BHARAT BANDH 2 APRIL: by Dalit organisations For Sc St Act Supreme Court Order

BHARAT BANDH 2 APRIL आज से तक़रीबन 30 वर्ष पहले 1990 को पारित किये गये अनुसूचित जाति जनजाति उत्पीड़न निरोधक अधिनियम यानि Sc St Act एक बार फिर बवाल के हत्थे चढ़ चुका है. माननीय सुप्रीमकोर्ट द्वारा विगत 20 मार्च को इस एक्ट के दुरूपयोग को लेकर महाराष्ट्र के अधिकारी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए इस एक्ट का आज की परिस्थतियों में विश्लेषण किया था. जिसे कई दल एससी-एसटी एक्ट को सरकार द्वारा समाप्त करने का षड्यंत्र तक बता रहे है. तथा अब BHARAT BANDH 2 APRIL बुलाया जा रहा है.BHARAT BANDH 2 APRIL

भारत बंद (BHARAT BANDH 2 APRIL by Dalit organisations For Sc St Act)

असल में दलित अधिकारों की मांग की ओट में यह मामला राजनीती की भेट चढ़ गया है. 2019 के लोकसभा चुनाव से पूर्व विपक्षी पार्टियों के पास एक गर्मागर्म मुद्दा बन चुका है. वही सरकार को भी चुनावों के मध्यनजर बहुत बड़े वोट बैंक को हाथ से जाने नही देगी. मोदी सरकार द्वारा Sc St Act पर सर्वोच्च न्यायालय के इस निर्णय के लिए पुनर्विचार याचिका दायर अवश्य करने जाएगे.

वोट की खातिर ही सही हर एक भारतीय राजीनीतिक दल दलितों के मान-सम्मान की रक्षा का दावा करता है. 30 साल पुराने इस अधिनियम ने बेशक इस समुदाय के लोगों को अपने प्रति हो रहे दुर्व्यवहार के लिए तत्काल कार्यवाही का सुलभ अवसर था. बदलती परिस्थतियों में आज हमारा देश आगे बढ़ रहा है.

Sc St Act पर Supreme Court Order क्या है,व BHARAT BANDH 2 APRIL

अब वो समय नही रहा, जब लोग हर कार्य जातिवाद की दर्ष्टि से देखे. यह सच है कि राजनितिक दल अभी भी अपना जातिवाद का चश्मा बदल नही रहे, या बदलना नही चाहते है. सबसे बड़े विपक्षी दल कांग्रेस के महानायक स्वयं अपने सांसदों के साथ राष्ट्रपति कोविंद को मिलने पहुचे. इससे अवश्य सरकार की मुश्किलों में इजाफा हुआ है.

अब आपकों बताते है आखिर Sc St Act क्या था, और अब कोर्ट द्वारा किन संशोधनों को करने की बात कही गई है. यह एक्ट केवल गैर अनुसूचित जाति जनजाति के लोगों पर लागू होता है. इसके मायने यह हुए कि sc st समुदाय के लोग किसी भी अन्य धर्म या जाति के खिलाफ केस कर सकते है. इस कानून में कुछ बेहद छोटे छोटे अपराध के कारणों को शामिल किया गया है. जैसे यदि आप अनुसूचित जाति जनजाति के सदस्य है और आपकी किसी के साथ बोलचाल हो गई या गाली दे दी किसी ने रास्ता रोक दिया. आम जीवन में ऐसी घटनाएँ बड़ी संख्या में होती है, जिस पर sc st कानून कार्य करता है.

Sc St Act का दुरूपयोग कैसे होता है

सही मायनों में यह कानून बेहद शक्तिशाली व दलित अत्याचार को पूरी तरह समाप्त करने में कारगर है. मगर sc st कानून का गलत उपयोग इसका दूसरा पहलू है. एक वेबसाइट पर प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक़ पुलिस रिपोर्ट की जानकारी के मुताबिक़ पूरे साल में sc st एक्ट के कुल 5347 मामले दर्ज हुए जिनमें 912 मामले झूठे साबित हुए यानि हर छठा केस किसी व्यक्ति को व्यक्तिगत नुकसान पहुचाने व परेशान करने के उद्देश्य से sc st एक्ट के तहत तुरंत गिरफ्तार करवाया जा सकता था.

Supreme Court Order BHARAT BANDH 2 APRIL को कितना जायज

माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा न तो इस एक्ट को समाप्त किया है, और न ही इसके प्रभाव को कम करने की कोशिश की है. किसी भी आम आदमी को ख़ास कर झूठे पुलिस केस में कितनी परेशान और अपमान का सामना करना पड़ता है. इस विषय को हर संवेदनशील इंसान अच्छी तरह समझ सकता है. कोर्ट ने इसी नजरिये इस प्रभावशाली कानून के दुरूपयोग पर रोक लगाने के लिए आरोपी की गिरफ्तारी के पूर्व मौके पर उस घटना की जानकारी के बाद ही उसे आरोपी होने की स्थति में ही गिरफ्तार किया जाएगा. तथा किसी सरकारी अधिकारी को इस मामले में जमानत लेने का भी हक़ होगा.

यदि पूर्वाग्रह मुक्त होकर कोर्ट की इस पहल पर विचार किया जाए तो यह इस कानून को और मजबूत करने का भी कार्य करती है. कुछ लोगों को इसमें दी जाने वाली जमानत पर अधिक एतराज है. मगर झूठे केस के आरोपी को भी कई महीनों तक केस के निर्णय पर पहुचने तक कारावास भुगतनी पडती थी.

Supreme Court Order का विरोध या स्वागत ?

अगर वाकई आरोप सही है तो यक़ीनन जमानत के बाद भी उसे साबित होने पर जेल ही जाना है. भारत में इस तरह के कई कानून है जिनमे पहले गिरफ्तारी व बाद में जांच होती है, केस के झूठा साबित होने पर बड़ी संख्या में लोगों को जेल यात्रा करनी पड़ती है. सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला अच्छा या बुरा इसकी राय आपकों स्वयं बनानी है.

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