बाबरनामा या तुजुक ए बाबरी | Baburnama In Hindi Download

बाबरनामा या तुजुक ए बाबरी Baburnama In Hindi Download: बाबर द्वारा लिखित  उसकी  आत्मकथा  तुजुक ए बाबरी जिसे बाबरनामा के नाम  से पुकारते हैं.  विश्व के ऐतिहासिक ग्रंथों में सर्वाधिक  महत्वपूर्ण ग्रंथों में से एक हैं.  यह ग्रंथ चगताई तुर्की भाषा में लिखा गया था. उनका सर्वप्रथम फारसी अनुवाद शेख जैन वफाई ख्वाफी ने किया. जो बाबर का मित्र भी था. परन्तु फारसी भाषा में सबसे सुंदर अनुवाद अकबर के आदेशानुसार अब्दुर्रहीम खानखाना ने किया.

बाबरनामा या तुजुक ए बाबरी

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the great mughals babur tuzk e babri book in urdu tuzk e babri pdf: फारसी से अंग्रेजी भाषा में इसके अनुवाद का कार्य बहुत से विद्वानों ने किया परन्तु विलियम असर्किन का अनुवाद और मिसेज वेबरिज का अनुवाद अधिक प्रशंसनीय हैं. इस ग्रंथ द्वारा हमें न केवल उस समय की राजनैतिक एवं ऐतिहासिक जानकारी उपलब्ध होती हैं, अपितु पर्याप्त सांस्कृतिक जानकारी भी उपलब्ध होती हैं.

हिन्दुस्तान का विवरण देते हुए बाबर लिखता हैं हिन्दुस्तान पहली, दूसरी और तीसरी मौसमों में स्थित हैं. इसका कोई भी भाग चौथी मौसम में स्थित नहीं हैं. यह बहुत ही अच्छा देश हैं. इसकी पहाड़ियाँ और नदियाँ, जंगल और मैदान पशु और पौधे, निवासी और भाषाएँ इनकी हवाएं और बरसातें सब भिन्न प्रकार की हैं. परन्तु वह यह भी लिखता हैं कि हिन्दुस्तान के प्रदेश और नगर अत्यंत कुरूप हैं.

बाबरनामा या तुजुक ए बाबरी | Baburnama In Hindi Download

यह एक ऐसा देश हैं जहाँ बहुत कम आमोद प्रमोद हैं. लोग सुंदर नहीं हैं. इन लोगों को ख्याल नहीं हैं कि मित्र मंडली में क्या आनन्द होता हैं. और आजादी से मिलने जुलने में या सम्पर्क करने में क्या सुख हैं. इसमें कोई प्रतिभा नहीं हैं, इनके दिमाग में बुद्धि नहीं हैं. शिष्टाचार में कोमलता नहीं हैं. इनमें न दया हैं न मित्र भाव हैं.

इनके पास अच्छे घोड़े नहीं हैं न अच्छा मांस हैं और न अंगूर या खरबूजे या अच्छे फल हैं. यहाँ न बर्फ हैं और न ठंडा पानी और बाजारों में अच्छा खाना या रोटी नहीं मिलती. यहाँ पर न स्नानागार हैं न विद्यालय और न बतियाँ या मशाले हैं.

यह बहुत बड़ा देश हैं यहाँ सोना चाँदी का बाहुल्य हैं. वर्षा ऋतु में यहाँ का मौसम सुहावना हो जाता हैं. हिन्दुस्तान में दूसरा आराम यह हैं कि यहाँ प्रत्येक व्यवसाय और धंधे के अनगिनत कारीगर मिलते हैं. बाबरनामा में ऐसी ऐतिहासिक सामग्री भरी पड़ी हैं इसमें सुलतान इब्राहीम लोदी एवं उसके अमीरों के राज्य का हाल ज्ञात होता हैं.

बाबर अपने समकालीन शासकों में अफगानों के अतिरिक्त गुजरात, दक्षिण, मालवा, बंगाल, विजयनगर एवं राणा सांगा के राज्यों की चर्चा की हैं. उसने तुर्कों एवं अफगानों की सैन्य व्यवस्था का भी वर्णन किया हैं. बाबर जिन प्रदेशों से होकर गुजरा, जिन राज्यों से वह टकराया और जिन राज्यों के बारे में उसे जानकारी मिली, उसने सभी का वर्णन किया हैं. उदाहरणार्थ ग्वालियर, धौलपुर, सीकरी, मेवाड़ आदि का उसने विस्तृत विवरण दिया हैं.

