Biography of Acharya Tulsi In Hindi | आचार्य तुलसी की जीवनी

Biography of Acharya Tulsi In Hindi | आचार्य तुलसी की जीवनीBiography of Acharya Tulsi In Hindi | आचार्य तुलसी की जीवनी

अणुव्रत आंदोलन के सूत्रधार आचार्य तुलसी का जन्म 20 अक्टूबर 1914 को नागौर जिले के लाडनू कस्बें में हुआ था. ग्यारह वर्ष की आयु में ही उन्होंने आचार्य कालुग्नि से दीक्षा ग्रहण की. अल्प समय में ही उन्होंने जैन आगम, न्याय, दर्शन आदि अनेक विषयों तथा संस्कृत, प्राकृत, हिंदी आदि भाषाओं में विशेश्यज्ञता प्राप्त कर ली.

बाईस वर्ष की आयु में वे तेरापंथ के नवें आचार्य बन गये. आचार्य तुलसी के नैतिक एवं चारित्रिक विकास को महत्वपूर्ण मानते थे. नैतिकता के उत्थान के लिए उन्होंने 1949 ई में अणुव्रत आंदोलन का सूत्रपात किया और अणुव्रत आंदोलन से जनमानस को जोड़ने हेतु एक लाख किलोमीटर की पदयात्राएं की.

आचार्य तुलसी ने यह संदेश दिया इंसान पहले इंसान, फिर हिन्दू या मुसलमान. अणुव्रत की गूंज देश ही नहीं दुनियां में भी हुई. लंदन की टाइम पत्रिका ने भी अणुव्रत आंदोलन की सराहना की.

अणुव्रत के नैतिकतामूलक कार्यक्रम को राष्ट्रपति राजेन्द्र प्रसाद, पंडित जवाहरलाल नेहरु, लोकनायक जयप्रकाश नारायण, आचार्य विनोबा भावे आदि का समर्थन मिला. आचार्य तुलसी ने नया मोड़ कार्यक्रम चलाकर दहेज, मृत्यु भोज, बाल विवाह, वृद्ध विवाह, पर्दा, अशिक्षा आदि सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध जागृति पैदा की.

आचार्य तुलसी ने सर्वधर्म सद्भावना और राष्ट्रीय उन्नयन के लिए भी कार्य किया. 1993 ई में राष्ट्रीय एकता के प्रयासों के लिए उन्हें इंदिरा गांधी राष्ट्रीय एकता पुरस्कार से नवाजा गया. 1995 ई में महाराणा मेवाड़ फाउंडेशन उदयपुर द्वारा उन्हें हाकिम खां सूरी सम्मान दिया गया.

आचार्य तुलसी ने हिंदी और राजस्थानी भाषा में लगभग 60 ग्रंथों की रचना की. विश्व में शान्ति और अहिंसा की स्थापना के उद्देश्य से तीन अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन क्रमशः लाडनूं, राजसमन्द और लाडनूं में आयोजित किये गये. 18 फरवरी 1994 को उन्होंने आचार्य पद से मुक्त होकर आचार्य महाप्रज्ञ को उत्तराधिकारी नियुक्त किया. 23 जून 1997 को गंगाशहर बीकानेर में उन्होंने शरीर त्याग दिया.

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