संयुक्त परिवार की विशेषताएं – characteristics of joint family in hindi

संयुक्त परिवार की विशेषताएं characteristics of joint family in hindi: आज के आर्टिकल में हम हिन्दू संयुक्त परिवार की प्रमुख विशेषताओं के बारें में जानेगे. features of joint hindu family business में क्लास 1,2,3,4,5,6,7,8,9,10 के परिवार उनके प्रकार अर्थ परिभाषा यहाँ जानेगे.

संयुक्त परिवार की विशेषताएं – characteristics of joint family in hindi

संयुक्त परिवार की विशेषताएं - characteristics of joint family in hindi

Describe The Characteristics Of Joint Family & Examine The Main Characteristics Of Joint Family [संयुक्त परिवार की विशेषताएं व लक्षण विवेचना वर्णन निबंध]

भिन्न भिन्न समाजशास्त्रियों की अवधारणा से यह ज्ञात होता हैं कि संयुक्त परिवार के प्रमुख लक्षण विशेषताएं निम्नलिखित हैं.

characteristics of joint family

सामान्य निवास स्थान- इरावती कर्वे, ब्लंट, जौली आदि अनेक विद्वानों ने संयुक्त परिवार के लिए सामान्य निवास प्रमुख लक्षण बताया हैं. जिसके अनुसार संयुक्त परिवार में सभी सदस्य एक ही सामान्य निवास पर रहते हैं. लेकिन ए डी रोस और आई पी देसाई का कहना है कि परम्परागत संयुक्त परिवार के सभी सदस्य यदपि एक स्थान पर साथ साथ रहते हैं, तथापि कुछ अन्य प्रकार के संयुक्त परिवारों के लिए सामाजिक सम्बन्धों की संयुक्तता तो आवश्यक है, लेकिन एक स्थान पर साथ साथ रहना आवश्यक नहीं हैं.

सामान्य रसोईघर– संयुक्त परिवार के निर्माण हेतु सामान्य रसोईघर का होना भी आवश्यक हैं. संयुक्त परिवार के सभी सदस्य एक ही रसोईघर में बना हुआ भोजन करते हैं. संयुक्त परिवार में सभी सदस्य एक साथ या एक ही रसोई में बना खाना खाते हैं. आई पी देसाई का मत है कि परम्परागत संयुक्त परिवार के लिए सामान्य रसोईघर का होना अत्यावश्यक विशेषता हैं, लेकिन अन्य प्रकार के संयुक्त परिवारों के लिए सामान्य रसोईघर के लक्षण का होना आवश्यक नहीं हैं.

सामान्य कोष– संयुक्त परिवार में एक सामान्य कोष का निर्माण किया जाता है. परिवार के समस्त सदस्यों की आय इसी सामान्य कोष में जमा हो जाती हैं. तथा इसी में से सम्पूर्ण परिवार का व्यय चलता हैं. इसमें व्ययआय पर आधारित न होकर आवश्यकता पर आधारित होता हैं.

परिवार के सभी सदस्य पुरुष चाहे वे कमाते हों या नहीं, स्त्रियाँ विवाहित, अविवाहिता, विधवा इत्यादि तथा बच्चे, परिवार में उपलब्ध सभी प्रकार की सुख सुविधाओं के उपभोग करने के समान अधिकारी होते हैं. प्रत्येक व्यक्ति को उसकी आय के अनुसार न मिल करके उसकी आवश्यकताओं के अनुसार ही मिलता हैं. संयुक्त परिवार में सम्पति परिवार की होती हैं, न कि व्यक्ति की.

सामान्य पूजा तथा धर्म कर्म- नवरात्रि, श्राद्धपक्ष, जन्म संस्कार, विवाह संस्कार, मृत्यु संस्कार, प्रमुख त्योहारों आदि अनेक पर्वो उत्सवों में परम्परागत संयुक्त परिवार के सभी सदस्य साथ साथ भाग लेते हैं. परिवार के अनेक सदस्य शिक्षा, नौकरी, व्यापार आदि के कारण मूल निवास से बाहर रहते हैं. ऐसे अवसरों पर आने का पूरा प्रयास करते हैं तथा सम्मिलित होते हैं. इस प्रकार सामान्य पूजा पाठ,धार्मिक अनुष्ठान आदि संयुक्त परिवार की विशिष्ट विशेषता हैं.

रक्त विवाह या गोद सम्बन्धी सदस्य– संयुक्त परिवार व्यक्तियों का एक ऐसा समूह हैं जिसके सदस्य परस्पर विशिष्ट रक्त, विवाह अथवा गोद से सम्बन्धित होते हैं. परिवार के सभी सदस्य परस्पर रक्त सम्बन्धी होते हैं, किन्तु पत्नियाँ विवाह सम्बन्धी होती हैं. मातर सत्तात्मक परिवारों के सम्बन्धों की गणना प्रायः मातर-पितृ पक्ष से की जाती हैं तथा पितृसत्तात्मक परिवारो के सम्बन्धों की गणना पितृ पक्ष से की जाती हैं. परम्परागत संयुक्त परिवार में तीन या तीन पीढ़ी से अधिक पीढ़ी के सदस्य साथ साथ रहते हैं.

