बछबारस की कथा कहानी व्रत पूजा विधि | Bach Baras Katha in Hindi

बछबारस की कथा कहानी व्रत पूजा विधि | Bach Baras Katha in Hindi

बछबारस का त्यौहार भाद्रपद (भादों) द्वादशी को मनाया जाता हैं. इस दिन व्रत रखने वाले स्त्री पुरुषों को गाय के बछड़े की पूजा करनी चाहिए. अगर किसी के यहाँ गाय का बछड़ा ना हो तो किसी दूसरे की गाय के बछड़े की पूजा की जाती हैं. किसी भी सूरत में गाय का बछड़ा ना मिले तो बछबारस की पूजा के लिए मिट्टी का गाय का बछड़ा बनाकर भी पूजा की जाती हैं.Bach Baras

बछबारस व्रत पूजा विधि (Bach Baras vrat Pooja Vidhi)

इस दिन की पूजा में उसके ऊपर दही, भीगा हुआ बाजरा, आटा, घी आदि चढ़ावे, फिर बछबारस की कहानी सुने. फिर मोठ, बाजरा पर एक रुपया रखकर वायना काढ़ सासुजी को दे दे.

इस दिन बाजरा की ठंडी रोटी खावे, फिर रोली या हल्दी से तिलक लगाना चाहिए. चावल दूध चढ़ावे. बछबारस के दिन गाय का दूध, दही, गेहूं, चावल नही खाना चाहिए. यह व्रत पुत्र प्राप्त करने के लिए किया जाता हैं.

अपने कुंवारे लड़के की कमीज पर सातियाँ बनाकर पहनावे और कुँए को पूजें. इससे बच्चें के जीवन की रक्षा होती हैं. भूत-प्रेत, नजर और रात के अचानक डर से बचत होती हैं.

जिस साल लड़के के विवाह या लड़का जन्म ले तो यह उजमन किया जाता हैं. इस दिन से एक दिन पहले एक सेर बाजरा दान में देवें. बछबारस के दिन एक थाली में 13 मोठ बाजरे की ठेरी बनाकर उस पर दो मुट्ठी बाजरे का आटा जिसमे चीनी मिली होवे रख देवे, एक तियल और रूप्या भी इस पर रखे.

इस सामान को हाथ फेरकर अपनी सासुजी के पाय लगकर दे. इसके बाद गाय के बछड़े और पानी के कुँए की पूजा करे. इसके बाद मंगल गीत गाएं और ब्राह्मणों को दान देना चाहिए.

बछबारस की कथा कहानी (Bach Baras Katha Story)

एक बार एक राजा थे, उसके सात बेटे तथा एक पौत्र था. एक दिन राजा को विचार आया कि एक कुआँ खुदवाया जाए. राजा ने अपनी मजदूरों को कुआँ खोदने का हुक्म दिया. कुछ ही दिन में कुआँ खुदकर तैयार हो गया, मगर उसमें छल्लू भर पानी भी नही निकला.

तभी राजा ने इस रहस्य का पता लगाने के लिए, विद्वान पंडितों को बुलाया, और उनसे पूछा- हे ब्राह्मण देव मैंने कुआँ खुदवाया मगर इसमें पानी नही निकला इसका क्या कारण हैं. पंडित ने राजा से कहा – महाराज अगर आप अपने नाती को बलि दे तथा यज्ञ करवाएं तो कुँए में पानी आ जाएगा.

राजा पंडित की बात मान गये, बच्चें को बलि देने की तैयारियां शुरू होने लगी. तभी बारिश होने लगी तथा पानी से कुआ भर गया. जब राजा को इस बात का पता चला तो वे पानी के उस कुँए को पूजने निकले. उस दिन राजा के घर में अचानक साग सब्जी समाप्त हो गया, नौकरानी ने गाय के बछड़े को काटकर बना दिया.

जब राजा रानी कुँए की पूजा करके वापिस महल को आए तो उन्होंने नौकरानी से पूछा, कि बछड़ा कहाँ हैं. तब नौकरानी ने कहा उसे तो मैंने काटकर साग बना दिया. राजा ने गुस्से में आकर कहा, अरे पापिन तूने यह क्या किया ? राजा ने उस मांस की हांडी को जमीन में गाढ़ दिया और कहने लगा- जब गाय वन से लौटकर आएगी तो मैं उसको किस प्रकार समझाउगा.

शाम को जब गाय वन से चरकर घर आई तो वहां पर बछड़े का मांस गड़ा हुआ था. उस जगह को अपने सींग से खोदने लगी. जब सिंग हाड़ी में जा लगा तो गाय ने उसे बाहर निकाला, उस हाड़ी से गाय का बछड़ा तथा राजा का नाती निकले. उसी दिन से इस दिन का नाम बछबारस पड़ गया और गायों तथा उनके बछड़ों की पूजा होने लगी.

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बछबारस का त्योहार कब मनाया जाता हैं, बछबारस  2018 व्रत कथा विधि कहानी के बारे में दी गईं जानकारी आपकों अच्छी लगी हो तो प्लीज इस लेख को अपने दोस्तों के साथ जरुर शेयर करे.

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