भैया दूज की कथा कहानी स्टोरी | Bhai Dooj Story In Hindi

Bhai Dooj Story In Hindi: भैया दूज अथवा भाई दूज का त्योहार कार्तिक शुक्ल पक्ष द्वितीया को मनाया जाता हैं. यह भाई बहिन के प्रेम का प्रतीक हैं. इस दिन भाई बहिन को साथ साथ यमुना स्नान करना, तिलक लगवाना तथा बहिन के घर जाकर भोजन करना अति फलदायी होता हैं. इस दिन बहिन भाई की पूजा कर उसके दीर्घायु तथा अपने सुहाग की कामना से हाथ जोड़ यमराज से प्रार्थना करती हैं इसी दिन सूर्य तनया जमुनाजी ने अपने भाई यमराज को भोजन कराया था, इसलिए हम इस त्योहार को यम द्वितीया या भैया दूज कहते हैं. भाई दूज के दिन श्रद्धावनत भाई को स्वर्ण, वस्त्र, मुद्रा आदि बहिन को देना चाहिए.

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भैया दूज कथा महत्व पूजा विधि महत्व (Bhai Dooj 2018 significance, Puja Vidhi, Story In Hindi, Story Of Bhai Dooj 2018 In Hindi Pdf): सूर्य भगवान की स्त्री का नाम संज्ञादेवी था, इनकी दो संताने पुत्र यमराज तथा कन्या यमुना थी.

Bhai Dooj Story- भाई दूज स्टोरी इन हिंदी

संज्ञा रानी पति सूर्य की उद्दीप्त किरणों को न सह पाने के कारण उत्तरी धुर्व परदेश की छाया में जाकर रहने लगी. उसी छाया से ताप्ति नही तथा शनिचर का जन्म हुआ. इसी छाया से अश्विनी कुमारों का भी जन्म बतलाया जाता है जो कि देवताओं के वैद्य माने जाते हैं.

इधर छाया का यम तथा यमुना से विमाता सा व्यवहार होने लगा, इससे खिन्न होकर यम ने अपनी एक नई नगरी यमपुरी को बसाया, यमपुरी में पापियों को दंड देने का कार्य संपादित करते भाई को देखकर यमुना जी गो लोक में चली गई जो उस समय कृष्णावतार की भूमि थी.

बहुत समय व्यतीत हो जाने पर एक दिन सहसा यम को अपनी बहिन की याद आई, उन्होंने दूतों को भेजकर यमुना जी को बहुत खोजवाया, मगर मिल न सकी. फिर यमराज स्वयं ही गोलोक गये जहा विश्राम घाट पर यमुना जी से भेट हुई. भाई को देखते ही यमुना ने हर्ष विभोर से स्वागत सत्कार किया और उन्हें भोजन कराया, इससे प्रसन्न हो यमराज ने वर मांगने को कहा.

यमुना ने कहा- हे भैया, मैं आपसे यह वरदान माँगना चाहती हूँ कि इस दिन मेरे जल में स्नान करने वाली नर नारी यमपुरी में न जाए.

प्रश्न बड़ा कठिन था, यम के ऐसे वर से यमपुरी का अस्तित्व ही समाप्त हो जाता. भाई को असमंजस में देखकर यमुना बोली- आप चिंता न करे. मुझे यह वरदान दे कि जो लोग आज यानि भैया दूज के दिन अपनी बहिन के घर जाकर भोजन करके, इस मथुरा नगरी स्थित विश्राम घाट पर स्नान करे, वह तुम्हारे लोक को न जाए.

इसे यमराज ने स्वीकार कर लिया. इस दिन जो सज्जन बहन के घर जाकर भोजन नही करेगे, उन्हें मैं बांधकर यमपुरी ले जाउगा और तुम्हारे जल में स्नान करने वालों को स्वर्ग प्राप्त होगा, तभी से यह भैया दूज का त्योहार मनाया जाता हैं.

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