भैया दूज की कहानी और निबंध क्यों मनाया जाता है भाई दूज का त्योहार | Bhaiya Dooj Story Kahani In Hindi

भैया दूज की कहानी और निबंध क्यों मनाया जाता है भाई दूज का त्योहार | Bhaiya Dooj Story Kahani In Hindi:  भाई दूज हिन्दुओं का एक महत्वपूर्ण त्योहार है इसे भैया दूज भी कहा जाता हैं. Bhaiya Dooj Story & Bhaiya Dooj Kahani में आपकों इस पर्व को मनाने के पीछे जुडी भाई बहिन की कहानी स्टोरी का प्रसंग बतायेगे. हिन्दू कलैंडर के अनुसार कार्तिक शुक्ल द्वितीया तिथि को मनाए जाने वाले भैया दूज को भाई बहिन का त्योहार भी माना जाता हैं. यह दिवाली के पांच दिनों के पर्व का आखिरी दिन होता हैं, जो बड़ी दिवाली के दो दिन बाद पड़ता हैं. इस पर्व की को मनाने की मान्यता के अनुसार बहिन अपने भाई को घर बुलाकर उनकी सेवा साकरी करती है तथा उनकी लम्बी आयु के लिए भगवान से कामना करती हैं. हम पढ़ेगे भैया दूज कहानी स्टोरी निबंध और इसे मनाने का तरीका कारण व महत्व इस लेख में जानेगे.

Bhaiya Dooj Story Kahani In Hindi- भैया दूज की कहानीBhaiya Dooj Story Kahani In Hindi- भैया दूज की कहानी

भाई दूज कथा स्टोरी मीनिंग कैसे मनाया जाता है भाई दूज का त्योहार how to celebrate bhai dooj: भैया दूज कथा स्टोरी इन हिंदी : एक पौराणिक कथा के अनुसार नारायण की पत्नी का नाम छाया था, जिनकें गर्भ से एक युवक एवं एक युवती का जन्म हुआ, जिनका नाम क्रमशः यमराज और यमुना रखा गया था. बहिन यमुना अपने भाई यमराज से बेहद लगाव रखती थी. बहिन को बड़ी होने पर शादी करके ससुराल भेज दिया गया. यमुना बराबर अपने भाई को घर आकर भोजन करने का न्यौता देती रही. यमराज उन्हें जरुर आउगा कह कहकर इसे टालता रहा. यमुना ने यमराज को एक दिन सौगंध दिलाकर आने का न्यौता दिया, वह दिन था कार्तिक शुक्ल द्वितीया का.

भैया दूज की कहानी और निबंध क्यों मनाया जाता है भाई दूज का त्योहार | Bhaiya Dooj Story Kahani In Hindi

इस बार यमराज से भी काफी सोचा आखिर लोग मुझसे भयभीत रहते है, मुझसे बात तक नही करते. मगर एक बहिन ही है जो निरंतर कई वर्षों से मुझे बुला रही है तथा अपने घर आकर भोजन करने का न्यौता दे रही हैं. भाई के धर्म को अदा करने का वक्त आ चूका है अतः उसने अपनी कारागृह में बंदी सभी जनों को मुक्त कर यमुना के घर पंहुचा. जब यमुना ने साक्षात् अपने भाई को देखा तो वह विश्वास नही कर पाई. उनके कई वर्षों का सपना आज पूर्ण होने जा रहा था. वह नहा धोकर भाई के लिए स्वादिष्ट भोजन तैयार करके लाई.

इस तरह यमराज ने यमुना के घर बेहद आदर सत्कार के साथ भोजन ग्रहण किया, तत्पश्चात उन्होंने यमुना से कहा बहिन आप क्या चाहती है अपना वरदान मांगों, तब यमुना ने कहा आप इसी दिन हर साल मेरे घर आकर भोजन ग्रहण करो. तब यमराज ने कहा. यह दिन यम द्वितीया अर्थात भाई दूज का दिन कहलायेगा. इस दिन जो बहिन अपने भाई को घर बुलाकर आदर सत्कार से भोजन कराकर उन्हें टीका करेगी उन्हें मृत्यु का भय नही रहेगा, यह मेरा वरदान हैं.

इसी कहानी और मान्यता के चलते आज भी भाई दूज के दिन बहिनें अपने भाई को घर आकर भोजन करने का न्यौता देती है उन्हें तिलक लगाती है तथा लम्बी आयु की कामना करती हैं. बदले में भाई उन्हें बहुमूल्य उपहार भेट कर बहिन का धन्यवाद करता हैं. माना जाता है कि ऐसा करने से मृत्यु का भय दूर हो जाता हैं.

