बौद्ध संघ पर निबंध | Buddha Dharma Sangha Essay In Hindi

बौद्ध संघ पर निबंध | Buddha Dharma Sangha Essay In Hindi: महात्मा बुद्ध के उपदेशों से प्रभावित होकर उनके अनुयायियों की संख्या बढ़ती चली गई, धीरे धीरे उनके शिष्यों का दल तैयार हो गया. उन्होंने अपने शिष्यों के लिए बौद्ध संघ की स्थापना की. संघ ऐसे बौद्ध भिक्षुओं की एक संस्था थी, जो धम्म के शिक्षक बन गये.

Buddha Dharma Sangha Essay In Hindi

बौद्ध संघ पर निबंध Buddha Dharma Sangha Essay In Hindi

बौद्ध संघ (बुद्ध के अनुयायी)

ये बौद्ध भिक्षु एक सादा जीवन व्यतीत करते थे. उनके जीवनयापन के लिए अत्यावश्यक वस्तुओं के अलावा कुछ नहीं होता था. वे दिन में एक बार भोजन करते थे. इसके लिए वे उपासकों से भोजन दान प्राप्त करने के लिए एक कटोरा रखते थे, चूँकि वे दान पर निर्भर थे, इसलिए इन्हें भिक्षु कहा जाता था.

महिलाओं को संघ में सम्मिलित करना– प्रारम्भ में केवल पुरुष ही संघ में सम्मिलित हो सकते थे, परन्तु बाद में महिलाओं को भी संघ में सम्मिलित होने की अनुमति दे दी गई. बौद्ध ग्रंथों से ज्ञात होता हैं कि अपने प्रिय शिष्य के आनन्द के अनुरोध पर बुद्ध ने महिलाओं को संघ में सम्मिलित होने की अनुमति प्रदान कर दी.

बुद्ध की उपमाता महाप्रजापति गोतमी संघ में सम्मिलित होने वाली प्रथम भिक्षुणी थी, संघ में सम्मिलित होने वाली कई स्त्रियाँ धम्म की उपदेशिकाएं बन गई. कालांतर में वे थेरी बनीं, जिसका अर्थ हैं- ऐसी महिलाएं जिन्होंने निर्वाण प्राप्त कर लिया हो.

बुद्ध ने अनुयायियों का विभिन्न सामाजिक वर्गों से सम्बन्धित होना- बुद्ध के अनुयायी विभिन्न वर्गों से सम्बन्धित थे. इनमें राजा, धनवान, गृहपति और सामान्य जन कर्मकार, दास, शिल्पी सभी सम्मिलित थे. संघ में सम्मिलत होने वाले भिक्षुओं तथा भिक्षुणीओं को बराबर माना जाता था. क्योकि भिक्षु बनने पर उन्हें अपनी पुरानी पहचान त्याग देना पड़ता था.

संघ की संचालन पद्धति- संघ की संचालन पद्धति गणों और संघों की परम्परा पर आधारित थी. इसके अंतर्गत लोग वार्तालाप के द्वरा एकमत होने का प्रयास करते थे. एकमत न होने पर मतदान द्वारा निर्णय लिया जाता था.

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