युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी पर निबंध | Yuvao Me Berojgari Ki Samasya Essay In Hindi

युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी पर निबंध Yuvao Me Berojgari Ki Samasya Essay In Hindi: बेकारी अथवा बेरोजगारी आज हमारे देश की सबसे बड़ी समस्या हैं. Unemployment का अर्थ होता है काम करने की इच्छा करने वाले लोगों को  काम का न मिलना बेरोजगारी कहते हैं. एक युग था जब हमारा देश सोने की चिड़ियाँ कहा जाता हैं सभी लोगों के पास कोई न कोई काम था लेकिन हजारो सालों की गुलामी तथा विदेशी सिस्टम को आयात कर अपने काम धंधों को खोकर अब काम कम और लोगों की कतार लग गई हैं. युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी पर छोटा बड़ा निबंध बता रहे हैं.

Yuvao Me Berojgari Ki Samasya Essay In Hindi

युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी पर निबंध Yuvao Me Berojgari Ki Samasya Essay In Hindi

पढ़ लिखकर रोजगार की तलाश में हैं जो
बेकार युवक कैसे हिंदोस्ता उठायेगे.

भारत में बेरोजगारी एक अनार सौ बीमार की मूर्तिमान कहानी हैं. शिक्षा संस्थानों से प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में डिग्री और डिप्लोमा लेकर निकलने वाले युवाओं की भीड़ के लिए नौकरियाँ और रोजगार कहाँ से आए, देश में करोड़पतियों और अरब पतियों की संख्या बढ़ रही हैं.

देशी कम्पनियाँ विदेशी कपनियों का अधिकरण कर रही हैं. विदेशी कम्पनियाँ देश में निवेश कर रही हैं. भारत महान आर्थिक शक्ति बनने जा रहा हैं. दूसरी ओर इस महान भारत में करोड़ो लोग बीस पच्चीस रुपये रोज पर जीवन बिताने को मजबूर है सपनों से सच्चाई को नहीं ढका जा सकता हैं.

भारत में बेरोजगारी दिशा व दशा– देश में बेरोजगारी के कई स्वरूप देखने को मिलते हैं. एक हैं आंशिक अल्पकालिक बेरोजगारी और दूसरी पूर्ण बेरोजगारी. आंशिक बेरोजगारी गाँवों में अधिक देखने को मिलती हैं. वहां फसल के अवसर पर श्रमिकों को काम मिलता हैं. शेष समय वे बेरोजगार रहते हैं. निजी प्रतिष्ठानों में कर्मचारी की नियुक्ति अनिश्चितता से पूर्ण रहती हैं. बेरोजगारी का दूसरा स्वरूप शिक्षित प्रशिक्षित बेरोजगारों तथा अशिक्षित अकुशल बेरोजगारों के रूप में दिखाई देता हैं.

बेरोजगारी के कारण– भारत में दिनों दिन बढ़ती बेरोजगारी के निम्न कारण हैं.

  • जनसंख्या के घनत्व में वृद्धि– यह बेरोजगारी की समस्या का मुख्य कारण हैं. जनसंख्या जिस गति से बढ़ती हैं, रोजगार के अवसर उस गति से नहीं बढ़ते हैं.
  • व्यावसायिक शिक्षा का अभाव– आज की शिक्षा प्रणाली में व्यावसायिक परामर्श की कोई व्यवस्था नहीं हैं. आज का बालक जो शिक्षा पाता हैं वह उद्देश्यरहित होती हैं. इस प्रकार वर्तमान शिक्षा प्रणाली भी बेकारी की समस्या का मूल कारण हैं.
  • लघु एवं कुटीर उद्योगों का अभाव– सरकार की उद्योग नीति भी इस समस्या को विकराल बना रही हैं. हमारे यहाँ औद्योगिकीकरण के रूप में बड़े उद्योगों को बढ़ावा दिया जा रहा हैं. मशीनीकरण के कारण बेकारी की समस्या और बढ़ गई हैं. लघु अथवा कुटीर उद्योगों के विकास से रोजगार के जो अवसर उपलब्ध हो सकते हैं, वह बड़े उद्योगों के लगने से नहीं मिल सकते हैं.
  • राजनीतिक स्वार्थ– आज आरक्षण के नाम पर समाज के एक बड़े शिक्षित वर्ग की दुर्दशा हो रही हैं. राजनीतिक स्वार्थों के कारण शिक्षित बेरोजगारी की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही हैं.
  • कृषि की उपेक्षा- सरकार द्वारा उद्योगों पर विशेष ध्यान देने और कृषि क्षेत्र की उपेक्षा किये जाने से ग्रामीण बेरोजगारी बढ़ रही हैं.
  • स्वरोजगार योजनाओं का दुरूपयोग– सरकार स्वरोजगार को प्रोत्साहन तथा सहायता दे रही हैं.किन्तु उनका लाभ वास्तविक पात्रों को नहीं मिल पाता हैं.

समस्या समाधान के प्रयास– किसी समस्या के कारण जान लेने के बाद निवारण का मार्ग स्वयं खुल जाता हैं. आज सबसे अधिक आवश्यकता सामाजिक क्रांति लाने की हैं. जनसंख्या वृद्धि पर नियंत्रण आज के युग की मांग हैं. शिक्षा व्यवसाय केंद्रित हो, शिक्षार्थियों को शिक्षा के साथ साथ रोजगारपरक उचित परामर्श दिया जाय. लघु और कुटीर उद्योगों को विकसित किया जाय.

उपसंहार– बेरोजगारों की बढ़ती फौज देश की अर्थव्यवस्था और विकास के बड़े बड़े दावों की पोल खोल रही हैं. बेकारी भत्तों, मुफ्त अनाज बांटने के नाटकों आदि से यह विकट समस्या नहीं सुलझेगी. आर्थिक और सामाजिक स्तर पर क्रन्तिकारी बदलाव और नियंत्रण ही इसका उपचार हो सकता हैं.

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