भैया दूज की कहानी और महत्व bhaiya dooj 2018 how to celebrate bhai dooj

भैया दूज | भाई दूज | यम द्वितीया की पौराणिक कहानी Bhai Dooj Katha, Bhaiya Dooj, Bhai duj,Brother-sister Festival Kartik Shukla: यदि भाईदूज के दिन बहिन अपने हाथों से खाना बनाकर परोसकर भाई को खिलाती है तो ऐसा माना जाता है कि उन्हें लम्बी आयु मिलती है तथा जीवन में व्याप्त सभी दुखों व कठिनाइयों से छुटकारा मिल जाता हैं. जहाँ तक संभव हो हर भाई को इस दिन अपनी बहिन का अतिथि बनना चाहिए, यदि सगी बहिन न हो तो चचेरी या ममेरी बहिन भी हो सकती हैं. 

इस दिन के भोजन में मुख्य रूप से चावल को अच्छा माना गया हैं, भोजन के आसन पर बैठने के बाद भाई को गंगा यमुना लक्ष्मी गाय अथवा किसी स्त्री शक्ति का ध्यान लगाना चाहिए. भाई दूज का दिन कई स्थानों पर गोधन कूटने के रूप में भी जाना जाता हैं. इस दिन गाय के गोबर की बनी मूर्ति पर इट रखकर इसे मुसल के साथ तोड़ने की प्रथा हैं. इस तरह रक्षाबन्धन के बाद मनाये जाने वाले भाई दूज का पर्व भाई बहिन का दूसरा सबसे बड़ा पर्व है इस दिन यमुना एवं उनके भाई यमराज की पूजा करने का विधान हैं.

भाई दूज पर निबंध Bhaiya Dooj Essay In HindiShort Essay on 'Bhai Dooj' in Hindi | 'Bhai Dooj' par Nibandh भाई दूज पर हिन्दी निबंध Dooj Essay · Bhaiya Dooj Bhojpuri Film · Bhai Dooj In Hindi · Hindi Essay On Bhai Dooj

Short Essay on ‘Bhai Dooj’ in Hindi | ‘Bhai Dooj’ par Nibandh भाई दूज पर हिन्दी निबंध Dooj Essay · Bhaiya Dooj Bhojpuri Film · Bhai Dooj In Hindi · Hindi Essay On Bhai Dooj: दिवाली को हिन्दू धर्म का सबसे प्राचीन एवं महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है यह कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि कार्तिक शुक्ल द्वितीया तक दो दिनों तक मनाया जाता हैं. इसका पहला दिन धनतेरस और अंतिम दिन भाई दूज के रूप में मनाया जाता हैं, इसे यम द्वितीया भी कहा जाता हैं. यह पर्व पूर्ण रूप से भाई बहिन के प्रेम एवं उनके रिश्ते पर आधारित है, जिनमें धार्मिक आस्था, विशवास एवं परम्परा का जुड़ाव भी हैं. 

सभी सम्बन्धों के अपने अपने दिन एवं पर्व होते हैं. भाई बहिन का रिश्ता सबसे पवित्र माना गया हैं. श्रावण पूर्णिमा को रक्षाबन्धन के बाद भाइयों और बहिनों के त्योहार के रूप में भाई दूज का पर्व मनाया जाता हैं. यह दिवाली के दो दिन बाद मनाया जाता हैं.

भाई दूज कैसे मनाते हैं- यह दिवाली का अंतिम दिवस एवं पर्व होता है मुख्य रूप से यह विवाहित बहिनों द्वारा ही मनाया जाता हैं. चूँकि अविवाहित बहिन अपने माता-पिता के घर ही रहती है इसलिए वह इस परम्परा का निर्वहन नही कर पाती हैं. विवाहित बहिने इस दिन अपने भाई के घर जाकर उन्हें अपने यहाँ आने का न्यौता देती हैं. भाई द्वारा बहिन के घर आने पर वह प्रेम पूर्वक उन्हें भोजन कराती है टीका लगाकर उनकी लम्बी आयु की कामना करती हैं. भाईदूज की कहानी एवं कई पौराणिक प्रसंग देश के विभिन्न भागों में प्रचलित है मुख्य रूप से इसे यमराज एवं बहिन यमुना की कहानी से जोड़कर देखा जाता हैं.

भैयादूज की मान्यता -इस दिन यमुना स्नान को पवित्र माना गया हैं प्रचलित मान्यता के मुताबिक़ बहिन अपने भाई को तिलक लगाकर भोजन कराती है बदले में भाई उन्हें कुछ उपहार भी देता हैं. इस तरह यह दो महत्वपूर्ण सम्बन्धों को और अधिक प्रगाढ़ करने वाला उत्सव भी हैं. बहिन अपने सौभाग्य एवं भाई इस पर्व से लम्बी आयु की दुआ प्राप्त करते हैं.

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