Aurangzeb History in Hindi | औरंगज़ेब का इतिहास

Aurangzeb History in Hindi-मुगल वंश का छठा शासक और The last Mughal शासक Aurangzeb को इतिहास में बड़े क्रूर और अत्याचारी शासक बताया जाता हैं| सभी मुग़ल शासकों में कट्टर और अत्याचारी Aurangzeb ने सता प्राप्ति की खातिर अपने भाइयो और पिता से युद्ध किया| Aurangzeb ने अपने शासनकाल में बड़ी संख्या में हिन्दू मन्दिरों को ध्वस्त किया| गैर मुस्लिम प्रजा पर अत्याचार किये और धर्मांतरण पर जोर दिया|

शायद इनकी यह अत्याचारों की कहानी ही Aurangzeb और मुग़ल सम्राज्य के पतन का कारण बनी| सम्पूर्ण उतर भारत से बिहार बंगाल महाराष्ट्र होते वर्तमान पाकिस्तान के पार अफगान सीमा तक फैले मुगल सम्राज्य के अंत की जड़े औरंगज़ेब ने ही जमाई| औरंगज़ेब की म्रत्यु के बाद सम्पूर्ण मुग़ल सम्राज्य छिन्न-भिन्न हो गया| जिन्हें एक करने वाला फिर कोई मुग़ल शासक नही बना|

Aurangzeb History  औरंगज़ेब का इतिहास

क्रमांक जीवन परिचय बिंदु  Aurangzeb History
1. पूरा नाम  अब्दुल मुज्जफर मुहीउद्दीन मोह्हमद औरंगजेब आलमगीर Aurangzeb
2. धर्म मुस्लिम
3. जन्म 4 नवम्बर 1618
4. जन्म स्थान दाहोद, गुजरात
5. माता-पिता शाहजहाँ, मुमताज़ महल
6. विवाह नवाब बाई जी (1638) Dilras Banu Begum(1637),Udaipuri Mahal,औरंगाबादी महल
7. बच्चे
  • बहादुर शाह प्रथम
  • मुहम्मद आज़म
  • शाहमुहम्मद अकबर
  • मुहम्मद कम बख़्श
  • मुहम्मद सुल्तान
8. मृत्यु 3 मार्च 1707

Aurangzeb History Jeevan Parichay-महान मुग़ल सम्राटो में गिना जाने वाले Aurangzeb का जन्म 4 नवम्बर 1618 को गुजरात के दाहोद जिले में हुआ था| आज भी दाहोद में मुस्लिम बहुसंख्यक हैं जो काफी कट्टर भी हैं| इसके पिता का नाम शाहजहाँ जो बाबर द्वारा स्थापित मुग़ल वंश का पांचवा उतराधिकारी था| औरंगजेब की माँ का नाम मुमताज़ महल बताया जाता हैं|

यह महल का तीसरा बेटा था| इससे बड़े दो भाई और चार बहिन थी| शाहजहाँ उस समय गुजरात क्षेत्र में सूबेदार था| Aurangzeb का पूरा नाम अब्दुल मुज्जफर मुहीउद्दीन मोह्हमद औरंगजेब आलमगीर| जो बचपन से ही मुस्लिम कट्टरवाद अपने जेहन में बनाए हुए था| उनके पूर्वजो द्वारा गैर मुस्लिम के साथ की गईं रियायते उन्हें कतई बर्दास्त नही थी| राजव्यवस्था के अनुसार शाहजहाँ ने अपने बड़े बेटे दारा शिकोह को अपना उतराधिकारी घोषित किया था| मगर औरंगजेब स्वय राजगद्दी पर बैठना चाहता था| अब उसके पास एक ही विकल्प था वो था विद्रोह पिता और भाइयो को परास्त कर उनकी गद्दी हासिल करना|

 

