बाल अधिकार पर निबंध – Child Rights Essay In Hindi

बाल अधिकार पर निबंध – Child Rights Essay In Hindi: समाज में बच्चों के प्रति बढ़ते अपराध के चलते आज बाल अधिकारों की व्यवस्था करना समय की आवश्यकता बन चुकी हैं. भारत में बाल मजदूरी, बाल विवाह, कन्या भ्रूण हत्या बच्चों की तस्करी, शारीरिक दुर्व्यहार की समस्याओं के चलते चाइल्ड राइट्स की महत्वपूर्ण आवश्यकता हैं. आज का यह निबंध बच्चों के लिए Child Rights Essay के रूप में दिया गया हैं.

Child Rights Essay In Hindi [बाल अधिकार पर निबंध]

Child Rights Essay In Hindi

बाल अधिकार (Children’s rights) नाबालिग बच्चों की सुरक्षा तथा उनके बचाव के लिए निर्धारित किये गये मानवाधिकार हैं, 1989 के बाल अधिकार सम्मेलन में बालक शब्द को परिभाषित करते हुए कहा गया “कोई भी व्यक्ति जिसकी आयु १८ वर्ष से कम है, जब तक कि नियम में परिभाषित वयस्कता को पहले प्राप्त नहीं किया हो,बाल कहलाता हैं.”

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14 से 20 नवम्बर तक विश्व में अंतरराष्ट्रीय बाल अधिकार सप्ताह (आईसीआरडब्ल्यू) को बाल अधिकार की जागरूकता के लिए मनाया जाता हैं. हमारे देश भारत में भी हर वर्ष 20 नवम्बर को बाल अधिकार दिवस मनाते हैं. बाल अधिकारों के संरक्षण हेतु राष्ट्रीय आयोग (एन.सी.पी.सी.आर.)- आयोग का गठन भी किया गया हैं.

आयोग का यह कार्य हैं कि वह बनने वालो कानून, नीतियों तथा सरकारी व्यवस्था को देखे तथा उसका आंकलन करे कि वह बाल अधिकारों का उल्लंघन तो नहीं कर रहे हैं. दात ही वह संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा बनाएं युनिवर्सल चाइल्ड राइट्स के संगत भी हो.

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग

एनसीपीसीआर बाल अधिकार संरक्षण के लिए राष्ट्रीय आयोग द्वारा 0 से 18 वर्ष तक के बालक बालिकाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए कार्य करता हैं. आयोग सुनिश्चित करता हैं कि तत्कालीन व्यवस्था में 18 साल की आयु से कम नाबालिंक के अधिकारों का समुचित उपयोग हो.

बाल अधिकार क्या है?

1959 में बाल अधिकारों की घोषणा को 20 नवंबर 2007 में सार्वभौमिक रूप से स्वीकार किया गया. ये वे साधारण हक हकूक हैं जो प्रत्येक देश अपने नागरिकों के बेहतरी के लिए उन्हें प्रदान करता हैं. बालक मतदान के सिवाय उन सभी अधिकारों को पाने के हकदार हैं जो उसकी उम्रः के योग्य हो तथा एक वयस्क व्यक्ति को मिल रहे हैं.

बाल अधिकारों के तहत जीवन का अधिकार, पहचान, भोजन, पोषण और स्वास्थ्य, विकास, शिक्षा और मनोरंजन, नाम और राष्ट्रीयता, परिवार और पारिवारिक पर्यावरण, उपेक्षा से सुरक्षा, बदसलूकी, दुर्व्यवहार, बच्चों का गैर-कानूनी व्यापार इत्यादि को सम्मिलित किया जाता हैं.

मार्च 2007 में ही भारतीय संविधान में बाल अधिकारों के लिए एक संवैधानिक संस्था का गठन किया गया, जिन्हें बाल अधिकार संरक्षण आयोग कहा जाता हैं. हमारे समाज में बाल अधिकारों के प्रति जनजागरूकता के लिए संगठन, सरकारी विभाग, नागरिक समाज समूह, एनजीओ काम कर रहे हैं, साथ ही बाल अधिकार दिवस मनाने का उद्देश्य भी यही हैं.

