Bhagat Andolan In Hindi | गुरु गोविन्द गिरी का भक्त आंदोलन का इतिहास

Bhagat Andolan In Hindi गुरु गोविन्द गिरी का भक्त आंदोलन का इतिहास : राजस्थान के डूंगरपुर व बाँसवाड़ा में भील जनजाति में सामाजिक जाग्रति उत्पन्न करने व भील जनजाति को संगठित करने हेतु गोविन्द गुरु Bhagat Andolan द्वारा भक्त आंदोलन चलाया गया. Bhagat Andolan के सूत्रधार गोविन्द गुरु का जन्म डूंगरपुर राज्य  के बांसियाँ गाँव में 20 दिस. 1858 को एक बंजारा परिवार में हुआ था.

Bhagat Andolan In Hindi |गोविन्द गिरी का भक्त आंदोलन का इतिहास

Bhagat Andolan In Hindi गुरु गोविन्द गिरी का भक्त आंदोलन का इतिहास

History of the Bhagat Andolan movement In Hindi of Guru Gobind Giri

गुरु गोविन्द गिरी ने 1883 ई में सम्प सभा की स्थापना की. उन्होंने मानगढ़ पहाड़ी को अपना कार्यस्थल बनाया, इनके शिष्य भगत कहलाए. 17 नवम्बर 1913 को मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन मानगढ़ पहाड़ी पर एकत्रित हजारों भील आदिवासी पर कर्नल शटन के आदेश पर रियासत की सैनिक टुकड़ियो ने फायरिंग की जिसमें करीब 1500 भील मारे गये.

गोविन्द गिरी द्वारा भीलों को संगठित कर भक्त आंदोलन की शुरुआत

गोविन्द गिरी व डूंगर के पटेल पुंजा धीर को बंदी बना लिया गया. पूंजा धीर ही पहला व्यक्ति था जिसने आत्मसमर्पण करते हुए अन्यों को भी आत्म समर्पण के लिए प्रेरित किया. दोनों को संतरामपुर व अहमदाबाद की साबरमती जेल में रखा गया.इस प्रकार भील क्रांति को निर्दयता पूर्वक कुचल दिया गया.

मानगढ़ हत्याकांड राजस्थान में जलियांवाला बाग हत्याकांड के नाम से जाना जाता हैं. बम्बई सरकार ने बेलगाम के अतिरिक्त सेशन जज फेडरिक विलियम एलीसन को तथा एजीजी राजपुताना ने मेजर ह्यूज आगस्टस केप्पेल गफ को ट्रिब्यूनल का सदस्य मनोनीत किया गया.

2 फरवरी 1914 को यह ट्रिब्यूनल गठित किया गया. इस ट्रिब्यूनल ने संतरामपुर में मुकदमे की सुनवाई की, गोविन्द गिरी को मृत्यु दंड व पुंजा धीर को आजीवन कारावास की सजा दी गई. गोविन्द गिरी की सजा को आर पी बारो ने आजीवन कारावास की सजा में बदल दिया.

सजा को कम करते हुए उन्हें 12 जुलाई 1923 को संतरामपुर जेल से इस शर्त पर रिहा किया गया कि वे संतरामपुर, डूंगरपुर, बाँसवाड़ा व कुशलगढ़ के राज्यों में प्रवेश नहीं करेगे. गुरु गोविन्द गिरी जेल से छूटने के बाद अहमदाबाद संभाग में पंचमहल जिले के झालोद तालुका के क्म्बोई गाँव में रहने लगे.

वहीँ 30 अक्टूबर 1931 को उनका देहांत हो गया. कम्बाई में अब भी उनकी समाधि स्थल पर एक चबूतरा बना हुआ हैं. मानगढ़ धाम में 2 सितम्बर 2002 को तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा शहीद स्मारक का लोकार्पण किया गया. मानगढ़ धाम राजस्थान, गुजरात और मध्यप्रदेश के आदिवासियों में अपार श्रद्धा का केंद्र स्थल हैं. मानगढ़ हिल पर गोविन्द गुरु के नाम पर बोटेनिकल गार्डन का उद्घाटन किया गया.

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