Aurangzeb Early Life औरंगजेब का आरम्भिक जीवन 

इससे पूर्व जब Aurangzeb 8 वर्ष का था तो उसके दादा जहाँगीर द्वारा इनको और इसके बड़े भाई दारा शिकोह को बंदी बनाकर लाहौर दरबार भेज दिया था| उस समय शाहजहाँ स्वय उतराधिकारी के लिए सघर्ष कर रहा था| जब उन्हें 1628 में शासक घोषित कर दिया तो इनके दोनों बेटो को लाहौर से दिल्ली दरबार सौप दिया| उस समय Aurangzeb की आयु 10 वर्ष थी|

अपने पिता के साथ आगरा किले में ही इनके पढ़ाई का प्रबंध किया गया था| 6 वर्षो तकAurangzeb को अरबी और फ़ारसी की विधिवत शिक्षा दी गईं| शिक्षा पूरी होने के बाद इन्हे 16 वर्ष की आयु में दक्कन के क्षेत्र का सूबेदार बना दिया| जब इसे दक्कन का गर्वनर बनाया तो सबसे पहला काम वर्तमान महारष्ट्र का नाम बदलकर औरगाबाद किया| 19 साल की आयु में दुरानी से शादी की| 1640 के आस-पास शाहजहाँ दाराशिकोह को अपना उतराधिकारी घोषित करने के बारे में विचार में था इसी बिच उसकी एक बेटी की जलकर मौत हो गईं| जो Aurangzeb के साथ ही थी| जब इस बात का पता शाहजहा को चला तो वह Aurangzeb  पर बहुत क्रोधित हुआ तो आगरा दरबार से बहिष्कार कर दिया|

दक्कन में कुछ समय तक गर्वनर रहने के बाद Aurangzeb को सिंध और मुल्तान भेज दिया| जहा पर मुगलों और अफगानों के बिच सघर्ष चल रहा था| यहाँ उसे कोई ख़ास सफलता नही मिली| अफगानों के खिलाफ किये गये प्रत्येक सैन्य आक्रमण के बाद शाहजहाँ अधिक नाराज हो गया और वहां से उसे निकाल कर फिर दक्कन में भेज दिया |जहा वो उस समय के दक्षिण भारत के शक्तिशाली सम्राज्य गोलकुंडा और बीजापुर के सूल्तानो के साथ लड़ रहा था| काफी वर्षो तक चल रहे तनाव में आखिर शाहजहाँ ने हारकर अपनी सेनाए वापिस बुला दी|

Aurangzeb Succession conflict औरंगजेब का उतराधिकार सघर्ष 

अब तक Aurangzeb को पिता से मिल रही उपेक्षाओ से समझ चूका था| यह सब बड़े भाई दारा शिकोह के कहने पर कर रहा हैं| 1652 में  औरंगजेब ने शाहजहा को मारने के लिए कई बार जहर भी भेजा मगर उनके विशवास पात्र स्वय के रहते हुए अपने प्रजापालक को मरते नही देखना चाहते थे| इसी कारण इन्होने जहर स्वय पी लिया था| ऐसा बताया जाता हैं| कितनी सच्चाई हैं इसमे नही कहा जा सकता | 1952 में शाहजहाँ शारीरिक रूप से बेहद कमजोर होकर बीमार रहने लगा था|

Aurangzeb उस समय 34 वर्ष का हो चूका था| यह उसके लिए अपने पिता और भाइयो से बदला लेने का सुनहरा अवसर था|अपने बड़े भाई दारा शिकोह को फासी देकर बूढ़े शाहजहाँ को जेल में बंद कर दिया| और अपना राज्यभिषेक करवा लिया| अब अपने पिता और भाइयो से बदला लेने के बाद अपनी कट्टरता को राज्य भर में बर्फाना शुरू कर दिया|तब तक Aurangzeb  ने इतने शत्रु बना लिए थे 50 वर्षो के शासनकाल ने पिछले 200 वर्षो में पूर्वजो की पूरी मेहनत पर पानी फिर गया| सभी राज्यों ने स्वय को स्वतंत्र राज्य के रूप में घोषित कर दिया|

गुरु तेग बहादुर को फांसी Guru Teg Bahadur hanged

उसने गैर मुसलमानों पर लगने वाले जजिया कर को फिर से शुरू कर दिया| और धर्मांतरण को मजबूरन करवाने लगा| औरंगज़ेब का पहला निशाना कश्मीरी पंडित बने| सबसे पहले इन्हे जबरन मुस्लिम बनाने का काम शुरू कर दिया|

