Biography Of Chand Bardai in hindi | चंदबरदाई का जीवन परिचय

Biography Of Chand Bardai in hindi | चंदबरदाई का जीवन परिचय: पृथ्वीराजरासो के रचयिता चंदबरदाई चौहान शासक पृथ्वीराज तृतीय (1178-1192 ई) का दरबारी कवि था. पृथ्वीराज रासो में चौहान शासक पृथ्वीराज तृतीय एवं तत्कालीन राजनीतिक स्थिति का वर्णन हैं. पृथ्वीराजरासो हिंदी का प्रथम महाकाव्य माना जाता हैं. इसमें पहली बार राजपूतों की अग्निकुंड से उत्पत्ति का वर्णन हैं.

Biography Of Chand Bardai in hindiBiography Of Chand Bardai in hindi

चंदबरदाई ने अपने ग्रंथ में पृथ्वीराज तृतीय द्वारा कन्नौज के गहडवाल शासक जयचंद की कन्या संयोगिता का स्वयंवर के समय हरण करना बतलाया हैं. ऐसी किवदन्ती है कि पृथ्वीराज तृतीय को तराइन के द्वितीय युद्ध के बाद जब मुहम्मद गौरी गजनी ले गया तब चंदबरदाई भी गजनी के दरबार में चला गया.

वही उसने योजना बनाकर पृथ्वीराज के शब्दभेदी बाण से गौरी की हत्या करवा दी. और फिर पृथ्वीराज एवं चंदबरदाई ने एक दूसरे को कटार भौक्कर आत्महत्या कर दी.

चंदबरदाई की जीवनी (Chand Bardai Biography)

चंदबरदाई का जन्म लाहौर में हुआ था. वह राव जाति के क्षत्रिय थे. इन्होने अपना अधिकाँश जीवन पृथ्वीराज चौहान के साथ अजमेर और दिल्ली में बिताया था. ये पृथ्वीराज चौहान के परम मित्र, सलाहकार एवं राजकवि थे. यह युद्ध क्षेत्र में भी चौहान के साथ जाया करते थे.

पृथ्वीराजरासो ग्रथ की इन्होने पिंगल भाषा में रचना की, जो ब्रज से मिलती जुलती भाषा हैं. इस कारण इन्हें हिंदी भाषा व ब्रज का प्रथम कवि भी माना गया हैं. बरदाई ने अपने इस ग्रंथ में चौहान के युद्धों तथा उसकी प्रेमगाथा का सजीव चित्रण किया हैं. इस महाकाव्य में वीर रस तथा श्रृंगार रस का अनूठा मेल देखने को मिलता हैं. हालांकि चंदरबरदाई पृथ्वीराजरासो को पूरा नहीं लिख पाई थे.

गजनी में उसके साथ घटित घटनाक्रम को किसी अज्ञात कवि द्वारा उतारा गया हैं. फिर भी यह हिंदी की प्रथम प्रमाणिक रचना मानी जाती हैं, जो काव्य का महासागर हैं इसमें दस हजार से अधिक छंद तथा स्थानीय छः भाषाओं का प्रयोग किया गया हैं. भारत के तत्कालीन शासक समाज की व्यवस्थाओं एवं परम्पराओं का उल्लेख भी इसमें मिलता हैं.

आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने हिंदी साहित्य के इतिहास में इन्हें पहले हिंदी महाकवि की उपाधि दी हैं. ये भारत के अंतिम हिन्दू सम्राट पृथ्वीराज चौहान के दरबारी थे. बताया जाता है कि चंदबरदाई और चौहान का जन्म दिन व मरण दिन एक ही था. षड्भाषा, व्याकरण, काव्य, साहित्य, छंद शास्त्र, ज्योतिष, पुराण, नाटक आदि में अद्भुत ज्ञान रखने वाले चंदबरदाई जालंधरी देवी को अपनी इष्ट देव मानते थे.

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