पके फलों का रंग लाल, पीला और जामुनी ही क्यों | colors of fruits and vegetables and what they mean In Hindi

colors of fruits and vegetables and what they mean In Hindi: फलों को बचाने तथा उनके पौधों के वंश को बढाने के लिए यह प्रकृति की व्यवस्था हैं. आपने कभी सोचा कि अधिकांश रसीले फल पकने के बाद लाल अथवा पीले या जामुनी रंग के क्यों होते हैं. दरअसल फलों को बचाने तथा उनके पौधों के वंश को बढ़ाने के लिए प्रकृति ने इतनी सुंदर व्यवस्था की हैं. प्रकृति ने अधिकांश कच्चे फलों को हरा रंग दिया है ताकि वे पकने के पूर्व हरी पत्तियों के बीच सुरक्षित छिपे रहे.पके फलों का रंग लाल, पीला और जामुनी ही क्यों | colors of fruits and vegetables and what they mean In Hindi

पके फलों का रंग लाल, पीला और जामुनी ही क्यों | colors of fruits and vegetables and what they mean In Hindi

रंग के अलावा कच्चे फल बेस्वाद और कड़क भी होते हैं. यह भी उन्हें फल भक्षियों की नजरों से बचाकर रखता हैं. तब फलों के अंदर भरे बीज बिखरने के लिए तैयार न हो जाए. तक तक प्रकृति उन्हें बचाकर रखती हैं. जब बीज तैयार हो जाते है, तब फलों का रंग आल, पीला या जामुनी हो जाता हैं.

यह इस बात का संकेत होता हैं कि अब इन फलों को भक्षी खा सकते हैं. सवाल यही है कि आखिर प्रकृति ने अधिकांश फलों को लाल या पीला या जामुनी रंग ही क्यों दिया. दरअसल ये वे तीन रंग है जो पक्षियों को सबसे अधिक आकर्षित करते हैं. इसलिए प्रकृति ने यह नियम बना दिया है कि पेड़ पर लगे इन लाल पीले और जामुनी फलों को देखकर भक्षी आए और अपनी भूख मिटाएं और बीजों को दूर दूर तक बिखराएं.

फलों के बीज पक्षियों की विष्ठा के साथ दूर दूर तक बिखरते रहते हैं. चूँकि पक्षियों के दांत नहीं होते हैं. ऐसे में फलों के बीज को चबाते नहीं हैं. और ऐसे ही पूरे के पूरे बिना किसी नुक्सान के साथ विष्ठा के साथ आ जाते हैं. कई बार फलों में जुलाब का गुण भी होता है, इनके भक्षण से पक्षियों को दस्त लग जाते हैं.

और बार बार विष्ठा करते रहते हैं. इससे बीजों का बिखराव बेहतर तरीके से और थोड़ा थोड़ा और दूर दूर तक होता हैं. इस तरह पक्षियों की भूख मिटती रहती हैं और पौधों का वंश भी फलता फूलता और फैलता रहता हैं. जो फल रसीले नहीं होते हैं, उनके बीजों का बिखरना भी तो जरुरी हैं. तो यह कैसे होता हैं. विलायती ईमली आपने कभी न कभी खाई होगी.

दरअसल इनके बीज ही फल का काम करते हैं. फलों के बजाय इनके बीजों पर विशिष्ट रंगीली मासल रचना होती है. जिसे एरील कहा जाता है. यह ईमली जब पकती है तब उसके फटने पर बीजों पर लगा हुआ छिलका बाहर झाँकने लगता हैं. शुरू में यह हल्के पीले रंग का होता हैं. और बाद में लाल हो जाता हैं. तोता मैना, कोयल इसे बड़े चाव से खाते हैं. और इस तरह उनके बीजों को बिखेरते रहते हैं.

कौन देता है फलों को रंग

फल के पकने की शुरुआत होते ही उसमें कई सिलसिलेवार रासायनिक और भौतिक परिवर्तन होने लगते हैं. सबसे पहले फल में जमा हरा पदार्थ धीरे धीरे नष्ट होने लगता है और उसकी जगह अन्य रंगीन पदार्थ बनने लगता है. इससे फलों की रंगत बदल जाती हैं.

जैसे कच्चे टमाटर का सफेद से हरा, पीला और फिर पीला नारंगी और अंत में सुर्ख लाल हो जाना ऐसे परिवर्तनों के कारण होता हैं. फलों के पकाने में एथिलीन की अहम भूमिका होती है. यह हार्मोन ही फलों को लाल पीला या जामुनी करने के लिए जिम्मेदार हैं. इन फलों के रंग बदलने के साथ ही उनके उनके नरम होने की प्रक्रिया भी शुरू हो जाती हैं.

फलों में उपस्थित पेक्टिन नामक पदार्थ के कारण ऐसा होता हैं. इसके फलस्वरूप कोशिकाएं आपस में मिल जाती हैं. और एक ठोस हर टमाटर लाल और रसीला होता हैं.

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