बैंक ड्राफ्ट और बैंकर्स चेक क्या है इसकी जानकारी | Bank Draft in Hindi

Bank Draft in Hindi पक्षकार विनिमय साध्य विलेख अधिनियम की धारा 85 (a) के अनुसार बैंक ड्राफ्ट किसी बैंक शाखा द्वारा उसी बैंक की दूसरी शाखा के नाम लिखा गया एक आदेश है, जिसमे लिखी हुई रकम को आदेशानुसार व्यक्ति द्वारा मांगने पर भुगतान करने का आदेश दिया जाता है.

बैंक ड्राफ्ट एक स्थान से दुसरे स्थान पर धन प्रेषण का एक सरल, सुरक्षित एवं मितव्ययी उपाय है. जिसे बैंक द्वारा पूरा मूल्य एवं कमिशन प्राप्त करने के बाद जारी किया जाता है.

बैंक ड्राफ्ट क्या है | Bank Draft in Hindi

  • निर्गमक बैंक- बैंक ड्राफ्ट जारी करने वाले बैंक को निर्गमक बैंक कहा जाता है. जो निर्धारित शुल्क या कमीशन लेकर बैंक ड्राफ्ट बनाता है. ड्राफ्ट के माध्यम से निर्गमक बैंक शोधी बैंक को आदेश देता है. कि प्रेषक द्वारा ड्राफ्ट प्रस्तुत करने पर उसकी राशि का भुगतान कर दिया जावे.
  • क्रेता- जो व्यक्ति ड्राफ्ट बनवाता है उसे ड्राफ्ट का क्रेता कहा जाता है. क्रेता को कमीशन व ड्राफ्ट राशि सहित निर्धारित प्रपत्र भरकर निर्गमक बैंक में जमा करवाना होता है.
  • अदाता या प्रापक- ड्राफ्ट जिस व्यक्ति या संस्था के पक्ष में लिया जाता है, उसे ड्राफ्ट का आदाता कहते है. शोधी बैंक आदाता या प्रापक को ड्राफ्ट का भुगतान करने के लिए उतरदायी होता है.
  • शोधी बैंक- जिस बैंक को ड्राफ्ट का भुगतान करने का आदेश दिया जाता है, उसे शोधी बैंक कहा जाता है.

पे-ऑर्डर (बैंकर्स चैक) Pay order

पे ऑर्डर बैंक की ओर से स्थानीय ग्राहकों को भुगतान करने के लिए जारी किया जाता है. क्रेता द्वारा पे ऑर्डर की राशि व कमीशन बैंक में निर्धारित प्रपत्र के साथ जमा करवाने पर बैंक द्वारा इसे जारी किया जाता है. जिसका भुगतान उसी बैंक द्वारा पे ऑर्डर को प्रस्तुत करने पर प्रापक को कर दिया जाता है.

पे ऑर्डर पर बैंक ड्राफ्ट के नियम ही लागू होते है किन्तु इसका शुल्क बैंक ड्राफ्ट की तुलना में कम होता है.

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