Beti Bachao Beti Padhao In Hindi | बेटी बचाओ अभियान

Beti Bachao Beti Padhao In Hindi आज भी ह्गुम अठारहवी सदी में जी रहे हैं. पहले जब बेटी को दूध में मार दिया जाता था. हम तो उनसे भी गये गुजरे निकले हैं. उससमय कम से कसम बेटी जन्म तो लेती थी. लेकिन अब तो बेटी का चेहरा भी देखने नही देते, दो पल सास भी नही लेने देते. दुनियाँ का अहसास भी नही होने देते उन्हें गर्भ में ही समाप्त कर दिया जाता हैं. जरा इससे बड़ा पाप क्या हो सकता हैं.? निश्चित रूप से आज हमे इस स्थति से निकलने की आवश्यकता हैं.

बेटी बचाओ अभियान

Beti Bachao Beti Padhao In Hindi

बेटी के प्रति भेदभाव और देश में बढ़ते लैगिक असंतुलन जैसे व्यापक समस्या पर विचार करते हुए माननीय प्रधानमन्त्री श्री नरेंद्र मोदी ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ शुरुआत की. बेटी बचाओ अभियान का मुख्य उद्देश्य बेटी की भ्रूण हत्या पर रोक और समाज में उन्हें पुरुष के बराबर दर्जा दिलाने का उद्देश्य रखा गया.

हरियाणा के पानीपत से बेटी बचाओ अभियान के शुभारम्भ अवसर पर बोलते हुए पीएम मोदी ने देश की जनता से भावुक शब्दों में निवेदन किया था. यदि हम बेटियों का जन्म ही नही होने देगे तो बहुए कहा से आएगी. हम में से किसी को यह अधिकार नही हैं. कि किसी बेटी के जन्म से पूर्व ही उनकी जीवन लीला समाप्त कर दे.

हम लोगों समाज में एक नई मानसिकता को जन्म देना होगा. यदि हम चाहे कि हमारी बहु पढ़ी-लिखी और समझदार हो तो इसके लिए अपनी बेटियों को अच्छी शिक्षा दिलाना भी जरुरी बनता हैं. एक शिक्षित बेटी दुसरे घर में जाकर भी आपका नाम रोशन कर सके.

हमारी सोच बेटे को अधिक महत्व देती हैं. ये हमारी गलत मानसिकता हैं, जिसमे बेटे को बेटी से अधिक महत्वपूर्ण माना जाता हैं. तथा बेटी को पराया धन समझकर हमेशा उनकी उपेक्षा की जाती हैं. आज देश भर की शिक्षित और जागरूक बेटियों ने विभिन्न क्षेत्रों में अपना नाम कमाया हैं. न सिर्फ देश में बल्कि विदेशो में भी हमारी बेटियाँ निरंतर आगे बढ़ रही हैं.

इन बेटियों ने किया नाम रोशन (Beti Bachao Beti Padhao)

कल्पना चावला- कल्पना चावला मार्च 1995 में नासा के अन्तरिक्ष यात्री कोर में शामिल हुई. वर्ष 1998 चावला को पहली उड़ान के लिए चुना गया. कल्पना का पहला अन्तरिक्ष कार्यक्रम 19 नवम्बर 1997 को छ अन्तरिक्ष यात्री के समूह के साथ शटल कोलम्बिया की उड़ान एसटीएस 87 के साथ आरम्भ हुआ. इस तरफ कल्पना चावला अन्तरिक्ष में उड़ने वाली पहली भारतीय महिला के साथ-साथ अन्तरिक्ष में कदम रखने वाली दूसरी मूल भारतीय बनी.

सानिया मिर्जा सानिया भारत के लिए टेनिस खेलती हैं. जब वह मात्र १८ साल की थी, तो टेनिस में भारत का प्रतिनिधित्व करना शुरू किया. बेहद कम समय में मिर्जा ने दुनियाभर में खासी लोकप्रियता प्राप्त की. बेहतरीन खेल प्रदर्शन के लिए सानिया को वर्ष 2006 में पद्म श्री पुरस्कार से नवाजा गया. इसके साथ ही सबसे कम उम्र में यह खिलाब पाने वाली महिला के रूप में अपना नाम दर्ज कराया.

किरण मजूमदार शां मजूमदार बहुप्रतिभाशाली भारतीय उद्योग पति, टेक्नोकेट, अन्वेषक, बिओकान और जैव प्रोद्योगिकी संस्थान बैगलोर की संस्थापक हैं. वर्तमान में शां बायोकान लिमिटेड की प्रबन्धक और निदेशक भी हैं. इसके अतिरिक्त ये सिनजिंग इंटरनेशनल लिमिटेड और क्लानिजिन इंटरनेशनल कंपनी की अध्यक्ष भी हैं.

चंदा कोचर  वर्तमान में आईसीआई बैंक की सीईओ और डायरेक्टर चंदा कोचर राजस्थान राज्य के जोधपुर की रहने वाली हैं. 2005 से लगातार ये विश्व की सबसे ताकतवर महिलाओं में गिनी जाती हैं. फ़ोर्ब्स और फोर्च्यून पत्रिकओं ने इन्हे वर्ल्ड की टॉप पावरफुल लेडी में सम्मलित किया है.

वसुंधरा राजे सिधिया राजस्थान राज्य की वर्तमान मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी की दिग्गज नेत्री श्रीमती वसुंधरा राजे को राज्य की पहली महिला सीएम होने का गौरव प्राप्त हैं. 1984 की बीजेपी की राष्ट्रिय कार्यकारिणी में सम्मलित राजे भाजपा युवा मौर्चा और राज्य भाजपा की उपाध्यक्ष भी रह चुकी हैं. 1998-99 की अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमन्त्री रहते राजे को विदेश राज्य मंत्री बनाया भी बनाया गया था. वर्ष 2008 और 2013 में सिधिया लगातार दूसरी बार राज्य की मुख्यमंत्री बनी.

छवि राजावत  टोक जिले की रहने वाली छवि बेहतर लोक प्रशासक हैं. टोंक के सोड़ा गाँव की सरपंच के रूप में इन्होने देश के संभवतया पहली महिला जो एमबीए पास सबसे कम उम्र की महिला प्रत्याशी बनने का सम्मान प्राप्त हैं. इसके अतिरिक्त विगत वर्षो में स्थापित इन्डियन वीमेन बैंक की डायरेक्टर भी हैं, पुणे से एमबीए करने वाली छवि के नाम कई कॉर्पोरेट कम्पनी भी हैं.

साइना नेहवाल भारत की शीर्ष बैडमिंटन खिलाड़ी नेहवाल भारत सरकार की और से सर्वोच्च खेल रत्न राजीव गाँधी खेल पुरूस्कार और पद्म श्री खिताब से नवाजा गया. वर्ष  2012 को लन्दन में आयोजित ओलम्पिक खेलों की सिंगल स्पर्धा में कास्य पदक अपने नाम कर इतिहास रचा था.

इस तरह के हजारों उदहारण हमे अपने आस-पास देखने को मिलते हैं, जिससे किसी भी क्षेत्र में बेटियाँ अपने कौशल जीवट और मेहनत के दम पर ऊँचा मुकाम प्राप्त कर सकती हैं. आज के समय में आवश्यकता इस बात की हैं. बेटियों को सही दर्जा दिलाने के लिए भेदभाव को जड़ से समाप्त कर समाज से कन्या भूर्ण हत्या पर पूर्णत रोक लगाई जाए.

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