Beti Bachao Beti Padhao in Hindi | बेटी बचाओ बेटी बढ़ाओ

Beti Bachao Beti Padhao in Hindi बेटी इस दुनिया में सबसे बहुमूल्य उपहार हैं. वे लोग खुशनसीब होते हैं जिनके घर बेटी जन्म लेती हैं. इंसान को बेटे की प्राप्ति भाग्य से और बेटी सौभाग्य से मिलती हैं. मगर कुछ लोग बेटे के मोह में गर्भ में पल रही बेटी की हत्या करवा देते हैं. हमारे देश में कन्या भ्रूण हत्या जधन्य अपराध हैं इसकी रोकथाम के लिए कई कड़े कानून भी हैं. मगर पैसो की लालच की खातिर कुछ लोग अभी भी बेखौफ होकर भ्रूण हत्या को अंजाम दे देते हैं. आज के समय में घटता लिंगानुपात और कन्या भ्रूण हत्या की बढ़ रही घटनाओं के प्रति हमे जागरूक होना होगा. यदि बेटी ही नही होगी तो बहु कहाँ से आएगी, यह संसार आगे कैसे चलेगा. यह सवाल बेहद गंभीर हैं. भयानक स्थति उत्पन्न हो इससे पूर्व हमे जाग्रत होकर हमारे समाज में बेटी कों सुरक्षित करना होगा.

Beti Bachao Beti Padhao Kavita

बेटी बचाओ बेटी बढ़ाओ
॰कन्यादान हुआ जब पूरा,
आया समय विदाई का ॥
॰हँसी ख़ुशी सब काम हुआ था,
सारी रस्म अदाई का ।
॰बेटी के उस कातर स्वर ने,
बाबुल को झकझोर दिया ॥
॰पूछ रही थी पापा तुमने,
क्या सचमुच में छोड़ दिया ।
॰अपने आँगन की फुलवारी,
मुझको सदा कहा तुमने ॥
॰मेरे रोने को पल भर भी ,
बिल्कुल नहीं सहा तुमने ।
॰क्या इस आँगन के कोने में,
मेरा कुछ स्थान नहीं ॥
॰अब मेरे रोने का पापा,
तुमको बिल्कुल ध्यान नहीं ।
॰देखो अन्तिम बार देहरी,
लोग मुझे पुजवाते हैं ॥
॰आकर के पापा क्यों इनको,
आप नहीं धमकाते हैं ।
॰नहीं रोकते चाचा ताऊ,
भैया से भी आस नहीं ॥
॰ऐसी भी क्या निष्ठुरता है,
कोई आता पास नहीं ।
॰बेटी की बातों को सुन के ,
पिता नहीं रह सका खड़ा ॥
॰उमड़ पड़े आँखों से आँसू,
बदहवास सा दौड़ पड़ा ।
॰कातर बछिया सी वह बेटी,
लिपट पिता से रोती थी ॥
॰जैसे यादों के अक्षर वह,
अश्रु बिंदु से धोती थी ।
॰माँ को लगा गोद से कोई,
मानो सब कुछ छीन चला ॥
॰फूल सभी घर की फुलवारी से कोई ज्यों बीन चला ।
॰छोटा भाई भी कोने में,
बैठा बैठा सुबक रहा ॥
॰उसको कौन करेगा चुप अब,
वह कोने में दुबक रहा ।
॰बेटी के जाने पर घर ने,
जाने क्या क्या खोया है ॥
॰कभी न रोने वाला बापू,
फूट फूट कर रोया है ॥
बेटी बचाओ आगे बढ़ाओ
-राधा रानी शर्मा

हमारी इस प्रकृति में सभी जीवो और वस्तुओं के प्रति गजब का संतुलन हैं, इसी संतुलन के कारण संसार स्वाभाविक रूप से आगे बढ़ रहा हैं. मनुष्य के स्वार्थी स्वभाव के कारण वनों, वन्य जीवो और प्राकृतिक संसाधनो का दरुपयोग कर असंतुलन की स्थति का माहौल तैयार कर दिया हैं. व्यक्ति ने स्त्री जाति के साथ अन्याय करते हुए आज प्रति 1000 पुरुषो पर 600-700 स्त्रियों की संख्या जैसे भयानक वातावरण का निर्माण कर दिया हैं.

गर्भ में पल रहे बच्चे का लिंग परीक्षण करवाकर बेटी होने की स्थति में उन्हें दुनिया में आने से पूर्व ही मार देना कन्या भ्रूण हत्या कहलाती हैं. नवीनतम आकड़ो के मुताबिक यदि केरल को छोड़ दिया जाए तो हर राज्य में स्त्रियों की संख्या पुरुषो से कम है, और यह अनुपात निरंतर गिर रहा हैं. हरियाणा जैसे सम्पन्न राज्य में प्रति हजार पुरुषो पर 700 से कम स्त्रियों की संख्या निश्चय ही आने वाले बड़े खतरे की सूचक हैं.

राह देखता तेरी बेटी, जल्दी से तू आना ।
किलकारी से घर भर देना, सदा ही तू मुस्काना ॥
ना चाहूं मैं धन और वैभव, बस चाहूं मैं तुझको ।
तू ही लक्ष्मी, तू ही शारदा, मिल जाएगी मुझको ॥
सारी दुनिया है एक गुलशन, तू इसको महकाना ।
किलकारी से घर भर देना, सदा ही तू मुस्काना ॥
बन कर रहना तू गुड़िया सी, थोड़ा सा इठलाना ।
ठुमक-ठुमक कर चलना घर में, पैंजनिया खनकाना ॥
चेहरा देख के तू शीशे में, कभी-कभी शरमाना ।
किलकारी से घर भर देना, सदा ही तू मुस्काना ॥
उंगली पकड कर चलना मेरी, कांधे पर चढ़ जाना ।
आंचल में छुप जाना मां के, उसका दिल बहलाना ॥
जनम-जनम से रही ये इच्छा, बेटी तुझको पाना ।
किलकारी से घर भर देना, सदा ही तू मुस्काना ॥
बेटी बचाओ बेटी का सम्मान करो

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