कोरोना ने बदला शिक्षा का प्रारूप। Corona changed the format of education। In Hindi

एक तरफ कोरोना जैसी वैश्विक महामारी से सब कुछ रुका सा गया है वहीँ इस दौर में पढ़ाई कर रहे छात्रों का भविष्य दाँव पर लग गया है क्योंकि ना स्कूलों का संचालन हो रहा है, ना ही कोई कोचिंग संस्थान चल रहे हैं और ना ही किसी विश्वविद्यालय में पढ़ाई हो रही है।

भारत के अधिकतर राज्यों में कोरोना महामारी के बढ़ते प्रकोप के कारण हुए लॉकडाउन से पहले परीक्षाएं आयोजित नहीं हो पाई थी जिसकी वजह से पढ़ाई कर रहे छात्र और उनके अभिभावक परेशान थे लेकिन राज्य सरकारों ने स्कूल में पढ़ रहे छात्रों को प्रथम से लेकर नौवीं कक्षा तक एवं ग्यारहवीं कक्षा के सभी छात्रों को पिछले परिणाम के आधार पर उत्तीर्ण कर अगली कक्षा में प्रवेश के लिए अग्रेषित करने का उचित एवं सराहनीय निर्णय लिया जिससे ना सिर्फ छात्र खुश थे अपितु अभिभावकों को भी बढ़ते संक्रमण में ख़ुशी मिली।

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इधर विश्वविद्यालयों में पढ़ाई कर रहे छात्रों का भविष्य भी इस महामारी की चपेट में आ गया। राजस्थान और पंजाब सरकार ने पहले ही अपने यहाँ पढ़ाई कर रहे छात्रों को पिछले परिणामों के आधार पर पास करने का निर्णय ले लिया था तो वहीं विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने भी अंतिम वर्ष के सभी छात्रों की परीक्षाएं सितम्बर अंत तक आयोजित करने का निर्णय लिया है। देखना दिलचस्प होगा कि कोरोना महामारी के बढ़ते प्रकोप के कारण सितम्बर तक परीक्षाएं आयोजित हो पाती हैं या नहीं ?

कोरोना महामारी का ही परिणाम है कि आज के दौर में सरकारी हो या प्राइवेट सभी शिक्षण संस्थानों ने ऑनलाइन पढ़ाई की एक मुहिम छेड़ दी है, जिसका असर शहरी इलाकों से लेकर ग्रामीण इलाकों तक दिख रहा है।

कोरोना महामारी से स्कूलों तथा महाविद्यालयों का संचालन बंद हो जाने से अभिभावकों को अपने बच्चों के भविष्य कि चिंता सता रही है। वहीँ आज के बदलते दौर में राज्य सरकारें भी छात्रों के भविष्य को लेकर चिंतित नजर आ रही हैं। अधिकतर राज्य अपने राज्य के स्कूली बच्चों के लिए दूरदर्शन पर कक्षाएं आयोजित कर रहे हैं। वहीँ कुछ केंद्रीय तथा प्राइवेट विश्वविद्यालयों ने भी अपने छात्रों के लिए तमाम रास्ते खोल दिए, जहाँ विषयवार ऑनलाइन क्लासेज आयोजित की जा रही हैं और विषयवार नोट्स भी मुहैया करवाया जा रहा है।

सभी प्राइवेट स्कूल तथा कुछ राज्यों के सरकारी स्कूल भी आज के बदलते दौर में एंड्राइड फोनों द्वारा ऑनलाइन क्लासेज आयोजित कर रहे हैं लेकिन सभी अभिवावकों के पास एंड्राइड फ़ोन की उपलब्धता ना होने के कारण सभी विद्यार्थियों को ऑनलाइन करवाई जा रही पढ़ाई का लाभ नहीं मिल पा रहा है। छोटे बच्चों को फ़ोन के माध्यम से पढ़ा पाना कठिन हो रहा है और इन बच्चों के लगातार मोबाइल फोन चलाने से अभिभावकों को बच्चों की आँखों के जल्दी ख़राब होने का डर सता रहा है। वहीँ बड़ी कक्षाओं के स्कूली छात्र ऑनलाइन क्लास कि आड़ में मोबाइल फ़ोन का दुरुपयोग सोशल नेटवर्किंग का प्रयोग कर, ऑनलाइन गेम खेल, मूवीज तथा विडिओ देख कर रहे हैं।

स्कूली छात्रों को पढ़ाने वाले कोचिंग संस्थान भी बदलते दौर में ढल तो गए हैं लेकिन जिन ग़लतियों को सुधारने के लिए बच्चे आज के कोचिंग युक्त युग में कोचिंग करने जाते हैं उन ग़लतियों पर नजर रख पाना कोचिंग संस्थानों के शिक्षकों को नामुमकिन हो गया है। जो बात विचार छात्र और शिक्षकों के बीच कोरोना महामारी से पहले कक्षाओं में आमने सामने हो जाया करती थी अब इस बदलते शिक्षा प्रारूप में संभव नहीं हो पा रही है। बदलते दौर में ना सिर्फ ई-लर्निंग को बढ़ावा मिला है बल्कि बहुत से लोग इस कोरोना महामारी में खुद का यूट्यूब चैनल बना कर लोगों तक अपना सर्वश्रेष्ठ ज्ञान बाँटने की कोशिश कर रहे हैं। अधिकतर छात्रों ने इस दौर में ई-लर्निंग को अपनाया तो है लेकिन यह कारगर साबित होता नहीं दिख रहा है क्योंकि छात्रों के मन में उठाने वाले संदेहात्मक प्रश्नों के उत्तर यहाँ नहीं मिल पा रहे हैं।

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कोरोना महामारी ने ना सिर्फ लोग के जीवन पर ही असर डाला है बल्कि इस महामारी की वजह से काम करने का प्रारूप भी बदल गया है। जहाँ पहले घरों से दूर गुरुकुल में रह कर छात्र शिक्षा ग्रहण करते थे फिर बदलते दौर ने छात्रों को प्रतिदिन घर से स्कूल तक सीमित कर दिया और अब कोरोना महामारी के कारण हालात ऐसे बन गए हैं जिससे छात्र स्कूल भी नहीं जा पा रहे घर से ही पठन पाठन का कार्य कर रहे हैं। देखना अब दिलचस्प होगा की कहीं इस ऑनलाइन पढ़ाई की वजह से आने वाली नयी पीढ़ियाँ विद्या के मंदिर का दर्शन भी कर पाती हैं या नहीं।

बृजेन्द्र राय
यांत्रिकी अभियंता / स्वतंत्र लेखक

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