भारत में संयुक्त परिवार विघटन के कारण – Causes of Disintegration of Joint Family System In Hindi

भारत में संयुक्त परिवार विघटन के कारण – Causes of Disintegration of Joint Family System In Hindi: प्राचीन भारतीय हिन्दू संयुक्त परिवार प्रणाली टूट रही हैं. तेजी Joint Family System के विघटन के कारण प्रभाव और दुष्परिणाम क्या होते हैं. इन विषयों पर आज का हमारा यह लेख [Disintegration of Joint Family System] पर दिया गया हैं. जिन्हें पढ़ने के बाद आप घटते संयुक्त परिवारों के प्रमुख कारणों को समझ सकते हैं.

Causes of Disintegration of Joint Family System In Hindi

Causes of Disintegration of Joint Family System In Hindi

भारत में संयुक्त परिवार विघटन के कारण Discuss The Factors That are responsible for the Disintegration of joint Family In india. or हिन्दू संयुक्त परिवार व्यवस्था में परिवर्तन लाने वाले प्रमुख उत्तरदायी कारकों की विवेचना कीजिए. Discuss The Mejor factors responsible for the changes in hindu joint family system in india in hindi.

संयुक्त परिवार के विघटित होने के या परिवर्तन के लिए अनेक कारक उत्तरदायी हैं जिनमें से कुछ निम्नलिखित हैं.

औद्योगिकीकरण– अंग्रेजों के समय भारत में औद्योगिक क्रांति का सूत्रपात हुआ, जिसके फलस्वरूप ग्रामीण उद्योगों पर बुरा प्रभाव पड़ा. गाँवों के लोग शहरों में उद्योगों में रोजगार प्राप्त करने के उद्देश्य से आने लगे और संयुक्त परिवार प्रथा टूटने लगी. इधर नगरों में बाहर से आने वाले लोगों की संख्या अधिक हो गई जिससे वहां मकानों की कमी आई तथा संयुक्त परिवार प्रथा विघटित हुई.

कृषि में यंत्रीकरण के कारण कृषि में लगे अन्य सदस्य बेकार हो गये और वे उद्योगों में रोजगार तलाश करने के लिए नगरों की ओर आकर्षित हुए जिससे संयुक्त परिवार प्रथा में ढिलाई आई. औद्योगिकीकरण ने रोजगार के अवसरों में वृद्धि की, जिससे भी संयुक्त परिवार विघटित होने लगे.

नगरीकरण- 18 वीं शताब्दी के बाद बड़ी तीव्र गति से औद्योगीकरण ने नगरों और महानगरों को जन्म दिया. नगरीकरण के कारण शहरों में जनसंख्या तीव्र गति से बढ़ रही हैं, जिससे आवास की समस्या उत्पन्न हुई और संयुक्त परिवार प्रथा का बने रहना कठिन हो गया. परिणामस्वरूप संयुक्त परिवार विघटित होने लगे. इसके अलावा ग्रामीण लोग रोजगार की तलाश में अपने परिवार को छोड़कर यहाँ आते हैं और शहरों में अच्छा रोजगार मिल जाने के कारण वे यही बस जाते हैं. और अपने बच्चों तथा पत्नी के साथ छोटे छोटे परिवारों में रहने लगते हैं.

शहरी क्षेत्र में निवास करने वाले व्यक्ति का जीवन गतिशील रहता है और वह अधिकतर परिवार से दूर रहने के कारण स्वतंत्र रहना अधिक पसंद करता हैं. स्त्रियाँ भी स्वतंत्रता प्रिय हो जाती हैं और एकाकी परिवार में रहना पसंद करती हैं अतः स्पष्ट हैं कि नगरीकरण भी संयुक्त परिवार प्रथा के विघटन के लिए उत्तरदायी हैं.

कानूनों का प्रभाव– संयुक्त प्रथा के विघटन के लिए अनेक कानून भी उत्तरदायी कारक हैं, पहले संयुक्त परिवार के किसी भी सदस्य को अलग से सम्पति रखने का अधिकार प्रदान नहीं किया गया था, परन्तु हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम 1929 के अंतर्गत उन व्यक्तियों को सम्पत्ति के उत्तराधिकार का अधिकार दिया गया हैं, जो संयुक्त परिवार से अलग रहना चाहता हैं.

बुद्धिलब्धि अधिनियम के अंतर्गत व्यक्ति की स्वयं द्वारा कमाई गई सम्पति की सीमा में वृद्धि की गई. सम्पति में अधिकार अधिनियम 1939 के अंतर्गत हिन्दू स्त्रियों को भी परिवार में सम्पति अधिकार प्रदान कर दिया गया हैं जिससे परिवार को सम्पति व परिवार दोनों का विभाजन होने लगा.

विशेष विवाह अधिनियम 1954 ने भी संयुक्त परिवार प्रथा के विघटन में महत्वपूर्ण योगदान दिया हैं. हिन्दू विवाह विच्छेद अधिनियम 1955 ने भी संयुक्त परिवार प्रथा पर कुठाराघात किया हैं. हिन्दू उतराधिकार अधिनियम 1955 के अंतर्गत पुत्रियों व स्त्रियों को भी परिवार की सम्पति में उतराधिकारी बना दिया गया हैं. ये सभी कानून संयुक्त परिवार के विघटन में सहायक बने.

पाश्चात्य शिक्षा एवं संस्कृति का प्रभाव– भारत में अंग्रेजों के आगमन से भारतवासियों पर वहां की शिक्षा एवं संस्कृति का प्रभाव पड़ा, जिससे भारतीयों के दृष्टिकोण बदले और भारतीयों ने पाश्चात्य शिक्षा एवं संस्कृति के सामाजिक मूल्यों को अपनाना आरंभ कर दिया, इसके अलावा पाश्चात्य साहित्य में वर्णित समानता तथा लोकतंत्र के विचारों का भी भारतीयों पर काफी प्रभाव पड़ा और संयुक्त परिवार प्रथा का विघटन शुरू हो गया.

महिला आंदोलनों का प्रभाव– स्त्रियों में शिक्षा के प्रसार एवं आर्थिक आत्मनिर्भरता के कारण उनमें जागृति आई हैं. वे अब संयुक्त परिवार के शोषण से मुक्ति का प्रयास करने लगी हैं. तथा एकांकी परिवारों की पक्षधर बनी हैं. स्त्रियों की इस नवीन प्रवृति ने एक आंदोलन का रूप धारण कर लिया हैं. इस प्रवृति के कारण संयुक्त परिवार विघटित हुए हैं.

पारिवारिक झगड़े– संयुक्त परिवार में अनेक सदस्य साथ साथ रहते हैं. उनमें परस्पर झगड़े होते रहते हैं. भाइयों में सम्पति को लेकर तथा स्त्रियों में अनेक छोटी छोटी बातों पर मन मुटाव कहा सुनी तथा झगड़े होते रहते हैं. संयुक्त परिवार के ऐसे आये दिन होने वाले झगड़ों से बचने का एक ही समाधान हैं एकाकी परिवार. फलतः पारिवारिक झगड़ों से बचने के लिए लोग अलग घर बसाकर रहना पसंद करते हैं.

नवीन सामाजिक सुरक्षाएं– पहले केवल संयुक्त परिवार ही सगे सम्बन्धियों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करता था, लेकिन वर्तमान में राजकीय एवं केंद्रीय संस्थाएं, इंश्योरेंस कम्पनियों तथा भिन्न भिन्न संस्थाओं ने आज मानव को अनेक सुविधाएं एवं सुरक्षा प्रदान की हैं. इसका अप्रत्यक्ष प्रभाव संयुक्त परिवारों पर पड़ा हैं. उनका संयुक्त परिवार में विश्वास कम होता जा रहा हैं.

यातायात एवं संचार के साधनों में उन्नति– वर्तमान में देश में यातायात के साधनों की उन्नति हो जाने से व्यक्ति का एक स्थान से दूसरे स्थान पर आना जाना सुगम हो गया और व्यापार वाणिज्य तथा उद्योग धंधों तेजी से पनपने लगे. अब उद्योग, व्यापार व वाणिज्य के लिए देश के एक कोने से दूसरे कोने तक जाना सम्भव हो गया हैं.

इसी कारण सभी अलग अलग स्थानों में बसने लगे तथा उनके सम्बन्ध पत्रों एवं मनी आर्डर तक ही सीमित हो गये हैं. इससे संयुक्त परिवार विभाजित होकर नाभिक परिवारों में परिवर्तित हो रहे हैं.

परिवार के कार्यों का हस्तांतरण- वर्तमान समय में संयुक्त परिवार के कार्यों को अन्य संघों एवं संस्थाओं ने ग्रहण कर लिया हैं अतः उनकी उपयोगिता घट गई. शिक्षा का कार्य शिक्षण संस्थाओं द्वारा किया जाता हैं. संयुक्त परिवार में मनोरंजन का कार्य का स्थान मनोरंजन संस्थाओं, क्लबों एवं सिनेमाघरों ने ले लिया हैं.

कपड़े धोने का कार्य लान्ड्रियों द्वारा, अनाज कूटने पीसने का कार्य फ्लोर मीलों द्वारा होने लगा हैं. सिलाई के कार्य टेलरिंग हाउस द्वारा होने लगे हैं जिसका परिवार प्रथा पर गहरा प्रभाव पड़ा हैं. क्योंकि आधुनिक युग में प्रत्येक कार्य मशीनों से होने लगा हैं अतः संयुक्त परिवार में व्यक्ति का महत्व घटा हैं.

परिवर्तित मनोवृत्तियाँ– संयुक्त परिवार के सदस्यों में परस्पर प्रेम एवं सहयोग की भावना विद्यमान थी. परन्तु आज लोगों में स्वार्थ भावना में वृद्धि हुई हैं. अतः आज लोग केवल अपने परिवार के सदस्यों के सम्बन्ध में ही सोचते हैं. परिवार के अन्य सदस्य के सम्बन्ध में अब लोग जरा भी नहीं सोचते.

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