उस समय सम्पूर्ण भारत में ऐसा कोई स्वतंत्र शासक नही था| जो उनकी नीतियों का विरोध कर सके| अधिकतर राजे-महाराजे Aurangzeb के गुलाम बन चुके थे| जिनमे राजपूताने के राजपूत शासक भी थे| हिन्दू सरक्षक होने के बावजूद वो औरंगज़ेब का विरोध नही कर सके|कश्मीरी हिन्दू पंडित अपने धर्म पर हो रहे अत्याचार की गुहार लगाने सिखों के नौवे गुरु तेगबहादुर जी के पास गये| जिन पर गुरु ने इस अत्याचार का विरोध किया तो Aurangzeb ने उन्हें फांसी की सजा दे दी ताकि और कोई विरोध करने की हिमाकत नही कर सके| इस तरह अपने शासन के शुरूआती वर्षो में ही Aurangzeb ने सिखों और राजपूतो को अपना दुश्मन बना लिया|

Aurangzeb ‘s empire expansion औरंगजेब का साम्राज्य विस्तार

Aurangzeb को उतराधिकार में इतना सम्राज्य मिला जिसे वह ठीक से संभालता तो यकीनन अगले आने वाले सैकड़ो वर्षो तक मुगल सम्राज्य का दिल्ली पर आधिपत्य हो सकता था| तेगबहादुर को फासी के बाद पंजाब के सिख और कश्मीरी पंडित औरंगज़ेब के पूर्णत विरोधी हो गये थे|हालाकि सूबेदार रहते हुए औरंगज़ेब गोलकुंडा और बीजापुर को नही जीत पाया था| वो सपना इन्होने जल्द ही पूरा कर लिया| मगर इन राज्यों को लगातार बचाए रखना औरंगज़ेब के लिए सबसे बड़ी चुनोती थी| क्युकि उस समय मराठा महाराजा शिवाजी के नेतृत्व में संगठित हो चुके थे|

शिवाजी कई वर्षो तक Aurangzeb के साथ लड़ते रहे| इन युद्दो ने Aurangzeb को बड़े आर्थिक संकट में डाल दिया| लेकिन उसने लड़ाई जारी रखी और शिवाजी को अपने झासे में लाकर बंदी बनाने में भी सफल रहा| मगर साभाजी बच निकले| शिवाजी भी अपनी चाल से Aurangzeb से बचकर निकल गये| कुछ वर्ष बाद शिवाजी की म्रत्यु भी हो गईं| मगर उनके उत्रधिकारियो ने औरंगज़ेब के अन्तकाल तक लड़ाई जारी रखी| Aurangzeb की म्रत्यु 1707 में हुई थी|

Aurangzeb’s religious policy औरंगजेब की धार्मिक नीति

मुग़ल सम्राज्य के सभी शासक मुस्लिम धर्म के अनुयायी थे| जो इस्लाम को मानते थे| मगर जबरदस्ती किसी पर थोपने के पक्ष में नही थे| Aurangzeb की विचारधारा इन सबसे अलग थी| जो गजवा ए हिन्द की विचारधारा को मानता था| Aurangzeb कट्टर मुस्लिम आक्रान्ता था| जो जबरदस्ती प्रजा को इस्लाम काबुल करवाना चाहता था| इसके लिए इन्होने जजिया कर को फिर से लागू किया, हिन्दू देवी देवताओं के मन्दिर तुड्वाए, साथ ही हिन्दू कन्याओं का जबरदस्ती मुसलमानों के साथ विवाह करवाने का काम औरंगज़ेब ने किया|

