Bhagwan Rishabhdev History In Hindi | भगवान ऋषभदेव आदिनाथ का इतिहास जीवन परिचय कहानी जयंती

Bhagwan Rishabhdev History In Hindi | भगवान ऋषभदेव आदिनाथ का इतिहास जीवन परिचय कहानी जयंती 2019: जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ जी जिन्हें ऋषभनाथ, वृषभनाथ के नाम से जाना जाता हैं. यह न सिर्फ जैन धर्मावलम्बियों के लिए आदर्श पुरुष हैं बल्कि हिन्दू ग्रथों में भी इन्हें महापुरुष माना गया हैं. आज हम भगवान ऋषभदेव के पवित्र इतिहास जीवन तथा उनके सम्बन्ध में प्रचलित मान्यताओं के बारें में भी जानेगे. इन्हें बहगवाँ की उपाधि दी जाती हैं. साथ ही वृषभदेव तथा आदिनाथ जी का भगवान शिव से भी गहरा नाता हैं. उनके बारें में यहाँ हम विस्तार से अध्ययन करेगे.

Bhagwan Rishabhdev History In Hindi | भगवान ऋषभदेव आदिनाथ का इतिहास जीवन परिचय कहानी जयंती

Bhagwan Rishabhdev History In Hindi | भगवान ऋषभदेव आदिनाथ का इतिहास जीवन परिचय कहानी जयंती

अन्य नाम केसरियाजी, कालिया बाबा, ऋषभदेव, वृषभदेव
पिताजी का नाम महाराज नाभि
चिह्न बैल
जन्म चैत्र कृष्ण ९
माताजी महारानी मरूदेवी
जन्म स्थान अयोध्या
पुत्र पुत्रियाँ भरत चक्रवर्ती, बाहुबली, ब्राहमी और सुंदरी

Bhagwan Rishabhdev History In Hindi

वृषभ का अर्थ बैल होता है, आदिनाथ को कैलाश पर्वत पर ज्ञान प्राप्त हुआ था. ये सिर्फ जैनों के ही नहीं हिन्दुओं के भी तीर्थकर माना गया हैं. क्योंकि इन्हें नाथों के नाथ तथा आदिनाथ भी कहते हैं. जैन धर्म या श्रमण परम्परा की शुरुआत आदिनाथ से ही मानी जाती हैं. मनु से पूर्व इनका जन्म हुआ था इन्हें कुलकर भी कहते हैं.

‘कुल’ परम्परा के सातवें कुलकर नाभिराज और उनकी पत्नी मरुदेवी से ऋषभ देव का जन्म चैत्र कृष्ण-9 को अयोध्या में ऋषभदेव जी का जन्म हुआ था. आदिनाथ स्वायंभू मनु से पाँचवीं पीढ़ी में इस क्रम में हुए- स्वायंभू मनु, प्रियव्रत, अग्नीघ्र, नाभि और फिर ऋषभ. कुलकर नाभिराज से ही इक्क्षवाकु कुल की शुरुआत मानी जाती है.

आदिनाथ जी अपनी माँ की कोख में थे तब इन्होने सौलह शुभ स्वप्न देखे थे. उन्हें स्वप्न में आया कि एक सुंदर वृषभ उनके मुहं में प्रविष्ट हो गया. विशालकाय हाथी जिसके चार दाँत हैं, एक शेर, कमल पर बैठीं देवी लक्ष्मी, फूलों की माला, पूर्णिमा का चाँद, सुनहरा कलश, कमल के फूलों से भरा तालाब, दूध का समुद्र, देवताओं का अंतरिक्ष यान, जवाहरात का ढेर, धुआँरहित आग, लहराता झंडा और सूर्य.

अयोध्या नगरी के शासक नाभिराज की मृत्यु के पश्चात ऋषभ राजगद्दी पर बैठे. इन्होने कृषि, शिल्प, असि (सैन्य शक्ति ), मसि (परिश्रम), वाणिज्य और विद्या इन छः विभागों को बनाया तथा सम्पूर्ण नगर के लोगों को काम के आधार पर एक जाति व्यवस्था दी.

आदिनाथ मनोविज्ञान के भी जानकार थे. उन्होंने लोगों को अपनी सम्पूर्ण मानसिक तथा शारीरिक क्षमताओं के बेहतर उपयोग की शिक्षा दी. उनके पूर्व मानव अपने निर्वाह के लिए पूर्ण रूप से प्रकृति पर आश्रित था. खाना, पीना वस्त्र आदि की पूर्ति उन्ही से प्राप्त करते थे तथा समूहों में बसते थे.

भगवान ऋषभदेव ने पहली बार लोगों को कृषि कर्म से अवगत करवाया तथा भाषा लिपि के बोलने व लिखने के बारे में उन्हें ज्ञान दिया. नगर की स्थापत्य कला को नया रूप दिया तथा घरों को व्यवस्थित तरीके से बनाया जाने लगा. एक समाज को सुचारू रूप से चलाने के लिए जिन भी व्यवस्थाओं की आवश्यकता हुआ करती थी.

उन्होंने समाज में स्थापित की. बर्तन बनाना, स्थापत्य कला, शिल्प, संगीत, नृत्य और आत्मरक्षा के लिए शरीर को मजबूत करने के गुरु सिखाए. साथ ही सामाजिक सुरक्षा और दंड संहिता को पहली बार भारतीय समाज से अवगत करवाया था.

ऋषभदेव जयंती (Bhagwan Rishabh Dev Jayanti 2019 Date)

ऋषभदेव की जयंती को जैन समुदाय द्वारा बड़े ही धूमधाम के साथ एक पर्व के रूप में मनाई जाती हैं वर्ष 2019 में ऋषभदेव जी की जयंती 29 मार्च को मनाई जाएगी. अहिंसा एवं अपरिग्रह की शिक्षा देने वाले आदिनाथ जी से ही जैन धर्म अर्थात श्रमण परम्परा की शुरुआत मानी जाती हैं. इन्होने तीर्थ की रचना की जिसके कारण तीर्थकर कहलाएं.

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आशा करता हूँ दोस्तों आपकों Bhagwan Rishabhdev History In Hindi का यह लेख अच्छा लगा होगा. भगवान आदिनाथ & ऋषभदेव की जीवनी इतिहास जीवन परिचय कहानी जयंती 2019 के बारें में दी जानकारी आपकों पसंद आई होगी.

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