सहयोगी व्यवस्था- कर्वे, ए आर देसाई आदि के मतानुसार संयुक्त परिवार पारस्परिक सहयोग पर आधारित हैं. सहयोग के अभाव में संयुक्त परिवार का अधिक समय तक संयुक्त बना रहना सम्भव नहीं हैं. संयुक्त परिवार में एक सबके लिए और सब एक के लिए वाला सिद्धांत लागू होता हैं.

सामान्य संस्कृति- संयुक्त परिवार की एक अन्य विशेषता यह हैं कि इसके सभी सदस्य सामान्य जनरीतियों, रूढ़ियों, प्रथाओं एवं परम्पराओं को स्वीकार कर उनका पालन करते हैं. एक सामान्य संस्कृति का विश्वास ही परिवार में प्रेम एवं सहयोग की भावनाएं विद्यमान रख पाता हैं.

बड़ा आकार- संयुक्त परिवार में तीन या चार पीढियों के सदस्य एक साथ रहते हैं. जैसे दादा, पिता, पुत्र, उनकी पत्नियाँ और अनेक नाते रिश्तेदार. यह परम्परागत संयुक्त परिवार कहलाता हैं. दूसरे प्रकार के संयुक्त परिवारों का आकार भी बड़ा होता हैं. इसमें एक पीढ़ी के कई विवाहित भाई अपनी पत्नी बच्चों सहित साथ साथ रहते हैं.

संयुक्त परिवार के लिए बड़े आकार से तात्पर्य मुख्यतः सदस्यों की संख्या से नहीं है, बल्कि एक से अधिक परिवारों का एक कुटुंब में रहने से हैं. सामान्य रूप से ऐसे परिवारों का आकार एकाकी परिवारों से प्रायः बड़ा ही होता हैं.

तुलनात्मक स्थायित्व– संयुक्त परिवारों में अन्य परिवारों की तुलना में स्थायित्व तत्व अधिक पाया जाता हैं. सभी सदस्य पारस्परिक कर्तव्यपरायणता के सूत्र में बंधे रहते हैं. सभी एक दुसरे के लिए कार्य करते रहते हैं. किसी सदस्य के मरने या अपंग या वृद्ध होने पर परिवार में विघटनकारी प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाती हैं.

सामान्य सामाजिक कार्य– कापड़िया के अनुसार संयुक्त परिवार में सभी सामाजिक कार्यों के लिए परिवार को एक व्यक्ति माना गया हैं. और उसका एक प्रतिनिधि ही सारे परिवार की ओर से भाग लेता हैं, जो परिवार का मुखिया होता हैं चाहे जाति पंचायत की सभा हो या किसी के यहाँ विवाह, मृत्यु भोज आदि में सम्मिलित होना हो.

अधिकार और दायित्व एवं पारस्परिक कर्तव्यपरायणता– रोस के अनुसार संयुक्त परिवार में परिवार के सदस्य कर्तव्य और अधिकार , सत्ता और भावना के प्रतिमान सम्बद्ध होते हैं. इसके अंतर्गत भाइयों, उनकी संतानों आदि से सम्बन्धित परस्पर अनेक कर्तव्य अधिकार और दायित्व भी आ जाते हैं. जो जन्म, मृत्यु, विवाह आदि अवसरों पर तथा अन्य सामान्य जीवन में देखे जा सकते हैं. संयुक्त परिवार के सभी सदस्यों में पारस्परिक कर्तव्यपरायणता भी पाई जाती हैं.

परिवार का मुखिया- परिवार का सबसे बुजुर्ग सदस्य मुखिया के रूप में कार्य करता हैं जिसे कर्ता कहा जाता हैं. परिवार के सभी सदस्यों में कर्ता की स्थिति सर्वोच्च होती हैं. परिवार के प्रत्येक महत्वपूर्ण निर्णय उसी के द्वारा लिए जाते हैं. सभी सदस्य उसकी आज्ञा का पालन करते हैं और वही अनुशासन और एकता बनाए रखता हैं.

निश्चित संस्तरण- संयुक्त परिवार के सदस्यों के अधिकारों और स्थितियों में भिन्नता एवं निश्चितता पाई जाती हैं. संयुक्त परिवार में कर्ता का सर्वोच्च स्थान होता हैं. कर्ता की पत्नी का दूसरा स्थान होता हैं. वह धार्मिक कार्यों का संचालन करती हैं. एवं घरेलू कार्यों को कराने के लिए परिवार की अन्य स्त्रियों को आदेश एवं निर्देश देती हैं. इस संस्तरण में तीसरा स्थान कर्ता के भाइयों का होता हैं चौथा स्थान कर्ता के सबसे बड़े पुत्र का होता हैं. उसके बाद छोटा पुत्र, पुत्रों की पत्नियों, पुत्रियों का स्थान होता हैं.

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