बाल अधिकार बालकों को श्रम में लगाने तथा उनके साथ अमानवीय दुर्व्यवहार आदि का खंडन करता हैं. ये बालक को बेहतर बालपन, शिक्षा व विकास के सुलभ अधिकार प्रदान करता हैं. घरेलू हिंसा व बाल तस्करी की खिलाफत कर बच्चों को अच्छी शिक्षा, मनोरंजन, खुशी देने के प्रयत्न करता हैं.

बाल अधिकारों के उद्देश्य

  • 18 वर्ष से कम आयु के बालक के समुचित विकास तथा उसके बाधक तत्वों के सम्बन्ध में अनभिज्ञ अभिभावकों को अवगत कराना.
  • निम्न आर्थिक स्तर के बालक के लिए नई नीति तथा सुनहरे भविष्य के लिए राह आसान बनाना.
  • बालकों के प्रति बढ़ती हिंसा को समाप्त कर उन्हें सामाजिक व विधिक स्तर पर गैर कानूनी घोषित करना
  • विभिन्न देशों तथा राज्यों में बालकों की स्थिति के सम्बन्ध में शोध करना
  • बालकों के प्रति बढ़ते यौन अपराधों को रोकने के लिए जागरूकता फैलाना

बाल अधिकार की आवश्यकता

कई बार हम सोचते हैं बच्चों के लिए अलग से बाल अधिकारों के प्रावधान की क्या आवश्यकता हैं. क्या मानवाधिकार बालकों के लिए पर्याप्त नहीं हैं. मगर सच्चाई से हम सभी परिचित हैं आए दिन हमें 5,6 साल की बच्चियों के साथ रैप जैसे घिनौने अपराध की खबरे, 10 साल तक के बच्चों को होटलों की भट्टियों पर देखकर उन पर रहम आता हैं तो बाल अधिकार और संरक्षण आयोग भी इसीलिए बनाए गये हैं ताकि बालकों के बचपन को तबाह होने से रोका जाए.

हमारे देश में बाल मजदूरी, बाल तस्करी का धंधा बड़े स्तर पर चल रहा हैं. नोबेल शांति पुरस्कार पाने वाले कैलाश सत्यार्थी एक भारतीय बाल अधिकार कार्यकर्ता और बाल-श्रम के विरुद्ध दुनियाभर में काम करने वाले इंसान हैं. भारत से इन्होने 1980 में एक बाल आन्दोलन की नीव रखी थी, जिसका नाम बचपन बचाओं रखा गया. सत्यार्थी जी ने 144 से अधिक देशों में 83 हजार बाल श्रमिकों को बचपन लौटा चुके हैं.

बाल अधिकार कौन कौनसे है

  • प्रत्येक बालक को जीने का अधिकार हैं.
  • अभिभावकों को अपने बालक को अच्छा खिलाने व उसकी देखभाल का अधिकार देता हैं.
  • प्रत्येक बालक बालिका को अपने परिवार के साथ रहने का हक हैं.
  • उन्हें समस्त प्रकार की स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त करने का अधिकार हैं.
  • शिक्षा पाने का अधिकार
  • अपनी बात को रखने का अधिकार
  • अपनी पसंद व मांग को माता-पिता के समक्ष रखने का अधिकार
  • स्वतंत्र रूप से अपनी इच्छा के खेल तथा गतिविधियों में सम्मिलित होने का अधिकार
  • बच्चों को सभा करने या संगठन बनाने का अधिकार हैं.
  • वे अपने प्रति हो रहे आर्थिक, सामाजिक शोषण के विरुद्ध आवाज उठा सकते हैं शिकायत कर सकते हैं.
  • बालक को अपने निजी जीवन की बाते, व्यवहार आदि में बाहरी हस्तक्षेप से रक्षा का अधिकार हैं.
  • किसी आपदा के समय पहले मदद पाने का अधिकार तथा
  • अपने अधिकार व भलाई के लिए सुरक्षा का अधिकार बाल अधिकारों में आते हैं.

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