Aurangzeb ने अपने राज्य की नीतियों को कुरान आधारित बना लिया| सती प्रथा पर रोक,गैर मुस्लिमो को पूजा करने और तीर्थ करने पर रोक| हिन्दू तीज त्योहारों पर पूर्ण रोक लगा दी| राज्य में गाना बजाना प्रतिबंधित कर दिया|दारुल इस्लाम Aurangzeb का परम लक्ष्य था जो हिन्दुओ को काफिर कह कर सम्बोधित करता था| साथ ही हिन्दू राष्ट्र को इस्लाम का देश बनाने की रणनीति पर चल रहा था| Aurangzeb ने अपनी धर्मनीति को ही राजनीति बनाया| हिन्दू और सिख प्रजा पर जुल्म ढहाने शुरू कर दिया| इसका एक कारण यह भी था इसका कोई विरोधी नही था जो इन नीतियों का विरोध कर सके|

जिन्होने Aurangzeb की इस निति का विरोध किया वो अंजाम भुगत चुके थे|

Aurangzeb  personality औरंगजेब का व्यक्तित्व

Aurangzeb एश और विलाशी का जीवन व्यतीत किया|

उसने मरने तक छ से सात शादियाँ भी की|

मुस्लिम रीती रिवाजो का बड़ी सिद्दत से पालन करता था|

उसके व्यक्तिव की एक बड़ी खामी ही थी|

जो सम्पूर्ण मुगल सम्राज्य की कोपभाजन बनी|

वो थी Aurangzeb की धार्मिक कट्टरता बस वह यही चाहता था|

सभी प्रजा कुरान को माने और इसके अनुसार जीवन व्यतीत करे|

दुसरो के धर्म की इज्जत करना तो उन्हें तो म्रत्यु से अधिक बुरा लगता था|

एक कट्टर मुसलमान की तरह Aurangzeb का निजी जीवन था|

इतना जरुर हैं Aurangzeb खान-पान और वेशभूषा के मामले में सयमित था|

Aurangzeb ideal hoW औरंगजेब आदर्श कैसे ?

बड़ी संख्या मे आज भी ऐसे लोगों का समूह हैं जो Aurangzeb History को गलत बताते हैं उनका मानना हैं इतिहासकारों ने जानबूझकर Aurangzeb की एक ऐसी छवि पेश की गईं| जिनमे वह एक कट्टर मुस्लिम आक्रान्ता की तरह दिखाया जाता हैं| मै जब Aurangzeb History जानने के लिए कुछ रिसर्च कर रहा तो मुझे लोगों के कमेंट्स देखकर अचम्भा हुआ| उनके अनुसार Aurangzeb सभी शासकों में अच्छा था| उसने पिता और भाई को इसलिए मारा क्युकि वे बेहद फिजूलखर्ची थी|

दुसरे पॉइंट में इनका कहना हैं

Aurangzeb ने सिर्फ हिन्दुओ के मन्दिर तुड्वाए बल्कि मुस्लिम मस्जिदे भी तुड्वाए|

उन मन्दिरों और मस्जिदों को तुडवाया गया

जिन में कुछ लोग बैठकर धर्म के नाम पर जनता से पैसे एठते थे|

इन महाशयों के ये तर्क कुछ दम रखते हैं मगर जब किसी का इतिहास लिखा जाता हैं,

तो इतिहासकार स्वय अपने विचार उसमे नही डालता हैं|

साथ ही जो लिखा जाता हैं उसका प्रमाण भी प्रस्तुत करना पड़ता हैं|

जब Aurangzeb History लिखी गईं तो उसको मरे 100 साल भी नही हुए थे|

उनके क्रत्यो को भुगतने वाले लोग जिन्दा थे|

Aurangzeb के वे सारे फरमान और उनकी राजनीति आज भी सग्रहालयो में सुरक्षित हैं|

इतना सब कुछ जानने के बावजूद लोग Aurangzeb को हीरो मानते हैं

तो जनाब कुछ नही हो सकता आपकी किस्मत ही फूटी हैं| चलिए छोड़ते हैं |

मित्रो Aurangzeb History के बारे में आपका क्या ख्याल हैं|

क्या वाकई में एक सच्चे और भोले-भाले इंसान को हमारी किताबों में विलेन बनाकर पढाया जाता हैं|

प्लीज Aurangzeb History पर अपनी राय जरुर दीजिएगा|

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *