्तविक मुखिया माना गया है. प्रधानमंत्री के पास सबसे अधिक अधिकार एवं जिम्मेदारियां होती है. वर्तमान में नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री है. भारत के प्रधानमंत्री का निर्वाचन, नियुक्ति, कार्य, अधिकार, शक्तियाँ all About Prime Minister of India in hindi आदि की जानकारी हम इस लेख में आपकों प्रदान कर रहे है.

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जब भारत आजाद हुआ तो 1946 में ही चुनी गई अंतरिम सरकार से ही प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरु बनाए गये, जो आजादी के बाद पहले भारत के प्रधानमंत्री थे. इनकी बेटी इंदिरा गांधी भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री बनी तथा वर्तमान में 17 वें प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी जी का कार्यकाल है, इन्होने 2014 में सत्ता संभाली थी. ये आजाद भारत में जन्मे पहले पीएम भी हैं.

प्रधानमंत्री की नियुक्ति प्रक्रिया (Prime Minister’s Appointment Process)

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 74 में प्रधानमंत्री के पद की व्यवस्था हैं. संविधान के अनुसार प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है. राष्ट्रपति लोकसभा में बहुमत प्राप्त दल अथवा समूह के नेता को प्रधानमंत्री पद के लिए नियुक्त करता है. यदि लोकसभा में किसी भी एक दल को या चुनाव पूर्व गठबंधन किये हुए दलों के किसी समूह को स्पष्ट बहुमत प्राप्त नहीं होता है तो ऐसी स्थिति में राष्ट्रपति लोकतांत्रिक अपेक्षाओं एवं संविधान की भावना के अनुरूप अपने स्वविवेक से निर्णय कर प्रधानमंत्री नियुक्त करता हैं.

प्रधानमंत्री के कार्य, शक्तियाँ एवं अधिकार (Work, Powers, Rights Of PM Prime Minister in Hindi)

भारत के संविधान में वर्णित भारत के प्रधानमंत्री कार्य शक्तियां व अधिकार निम्नलिखित हैं.

  • मंत्रिपरिषद का निर्माण- संविधान के अनुच्छेद 75 के अनुसार राष्ट्रपति प्रधानमंत्री के परामर्श से मंत्रिपरिषद के सदस्यों की नियुक्ति करता है. मंत्रिपरिषद के सदस्यों के चयन का प्रधानमंत्री को विशेषाधिकार है. वह मंत्रिपरिषद में सम्मिलित किये गये मंत्रियों का स्तर को कैबिनेट मंत्री, राज्यमंत्री, उपमंत्री निर्धारित करता है. मंत्रिपरिषद में मंत्रियों को बनाए रखने अथवा हटाने के विषय में भी प्रधानमंत्री का निर्णय अंतिम होता है.
  • मंत्रियों के मध्य विभागों का वितरण एवं परिवर्तन-प्रधानमंत्री अपने विवेक से मंत्रियों में विभागों के वितरण का कार्य करता हैं. लेकिन मंत्रियो के मध्य विभागों के वितरण में प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद से सम्बन्धित सदस्य की योग्यता, राजनीतिक कौशल और दल में उसके महत्व आदि के आधार पर निर्णय लेता है. प्रधानमंत्री जिस प्रकार चाहे और जब चाहे मंत्रियों के विभागों में परिवर्तन कर सकता है.
  • मंत्रिपरिषद का कार्य संचालन- प्रधानमंत्री मंत्रिमंडल की बैठकों का सभापतित्व और मंत्रिमंडल की समस्त कार्यवाही का संचालन करता है. मंत्रिपरिषद की बैठक में इन्ही विषयों पर विचार किया जाता है, जिन्हें प्रधानमंत्री कार्यसूची अथवा एजेंडा में रखे.
  • शासन के विभिन्न विभागों में समन्वय- प्रधानमंत्री शासन के समस्त विभागों में समन्वय स्थापित करता है जिससे कि समस्त शासन एक इकाई के रूप में कार्य कर सके.
  • लोकसभा का नेता– प्रधानमंत्री संसद का मुख्यतया लोकसभा का नेता होता है और कानून निर्माण के समस्त कार्य को प्रधानमंत्री ही नेतृत्व प्रदान करता हैं. वार्षिक बजट सहित सभी सरकारी विधेयक उसके निर्देशानुसार ही तैयार किये जाते हैं.
  • राष्ट्रपति एवं मंत्रिपरिषद के बीच कड़ी का कार्य- प्रधानमंत्री राष्ट्रपति और मंत्रिपरिषद के बीच सम्पर्क कड़ी का कार्य करता है. यथा प्रधानमंत्री शासन सम्बन्धी व अन्य सूचनाएं राष्ट्रपति को देता है. वह राष्ट्रपति के सुझावों डर मंत्रिपरिषद को अवगत कराता है, कोई भी मंत्री, प्रधानमंत्री की अनुमति पर ही राष्ट्रपति से मिल सकता हैं.
  • विभिन्न पद प्रदान करना- संविधान द्वारा राष्ट्रपति को जिन उच्चाधिकारियों की नियुक्ति का अधिकार दिया गया है, व्यवहार में उनकी नियुक्ति राष्ट्रपति स्वविवेक से नही वरन प्रधानमंत्री के परामर्श से ही करता हैं.
  • नीतियों का निर्माता- प्रधानमंत्री शासन का वास्तविक प्रधान होता है. वह समस्त नीतियों का निर्माता होता है. वह मंत्रिपरिषद के समस्त महत्वपूर्ण निर्णयों से अगवत कराता है एवं मंत्री उसकी सलाह से ही कार्य करते हैं.
  • लोकसभा को भंग करने की शक्ति– लोकसभा को समय से पूर्व भंग करने की शक्ति प्रधानमंत्री के हाथों में एक महत्वपूर्ण अस्त्र है, जिसके माध्यम से वह अपने दल के सदस्यों पर नियंत्रण रखता है एवं विपक्षी सदस्यों पर भी दवाब बनाए रखता हैं.
  • दल का नेता– लोकसभा का नेता होने के साथ साथ प्रधानमंत्री दल का नेता भी होता है. लोकसभा में बहुमत प्राप्त दल का नेता होना प्रधानमंत्री की शक्ति का आधार है. लोकसभा में बहुमत प्राप्त दल का नेता होने पर ही वह शासन का प्रधान हो जाता हैं. उसके साथ दल का भविष्य जुड़ा होता है, चुनाव उसके नाम पर ही लड़े जाते हैं.
  • अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्धों के निर्धारण सम्बन्धी शक्ति- अंतर्राष्ट्रीय क्षेत्र में देश की विदेश नीति के निर्धारण में प्रधानमंत्री की महत्वपूर्ण भूमिका होती हैं. विदेश नीति को अंतिम रूप प्रधानमंत्री ही देता हैं. इस सम्बन्ध में उनके शब्द ही अंतिम और अधिकृत माने जाते हैं.
  • केन्द्रीय मंत्रिमंडल के गठन की प्रक्रिया
  • भारतीय संसद की सामान्य जानकारी
  • भारत के वर्तमान राष्ट्रपति 
  • भारत के राष्ट्रपति की शक्तियाँ 
  • राष्ट्रपति चुनाव उम्मीदवार चुनाव तिथि और मतगणना
  • भारत के शिक्षा मंत्री कौन हैं
  • कैबिनेट मंत्री की सूची

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