भ्रष्टाचार की समस्या पर निबंध Bhrashtachar Ek Samasya Essay in Hindi

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Bhrashtachar Ek Samasya Essay in Hindi

भ्रष्टाचार की समस्या पर निबंध Bhrashtachar Ek Samasya Essay in Hindi

यदि किसी हरे पेड़ में दीमक लग जाए तो जल्द ही वह अंदर से खोखला हो जाएगा. बस यही हमारे भारत के साथ भी यही हो रहा हैं. भ्रष्टाचार जैसी विकराल समस्या ने भारत की जड़ो तक को खोखला कर दिया गया हैं. भारत नश नश में आज भ्रष्टाचार बसा हुआ हैं. सरकारी पदों पर बैठे बाबू से लेकर उच्च पदों पर विराजमान अधिकारी भी बिना पैसे लिए कोई काम नहीं करता हैं.

भ्रष्टाचार एक सामाजिक बुराई हैं. जिनसे प्रत्यक्ष रूप से हम सब जिम्मेदार हैं. दूसरी तरफ ७० वर्षों से चली आ रही व्यवस्था में भ्रष्टाचार को हमारी व्यवस्था में मौन स्वीकार्यता दे दी है. इसे रोकने के लिए कुछ विधान भी बनाए गये जिसके तहत रिश्वत देने और लेने वाले को समान रूप से आरोपी माना गया हैं. मगर यदि इसे धरातल पर लाकर देखा जाए तो यह बहुत नाकाफी हैं.

यदि आपकों किसी दस्तावेज पर सरकारी कर्मचारी के दस्तखत करवाने है अथवा किसी प्रमाण पत्र की आवश्यकता है या कोई प्रशासन की स्वीकृति चाहिए तो आपकों अपने आवेदन पत्र के साथ साथ हजार दो हजार का नोट भी देना पड़ता हैं. यह बात भले ही हजम होने लायक नहीं हैं मगर यह आज की सच्चाई हैं. आम आदमी को इस सरकारी तन्त्र से कुछ भी काम करवाना है तो रिश्वत देनी अनिवार्य हैं, अन्यथा उन्हें हफ्तों तक एक से दूसरे दफ्तर तक चक्कर काटते रहना हैं.

भ्रष्टाचार समाप्त किये जाने की बाते तो आज दिन कोई नेता के मुहं से अवश्य सुनने को मिल ही जाती हैं मगर उनमें सच्चाई कही दूर दूर तक नहीं नजर आती. भारत में भ्रष्टाचार हर विभाग और भर्ती में सिर चढकर बोल रहा हैं. नौकरी के लिए रिश्वत जरुरी सी हो गयी हैं. इंटरव्यू फिक्स कर दिए जाते हैं ५-१० लाख रूपये खर्च कर सरकारी पद पाने वाले बाबू या जिला कलक्टर से यह आशा करना कि वह जनता की सेवा करेगा, यह तो छोटे मुहं से बड़ी बात ही होगी.

जो लोग घूस लेकर व्यवस्था में आते है उनकी प्राथमिकता अपने नुकसान की पूर्ति ही करेगे. देश के अधिकतर चैनल भी किसी ग्रुप के अधीन जा चुके हैं. अपने प्रयोजकों की विचारधारा को लेकर ही उनके खबरे होती हैं. मीडिया हाउस अपनी लाइन से हट कर कभी खबर नहीं दिखाएगे. राजनीति में विधायक और सांसदों के लिए टिकटों की बिक्री जारी हैं.

यदि भ्रष्टाचार को पूर्ण रूप से उखाड़ फेकना हैं तो सबसे पहले हमारी केंद्र एवं राज्य सरकार में ऐसे लोगों को लाना होगा जो अपने परिवार और पार्टी की बजाय देश का हित सोचे. सौभाग्य से भारत को अब एक ऐसा प्रधान मिला हैं. मगर एक व्यक्ति के प्रयास से विदेशों में भारत की लूट का भरा धन वापिस लाना, सिस्टम को पाक साफ़ करना, भ्रष्ट लोगों को व्यवस्था से बाहर करना संभव नहीं हैं इसके लिए देश के प्रत्येक नागरिक को आगे आना होगा.

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