बौद्ध धर्म का इतिहास | Buddhism History In Hindi

Buddhism History In Hindi बौद्ध धर्म के तीन आधार स्तम्भ है. बुद्ध (Buddhism के संस्थापक), धम्म (गौतम बुद्ध के उपदेश) और संघ (बौद्ध भिक्षु और भिक्षुणिओं का संगठन). जिस तरह महावीर स्वामी ने जैन धर्म की स्थापना की, उसी काल में भारत में एक नयें पंथ की शुरुआत हुई जो कालान्तर में बौद्ध धर्म अर्थात बुद्ध का धर्म कहलाया. इस आर्टिकल में हम गौतम बुद्ध का जीवन परिचय, उनकी शिक्षाएं धम्म, चार आर्य सत्य, उनके उपदेश, संघ, बौद्ध धर्मग्रंथ, त्रिपिटक, तथा महासंगीतियों का अध्ययन यहाँ करेगे. बौद्ध धर्म का इतिहास | Buddhism History In Hindi

बौद्ध धर्म का इतिहास | Buddhism History,buddha story

Buddhism History In Hindi- गौतम बुद्ध या सिद्दार्थ का जन्म ५६३ ई.पू में नेपाल की तराई में स्थित कपिलवस्तु के समीप लुम्बिनी ग्राम में शाक्य क्षत्रिय कुल में हुआ था. इनके पिता का नाम शुद्धोदन तथा माता का नाम महामाया था. शुद्धोदन कपिलवस्तु के गणतांत्रिक शाक्यों के प्रधान थे जबकि महामाया कोशल वंश की राजकुमारी थी.

गौतम बुद्ध का जीवन परिचय जीवनी बायोग्राफी (buddha story gautam buddha in hindi)

इनके जन्म के सातवें दिन ही इनकी माता महामाया की मृत्यु हो जाती है, अतः इनका पालन पोषण इनकी मौसी प्रजापति गौतमी ने किया था, इनके बचपन का नाम सिद्धार्थ था. बचपन से ही गौतम का ध्यान आध्यात्मिक चिन्तन की ओर था. १६ वर्ष की आयु में इनका विवाह यशोधरा नामक राजकुमारी से हुआ. २८ वर्ष की आयु में इनके पुत्र राहुल का जन्म हुआ.

२९ वर्ष की आयु में इन्होने सत्य की खोज के लिए गृह त्याग कर दिया., जिसे बौद्ध धर्म के ग्रंथों में महाभिनिष्क्रमण कहा गया है. बुद्ध ने जीवन से सम्बन्धित चार द्रश्यों से प्रभावित होकर घर का त्याग किया था. वृद्ध व्यक्ति को देखना, रोगी को देखना, मृतक को देखना एवं सन्यासी को देखना.

बुद्ध के गृह त्याग का प्रतीक घोड़ा माना जाता है. इनके घोड़े का नाम कन्थक एवं सारथी का नाम चन्ना था. बुद्ध ने लगातार भ्रमण कर चालीस वर्ष तक उपदेश दिए. उन्होंने सर्वाधिक उपदेश कोशल प्रदेश की राजधानी श्रावस्ती में दिए. बुद्ध ने अपने उपदेश जनसाधारण की भाषा पालि में दिए.

सत्य की खोज में भटकते गौतम बुद्ध ने सर्वप्रथम अलारा कलामा और फिर रुद्र्क रामपुत्र को अपना गुरू मानकार तप किया. 35 वर्ष की आयु में गया (बिहार) में उरुवेला नामक स्थान पर पीपल वट वृक्ष के नीचे वैशाख पूर्णिमा की रात्रि में समाधिस्थ अवस्था में इनको ज्ञान प्राप्त हुआ. ज्ञान प्राप्ति के बाद सिद्धार्थ बुद्ध अर्थात प्रज्ञावान कहलाने लगे. वह स्थान बोधगया कहलाया, बुद्ध ने अपना प्रथम उपदेश वाराणसी के समीप सारनाथ में दिया. यहाँ गौतम बुद्ध ने अपनी पांच साथियों को बौद्ध धर्म में दीक्षित किया, इन्हें बौद्ध धर्म के इतिहास में धर्मचक्रप्रवर्तन कहा गया है.

