Chhoti Diwali : छोटी दिवाली 2017 नरक चतुर्दशी का महत्व, पूजा विधि

Chhoti Diwali नर्क चतुर्दशी या नरक चौदस जो दिवाली से एक दिन पहले मनाई जाती है. इस कारण इसे छोटी दिवाली/दीपावली कहा जाता है. अपने परिवार के आरोग्य तथा मृत्यु से मुक्ति पाने के लिए इसे मनाया जाता है. इस दिन तेल का एक दीपक जलाए जाने की प्रथा है. साथ ही नरक चौदश के दिन मृत्यु के देवता यमराज की पूजा की जाती है. वर्ष 2017 में यह 18 अक्टूबर को है. दीपावली के पंचदिवसीय उत्सव की शुरुआत कार्तिक के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी से होती है, जिन्हें धनतेरस भी कहा जाता है. इसके अगले दिन छोटी दिवाली अगले दिन मुख्य पर्व दीपावली व लक्ष्मी पूजन इस पर्व का तीसरा दिन होता है. इसके बाद गौवर्धन पूजा और भाई दूज का उत्सव आता है.

छोटी दिवाली 2017 नरक चतुर्दशी का महत्व, पूजा विधि

इसे रूप चौदस और रूप चतुर्दशी भी कहा जाता है. इसमे और दीपावली में पूजा का मुख्य अंतर होता है. चतुदर्शी को मृत्यु के देवता यानि यम की पूजा होती है. जबकि मुख्य दिवाली के दिन घी के दिए जलाकर माँ लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा आराधना की जाती है. इस दिन पूजा से पूर्व स्नान किया जाना जरुरी माना जाता है. हिन्दू पंचाग के अनुसार इस साल नरक चतुर्दशी पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 4.47 से 06.27 तक जिनमे पूजा करने की अवधि 100 मिनट की है.

नरक चतुर्दशी का महत्व

इस तिथि को रूप चतुर्दर्शी कहने के पीछे एक पौराणिक कथा मानी जाती है. एक समय हिरनाक्ष्यप ने कई वर्षो तक भगवान् की कठिन भक्ति की. लम्बी अवधि तक चलने वाली इस भक्ति के चलते उनका शरीर कीड़े मकोड़ो का घर बन गया तथा काया का कुरूप हो गया.

अपनी भक्ति के पश्चात वह ब्रामण देवता नारद जी के पास गये और अपनी कथा बताई. तब नारद जी ने उनकी समस्या के हल के लिये कार्तिक पूर्णिमा की चौदस के दिन जल्दी उठकर भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान करने को कहा. ऐसा करने से राजन फिर से अपनी सुंदर काया को पा सका. इस कारण इसे रूप चतुर्दशी कहा जाता है.

एक अन्य कथा के अनुसार भगवान श्री कृष्ण ने छोटी दिवाली के ही दिन नरकासुर नामक राक्षस का अंत किया था. तब से इसे नरक चतुर्दशी कहा जाता है. हिन्दू धर्म में बुरे कर्म करने वालों को मृत्यु के बाद नरक में जाने से जुड़ी दंतकथाएँ प्रचलित है. इसलिए इस दिन लोग यम के देवता की पूजा कर अपने परिवार के सदस्यों की इस यातना से रक्षा की गुहार लगाते है.

नरक चतुर्दशी पूजा विधि

नरक चतुर्दशी के दिन परिवार की सभी स्त्रियाँ एवं लड़किया सुबह जल्दी उठती है. प्रात जल्दी उठने के बाद सूर्यनमस्कार के साथ ही सूर्य देव को कलश से जल चढाया जाता है तथा बाद में जल में थोड़ा सा तेल मिलाकर स्नान किया जाता है. चौदस पूजा मुहूर्त के उपर्युक्त समयानुसार यम देव की मंत्रोच्चार के साथ विधिवत पूजा की जाती है. तथा शाम के समय तेल का दिया जलाकर घर के द्वार पर रखा जाता है.

नरक चतुर्दशी के दिन नरक की यातना से बचने के लिए उपाय के तौर पर स्नान करने से पूर्व शरीर के सभी अंगो पर तेल की मालिश की जाती है.

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