बाबा रामदेवजी महाराज का जीवन परिचय | baba ramdev runicha history in hindi

baba ramdev runicha history in hindi लोक देवताओं में रामदेव जी का नाम अत्यधिक लोकप्रिय है. इनका जन्म 15 वीं शताब्दी में अजमल जी और मैंणा दे के घर पोकरण के एक गाँव में हुआ था. इनका विवाह नेतल देवी के साथ हुआ था. बाबा रामदेवजी सिद्ध संत, शूरवीर, चमत्कारी, कर्तव्यपरायण, जनता के रक्षक और गौ सेवक के रूप में प्रसिद्ध हुए.

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रामदेवजी ने जाति व्यवस्था का विरोध करते हुए सामाजिक समसरता का संदेश दिया. रामदेवजी ने जीव मात्र के प्रति दया, गुरु महिमा, पुरुषार्थ एवं मानव के गौरव को महत्व दिया. वे समाज सुधारक थे. समाज में अछूत कहे जाने वाले वर्ग के साथ बैठकर भजन करना, दलित डालीबाई का बहिन के रूप में पोषण करना, धार्मिक आडम्बरों का विरोध करना तथा हिन्दू मुस्लिम एकता पर बल देना आदि रामदेवजी के प्रमुख कार्य थे.

रामदेव जी ने गुरु की महता पर जोर देते हुए कर्मों की शुद्दता पर बल दिया. ग्रामीण समाज में बाबा रामदेव गौ रक्षक, परोपकारी और लोकदेव के रूप में पूज्य है. राजस्थान के अलावा मध्यप्रदेश एवं गुजरात में भी इनकी पूजा की जाती है. ये सामाजिक सोहाद्र के प्रतीक थे.

अश्वारुढ़ बाबा रामदेव के एक हाथ में भाला और दुसरे हाथ में तंदूरा शक्ति व भक्ति के प्रतीक है. इनके समाधि स्थल पर निर्मित मन्दिर, रामसरोवर, पर्ण बावड़ी, डालीबाई का समाधि स्थल मन्दिर पावन स्मारक माने जाते है. विभिन्न गाँवों में बाबा रामदेवजी के थान व मन्दिर है. खेजड़ी के वृक्ष के नीचे चबूतरे पर बाबा रामदेव जी के पगलियें स्थापित किये जाते है. बाबा के मन्दिरों को देवल या देवरा कहा जाता है. तथा बाबा रामदेव के नाम की शपथ भी ली जाती है. जिसे बाबा रामदेव री आण कहा जाता है.

रात्रि में जम्मा जागरण किया जाता है तथा लोक गीत काव्य कथा से इनकी स्तुति की जाती है. इन्होने विक्रम संवत् 1515 , 1458 ईसवीं में समाधि ले ली थी. इनके समाधि स्थल रामदेवरा रुणेचा में प्रतिवर्ष भाद्रपद शुक्ल द्वीतीय से दशमी तक विशाल मेला लगता है. आस पास के प्रदेशों से भी लोग मेले में आते है.

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