४८३ ई.पू. में ८० वर्ष की आयु में बुद्ध ने अपना शरीर कुशीनगर में त्याग दिया, जिसे महापरिनिर्वाण कहा गया है. इस स्थान की पहचान पूर्वी उत्तरप्रदेश के देवरिया जिले के कसिया नामक गाँव से की जाती है. बुद्ध की मृत्यु के पश्चात उनके अवशेषों को आठ भागों में बांटकर आठ स्तूपों का निर्माण किया गया. गौतम बुद्ध को तथागत एवं शाक्य मुनि भी कहा जाता है. बौद्धों का सबसे पवित्र त्योहार बुद्ध पूर्णिमा है, जो वैशाख पूर्णिमा को मनाया जाता है. बौद्ध धर्म में बुद्ध पूर्णिमा के दिन का इसलिए भी महत्व है क्योंकि इसी दिन बुद्ध का जन्म ज्ञान की प्राप्ति एवं महानिर्वाण प्राप्त हुआ था.

धम्म का अर्थ (what is dhamma)

बौद्ध धर्म में धम्म का अर्थ है- बुद्ध की शिक्षाएं. बुद्ध का सार चार आर्य सत्यों में निहित है.

चार आर्य सत्य क्या हैं (what are the four noble truths of buddhism)

बुद्ध के अनुसार जीवन में दुःख ही दुःख है, अतः क्षणिक सुखों को सुख मानना अदूरदर्शीता है. बुद्ध के अनुसार दुःख का कारण तृष्णा है. इन्द्रियों को जो वस्तुएं प्रिय लगती है उनको प्राप्ति की इच्छा ही तृष्णा है और तृष्णा का कारण अज्ञान है. बुद्ध के अनुसार दुखों से मुक्त होने के लिए उसके कारण का निवारण आवश्यक है. अतः तृष्णा पर विजय प्राप्त करने से दुखों से मुक्ति प्राप्त की जा सकती है. बुद्ध के अनुसार दुखों से मुक्त होने अर्थात निर्वाण प्राप्त करने के लिए जो मार्ग है, उसे अष्टांगिक मार्ग कहा जाता है. Buddhism History

बुद्ध का आष्टांगिक मार्ग (buddhism four noble truths and eightfold path)

  • सम्यक दृष्टि- सत्य और असत्य को पहचानने की शक्ति
  • सम्यक संकल्प- इच्छा व हिंसा रहित संकल्प
  • सम्यक वाणी- सत्य एवं म्रदु वाणी
  • सम्यक कर्म- सत्कर्म, दान, दया, सदाचार, अहिंसा आदि
  • सम्यक आजीव- जीवनयापन का सदाचारपूर्ण एवं उचित मार्ग
  • सम्यक व्यायाम- विवेकपूर्ण प्रयत्न
  • सम्यक स्मृति- अपने कर्मों के प्रति विवेकपूर्ण ढंग से सहज रहना
  • सम्यक समाधि- चित्त की एकाग्रता

निर्वाण बौद्ध धर्म का परम लक्ष्य है जिसका अर्थ है दीपक का बुझ जाना, अर्थात जीवन मरण के चक्र से मुक्त हो जाना.

बुद्ध के उपदेश व उनका सार हिंदी भाषा में (teachings of gautam buddha in hindi pdf)

gautam buddha quotes in hindi pdf download-बुद्ध ने अपने उपदेशों में कर्म के सिद्धांत पर बहुत बल दिया है. वर्तमान के निर्णय भूतकाल में निर्णय करते है. बुद्ध ने प्रत्येक व्यक्ति को अपने भाग्य का निर्माता माना है. उनका कहना था कि अपने पूर्व कर्मों का फल भोगने के लिए मानव को बार बार जन्म लेना पड़ता है. बुद्ध ने ईश्वर के अस्तित्व को न ही स्वीकार किया है न ही नकारा है.

बुद्ध ने वेदों की प्रमाणिकता को स्पष्ट रूप से नकारा है. बुद्ध समाज में उंच नीच के कट्टर विरोधी थे. बौद्ध धर्म विशेष रूप से निम्न वर्णों का समर्थन पा सका, क्योंकि वर्ण व्यवस्था की निंदा की गई है. Buddhism History

बौद्ध धर्म में संघ के नियम (buddhism rules)

बुद्ध के अनुयायी दो भागों में विभाजित हुए. भिक्षुक- बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए सन्यास ग्रहण किया उन्हें भिक्षुक कहा गया है. उपासक- गृहस्थ जीवन व्यतीत करते हुए बौद्ध धर्म को अपनाने वालों को उपासक कहा गया.

भिक्षु भिक्षुणियों को संघ या परिषद के रूप में संगठित किया गया. संघ की सदस्यता १५ वर्ष से अधिक आयु वाले ऐसे व्यक्तियों के लिए खुली थी, जो कुष्ठ रोग, क्षय तथा अन्य संक्रामक रोगों से मुक्त थे. इसके लिए कोई जातीय प्रतिबन्ध नही था. संघ का संचालन पूर्णतया लोकतांत्रिक सिद्धांतों पर होता था. और उसे अपने सदस्यों पर अनुशासन लागू करने का अधिकार प्राप्त था.

