Bhilwara Tourist Place In Hindi | भीलवाड़ा के दर्शनीय स्थान इतिहास व महत्वपूर्ण जानकारी

Bhilwara Tourist Place In Hindi | भीलवाड़ा के दर्शनीय स्थान इतिहास व महत्वपूर्ण जानकारी : राजस्थान के महत्व पूर्ण शहरों में भीलवाड़ा की गिनती जाती हैं. 11 वीं सदी के ऐतिहासिक शहर भीलवाड़ा धार्मिक लिहाज से भी अहम केंद्र हैं. हिंदू धर्म से जुड़े कई अहम स्थान यहाँ स्थित हैं. भीलवाड़ा जिले का नामकरण यहाँ की बहुसंख्यक भील जनजाति के नाम पर पड़ा हैं. जिले का शाब्दिक अर्थ हैं भीलों का स्थान या जमीनं. यही के भीलों ने हल्दीघाटी के युद्ध में राणा प्रताप की ओर से लड़े थे. एक नजर भीलवाड़ा के दर्शनीय पर्यटक स्थलों (bhilwara tourist place) पर.

Bhilwara Tourist Place In Hindi | भीलवाड़ा के दर्शनीय स्थान

Bhilwara Tourist Place In Hindi भीलवाड़ा के दर्शनीय स्थान इतिहास व महत्वपूर्ण जानकारी

भीलवाड़ा प्रमुख पर्यटक स्थल – Best Places In Bhilwara Tourism In Hindi

places to visit in bhilwara: भीलवाड़ा को राजस्थान की टेक्सटाइल सिटी तथा राजस्थान का मेनचेस्टर भी कहा जाता हैं. अपने अतीत में यहाँ सिक्के निर्माण की टकसाल हुआ करती थी. यह भी मान्यता हैं कि भिलाई नामक सिक्कों के निर्माण के कारण यह भीलवाड़ा कहलाया. प्राकृतिक सुन्दरता के सम्पूर्ण शहर से जुड़े कई रहस्य भी हैं. आपकों जानकर यकीन नहीं होगा कि मृत्यु के बाद लादेन के आधार में भी उसका स्थान भीलवाड़ा दिखाया गया था. bhilwara places to visit में कुछ प्रसिद्ध स्थानों को जानते हैं.

Bhilwara Tourist Place

  • शाहपुरा का रामद्वारा– शाहपुरा, भीलवाड़ा में रामस्नेही संप्रदाय का मठ
  • सवाई भोज मंदिर– यह आसीन्द भीलवाड़ा में खारी नदी के तट स्थित लगभग 11 सौ वर्ष पुराना देवनारायण मंदिर हैं. यह गुर्जर  जाति के लोगों के लिए विशेष श्रद्धा का केंद्र हैं.
  • बाईसा महारानी का मंदिर– यह प्रसिद्ध देवालय गंगापुर भीलवाड़ा में स्थित हैं. यह मन्दिर ग्वालियर के महाराजा महादजी सिंधियां की पत्नी महारानी गंगाबाई की स्मृति में बनाया गया.
  • मांडल- इस कस्बे में प्रसिद्ध प्राचीन स्तम्भ मिंदारा, जगन्नाथ कच्छवाहा की बतीस खम्भों की छतरी एवं मेजा बाँध प्रमुख दर्शनीय स्थल हैं.
  • बिजोलिया– स्वतंत्रता पूर्व के देश के पहले संगठित किसान आंदोलन के लिए प्रसिद्ध बिजौलिया कस्बे में प्राचीन मंदाकिनी मन्दिर एवं बावड़ियाँ हैं.
  • शाहपुरा- यहाँ प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी केसरीसिंह बारहठ और प्रतापसिंह बारहठ की हवेली एक स्मारक के रूप में संरक्षित हैं. यह कस्बा फड़ चित्रण के लिए प्रसिद्ध हैं.
  • मेनाल– चित्तौड़गढ़ बूंदी मार्ग पर मांडलगढ़ कस्बे के निकट स्थित यह स्थान नीलकंठेश्वर महादेव के लिए प्रसिद्ध हैं. यहाँ तीन नदियाँ बनास, बेडच व मेनाल का त्रिवेणी संगम हैं.
  • बागोर– कोठारी नदी के तट पर स्थित बागोर एक पुरातात्विक स्थल हैं. बस्ती से एक किमी पूर्व में महासतियों का टीला नाम का स्थल पाषाणकालीन अवशेषों के लिए विश्व विख्यात हैं.
  • चमना बावड़ी– शाहपुरा भीलवाड़ा में स्थित भव्य और विशाल तिमंजिली बावड़ी जिसका निर्माण विक्रम सम्वत 1800 में चमना नाम की एक गणिका के लिए महाराजा उम्मेदसिंह प्रथम ने करवाया था.
  • सीताराम जी की बावड़ी– भीलवाड़ा में स्थित इस बावड़ी में एक गुफा बनी हुई हैं. जिसमें बैठकर रामस्नेही संप्रदाय के प्रवर्तक स्वामी रामचरण जी ने 36 हजार पदों की रचना की तथा रामस्नेही संप्रदाय की स्थापना की.
  • मांडलगढ़ गिरिदुर्ग– बनास, बेडच और मेनाल नदियों के संगम पर बीजासण पहाड़ी व नकटिया की चौड़ के निकट स्थित मंडलाकृति वाला दुर्ग. यह किला ईसा पूर्व से मानव का आवास स्थल रहा हैं. अकबर ने मांडलगढ़ को केंद्र बनाकर महाराणा प्रताप के विरुद्ध सैनिक अभियान किये थे.
  • बतीस खम्भों वाली छतरी-यह छतरी आमेर के जगन्नाथ कच्छवाहा की स्मृति में शाहजहाँ द्वारा निर्मित हैं. जगन्नाथ कछवाहा का मांडल में मेवाड सेना के विरुद्ध युद्ध में निधन हो गया था.

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