बाबरनामा से बाबर के व्यक्तित्व के बारे में भी पर्याप्त जानकारी मिलती हैं. बाबरनामा या तुजुक ए बाबरी में बाबर ने अपने परिवार और अपने विरोधियों का अद्भुत चित्रण किया हैं. वह एक अच्छा मित्र भी था. उसने अपनी आत्मकथा में लिखा हैं कि अपने एक घनिष्ठ मित्र की मृत्यु होने पर उसने दस दिन तक आंसू बहाएं. यदपि वह कट्टर मुसलमान था तथापि वह मदिरापान भी करता था.

बाबर ने अपनी आत्मकथा में मदिरापान एवं साहित्यिक गोष्ठियों का सुंदर वर्णन किया हैं. किन्तु बाबर की आत्मकथा से उसके चरित्र का दूसरा पहलू भी साफ़ दिखाई देता हैं. बाबर अपने शत्रुओं के प्रति बड़ा निर्दयी था, उनकी खाल खिचवाता, आँखे फुडवाता और उनके कटे हुए सिरों की मीनारे बनवाता था. बाबर ने अपने निर्दयी कृत्यों का वर्णन बड़े ही गर्व के साथ किया हैं. युद्धों के वर्णन से उसकी उच्च कोटि की साहित्यिक क्षमता का पता चलता हैं. पानीपत और खानवा के युद्धों का वर्णन अत्यंत प्रभावशाली एवं रोमांचकारी हैं.

ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होते हुए भी बाबरनामा या तुजुक ए बाबरी में अनेक न्युनताएं पाई जाती हैं. नागरिक शासन प्रणाली में व्याप्त भ्रष्टाचार का वर्णन इस ग्रंथ में नहीं हैं. जबकि अब्बास खां की तारीखे शेरशाही में उसका उल्लेख मिलता हैं. युद्धों के वर्णन में भी पक्षपातपूर्ण दृष्टिकोण स्पष्ट दिखाई देता हैं.

पानीपत के युद्ध में उसने अपनी सेना की संख्या कम और इब्राहीम लोदी की अतिरंजित बताई हैं जो अविश्वसनीय हैं. इस युद्ध में अफगान सरदारों की गद्दारी के कारण इब्राहीम लोदी पराजित हुआ था, किन्तु बाबर ने इन महत्वपूर्ण तथ्यों की सर्वथा अवहेलना की. इसी प्रकार राणा सांगा द्वारा बाबर को निमंत्रित करना मनगढंत प्रतीत होता हैं. खानवा के युद्ध के समय सलहदी तंवर द्वारा किया गया विश्वासघात भी बाबर की विजय में सहायक सिद्ध हुआ था. लेकिन बाबर इस सम्बन्ध में भी मौन हैं.

बाबरनामा या तुजुक ए बाबरी में अनेक ऐसे अन्तराल भी हैं जिनमें किसी घटना का उल्लेख नहीं मिलता हैं. जैसे कि 14 फरवरी 1483 से जून 1494 तक, 1503 से 1504 तक का समय, 1508 से 1519 तक का समय, 25 जनवरी 1520 से 16 नवम्बर 1925 ई तक तथा 3 अप्रैल 1528 से 17 सितम्बर 1528 और इसके बाद के दिनों का तो बहुत कम ही विवरण मिलता हैं. इन अंतरालों की वजह से उसके समय का सही इतिहास नहीं लिखा जा सकता हैं.

उपर्युक्त न्यूनताओं के बावजूद बाबरनामा या तुजुक ए बाबरी की अधिकांश घटनाएं विश्वस्नीय हैं. इसलिए इस ग्रंथ के ऐतिहासिक महत्व की उपेक्षा नहीं की जा सकती. डेनिसन रास ने लिखा हैं कि बाबर के आत्म चरित्र की गणना विश्व के युगयुगीन साहित्य में एक आकर्षक एवं रोमांचकारी रचनाओं में करनी चाहिए.

श्रीमती बेवरीज जिसनें इस ग्रंथ का अंग्रेजी अनुवाद किया हैं. ने लिखा हैं उसकी आत्मकथा उन अमूल्य रचनाओं में हैं. जो सभी युगों के लिए उपयोगी हैं और उसकी तुलना सेंट आगस्टाइन, रूसो, गिबन और न्यूटन के आत्मचरित्रों से करनी चाहिए. एशिया में वह एकमात्र उदहारण हैं.

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