बौद्ध धर्मग्रंथ (buddhist books pdf free download)

आरम्भिक बौद्ध ग्रन्थ पालि भाषा में लिखे गये थे. पालि शब्द का अर्थ पाठ या पवित्र पाठ है. भाषा के रूप में पालि प्राचीन प्राकृत है तथा बुद्ध के समय में यह मगध तथा समीपवर्ती प्रदेशों में बोलचाल की भाषा थी. स्वयं बुद्ध भी पालि भाषा में ही उपदेश देते थे. बौद्ध ग्रंथों में त्रिपिटक सर्वाधिक महत्वपूर्ण है.

बौद्ध साहित्य त्रिपिटक (Tripiṭaka in hindi)

  • विनय पिटक- इसमें संघ सम्बन्धी नियमों, दैनिक आचार विचार व विधि निषेधों का संग्रह है.
  • सुतपिटक- इसमें बौद्ध धर्म के सिद्धांत व उपदेशों का संग्रह है. सुत पिटक पांच निकायों में विभाजित है. दीर्घनिकाय, मजिझ्म निकाय, अंगुतरनिकाय, संयुक्त निकाय एवं खुदद्क निकाय.
  • खुदद्क निकाय बौद्ध धर्म दर्शन से सम्बन्धित १५ ग्रंथों का संकलन है, जिसमें धम्मपद, थेरीगाथा एवं जातक सर्वाधिक महत्वपूर्ण है. बौद्ध धर्म में धम्मपद का वही स्थान है जो हिन्दू धर्म में गीता का है. जातक में बुद्ध पद प्राप्त होने से पूर्व जन्मों से सम्बन्धित लगभग ५५० कथाओं का संकलन हैं.
  • अभिधम्म पिटक- यह पिटक प्रश्नोत्तर क्रम में है इसमें बुद्ध की शिक्षाओं का दार्शनिक विवेचन एवं आध्यात्मिक विचारों को समाविष्ट किया गया है.

बौद्ध संगतियां , स्थान , अध्यक्ष व शासनकाल (Description of Buddhist Councils in Hindi)

प्रथम बौद्ध संगीति ४८३ ई.पू को सप्तपर्ण गुफा राजगृह बिहार में हुई उस समय शासक अजात शत्रु तथा संगीति अध्यक्ष महक्सस्प थे. द्वितीय बौद्ध संगीति ३८३ ईपू में चुल्ल्बाग वैशाली बिहार में कालाशोक शासक थे साब्कमीर अध्यक्ष रहे. तृतीय बौद्ध संगीति का आयोजन २५० ईपू में मगध की राजधानी पाटलीपुत्र में हुआ उस समय मौर्य वंश के अशोक शासक थे तथा अध्यक्ष मोग्ग्लिपुत तिस्स इस संगीति के अध्यक्ष थे. चतुर्थ बौद्ध संगीति ७२ ईपू में कुंडलवन में कनिष्क के शासनकाल में वसुमित्र इसके अध्यक्ष थे. Buddhism History

चतुर्थ बौद्ध संगीति के बाद बौद्ध धर्म के दो भाग महायान और हीनयान में विभाजित हो गया. महायान को मानने वाले बुद्ध की मूर्ति पूजा में विश्वास करते है. महायान भारत के अलावा चीन जापान कोरिया अफगानिस्तान तुर्की तथा दक्षिणी पूर्वी एशियाई देशों में प्रचलित हुआ, जबकि हीनयान मगध और श्रीलंका में ही प्रचलित हो पाया. महायान और हीनयान के अतिरिक्त एक और भाग आठवी शताब्दी में प्रचलन में आया, जिसका नाम वज्रयान. यह बिहार और बंगाल में काफी प्रचलित हुआ. भारत में प्रथम मूर्ति जिसकी पूजा की गई संभवतः गौतम बुद्ध की ही थी. बंगाल के शैव शासक शशांक ने बोधिवृक्ष को कटवा दिया था. कनिष्क, हर्षवर्धन महायान शाखा के पोषक राजा थे.


तो मित्रों ये था संक्षिप्त में बौद्ध धर्म का इतिहास. हमने विभिन्न तथ्यों तथा जानकारियों को लिखते समय पूर्ण सावधानी बरतने की कोशिश की है फिर भी कोई त्रुटी हो तो कमेंट कर जरुर बताए. Buddhism History In Hindi में दी गई बौद्ध धर्म के इतिहास की जानकारी आपकों अच्छी लगी हो तो इस लेख को अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करे.


Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *