April Fool Day History In Hindi | अप्रैल मूर्ख दिवस का इतिहास

April Fool Day History In Hindi: कई दशकों से मदर डे, फादर डे, वैलेंटाइन डे न जाने और क्या-क्या. इसी तरह मूर्ख दिवस यानि April Fool Day भी वेस्टर्न कल्चर की देन है. 1 अप्रैल को साल यह मनाया जाता है. भारत में भी इसका चलन तेजी से बढ़ा है. खासकर सोशल मिडिया पर फूल अप्रैल शायरी जोक्स SMS की झड़ी लग जाती है. न्यूजीलैंड, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में इसे विशेष रूप से मनाया जाता है. April Fool Day History In Hindi में आपकों इस दिन को मनाने के पीछे की पूरी कहानी व इतिहास बताएगे.

अप्रैल मूर्ख दिवस का इतिहास (April Fool Day History In Hindi)April Fool Day History In Hindi

अप्रैल फूल क्यों मनाया जाता है-अकसर इंसान का स्वभाव होता है, कि जब भी कोई उसके साथ मजाक करता है तो वह उसके लिए असहनीय हो जाता है. मगर यह दिन इसी प्रकार के मजाक को समर्पित है. हालांकि इस दिन किसी तरह का राजकीय अवकाश तो नहीं होता है. फिर भी अप्रैल फूल दिवस के शौकीन थोड़ा वक्त तो निकाल ही लेते है.

इस दिन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि कोई नाराज नही होता या बुरा नही मानता है. लोग जीभरकर एक दूसरे के साथ खूब मौज मस्ती मजाक करते है. अप्रैल फूल दिवस जोक्स की भरमार दुनियाँ के हर कोने में रहते है. चलिए अब बात करते है. इस दिन के इतिहास और इसे मनाने से जुड़ी कहानी की.

 

फूल दिवस की कहानी- April Fool Day History In Hindi

चॉसर के कैंटरबरी टेल्स (1392) में इस दिन को मनाने से जुड़ी पहली कहानी के सन्दर्भ मिलते है. हालाँकि कई लोग मानते है, कि न्यू ईयर अवकाश (1 जनवरी) के बाद किसी सरकारी अवकाश की तलाश में एक बहाना खोजा गया जो आगे चलकर अप्रैल फूल में परिणित हो गया.

एक अन्य किताब का मानना है,कि जब यूके के किंग रिचर्ड सैकंड और क्वीन एनी की संगाई की तिथि 32 मार्च लोगों को बताया था, जिन्हें वो सच मान बैठे. दुनिया के बहुत बड़े हिस्से को मुर्ख बनाने की इस दास्तान से भी अप्रैल फूल डे को जोड़ा जाता है. हालाँकि यह भी 32 मार्च यानि 1 अप्रैल को ही मनाया जाता है.

why it is celebrated starting of april fools day

इतिहास की कहानी को सच माना जाए तो कहा जाता है. 1582 में पोप ग्रेगोरी तेहरवा जिसने 12 महीनो का एक कलैंडर छापने के लिए कहा था. जिसमे साल की शुरुआत एक जनवरी से की गई थी. जब यह कलैंडर बाहिर आया तो रोम के लोगों ने एक जनवरी से ही अपना नववर्ष रखा.

लेकिन बहुत से लोग ऐसे थे, जो अभी तक 1 अप्रैल को ही साल की शुरुआत करते थे. तब रोम के लोगों ने उन्हें फूल और एक तारीख को फूल डे के रूप में मनाकर, उनका मजाक उड़ाया जाने लगा.

1 अप्रैल का इतिहास भारत में

दुनिया का भारत वो पहला देश था, जिन्होंने सबसे पहले कैलेंडर प्रस्तुत किया था. उस समय पश्चिम के देश भी हमारे ही कलैंडर का उपयोग किया करते थे. तब चैत्र, वैशाख यही 12 महीने हुआ करते थे. 1582 में पोप ग्रेगोरी ने पहली बार पश्चिम के लोगों को कलैंडर दिया था. संयोग से भारतीय कैलेंडर का पहला महिना चैत्र, अप्रैल में ही पड़ता है. इसके बाद लोगों ने ग्रेगोरियन कैलेंडर को अपना लिया था. इसके अतिरिक्त भारत के इतिहास में 1 अप्रैल को फूल दिवस मनाने के पीछे की कोई ख़ास वजह नही है. बस यह पश्चिम की ही देन है.

2018, 1 (Frist) April Fool Day History In Hindi In India & World

प्रथम विश्व युद्ध के समय की बात है, जब जर्मनी के लिले एयरपोर्ट के पास एक अंग्रेजी विमान चालक ने बम फैका.

लोग इसे दुश्मन का आक्रमण समझ बैठे और जान बचाने इधर उधर भागने लगे,

जिसको जहाँ जगह मिली छुप गये. 10 मिनट के सन्नाटें के बाद किसी ने नजर उठाकर देखा,

तो वह बम नही फ़ुटबाल थी. जिस पर लिखा था हैप्पी अप्रैल फूल डे.

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