Das Bhakti Shayari In Hindi देशभक्ति की शायरी दस भक्ति शायरी

Das Bhakti Shayari In Hindi देशभक्ति की शायरी दस भक्ति शायरी: नमस्कार दोस्तों आपका हार्दिक स्वागत करते हैं आज के लेख में हम दस भक्ति शायरी (DasBhakti Shayari) का छोटा सा कलेक्शन आपके साथ साझा कर रहे हैं. देश की शान को बढ़ाने वाली इन भक्ति शायरी को आप भी पढ़े तथा अपने दोस्तों के साथ जरुर शेयर करे.

Das Bhakti Shayari In Hindi देशभक्ति की शायरी दस भक्ति शायरी

Das Bhakti Shayari

उनके हौसले का मुकाबला ही नही है कोई
जिनकी कुर्बानी का कर्ज हम पर उधार है
आज हम इसीलिए खुशहाल हैं क्यूकि
सीमा पे जवान बलिदान को तैयार है….


मिटा दिया है वजूद उनका जो भी इनसे भिड़ा है,
देश की रक्षा का संकल्प लिए जो जवान सरहद पर खड़ा है।


Shayari On Das Bhakti

दे सलामी इस तिरगे को
जिस से तेरी शान हैं,
झंडा हमेशा ऊचा रखना
जब तक शरीर में प्राण हैं


देश को आजादी के नए अफसानो की जरूरत है
भगत-आजाद जैसे आजादी के दीवानो की जरूरत है……..
वतन को फिर देशभक्त परवानो की जरूरत है


Desh Bhakti Lines Shayari In Hindi

गगा, यमुना, यहा नर्मदा
मदिर, मस्जिद के सग गिरजा,
शाति प्रेम की देता शिक्षा,
मेरा भारत सदा सर्वदा.


अपने वतनकी हिफाजत करूगा
ये वतन मेरी जान है
इसकी हिफाजत की खातिर
हर भारतवासी का दिल और जान कुर्बान है


hindi poem das bhakti

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अकबर तो था आक्रमणकारी, उसे महान मत बताओ
राणा प्रताप के गीत गाओ
प्रताप के स्वाभिमान को मत भूल जाओ
अकबर को महान बताना मक्कारी है, गद्दारी है.
अपना प्रताप लाखो मुगलों पर अकेले भारी है


भारत की फजाओ को सदा याद रहूगा,
आजाद मुल्क था, आजाद हू, आजाद रहूगा।


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दस भक्ति शायरी हिंदी

हर वक़्त मेरी आँखो मे मातृभूमि का सपना हो
जब कभी मरू तो तिरंगा मेरा कफ़न हो ,
और कोई तमन्ना नही है जीवन मे ,
जब कभी भी जन्म लू तो भारत मेरा वतन हो ..!


बोझ उठाए हुए फिरती है हमारा
अब तक ऐ ज़मी मा तिरी ये उम्र तो आराम की थी


चलो आज पुनः वह जमाना याद कर ले।
शहीदो के दिल मे थी जो ज्वाला वो ताजा कर ले।
उनके जोश व जज्बे को सलाम कर ले।


das bhakti shayari hindi

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पास वतन के आओ तो कोई बात बने,
बुझी मशाल को जलाओ तो कोई बात बने,
सूख गया है जो लहू शहीदो का,
उसमे अपना लहू मिलाओ तो कोई बात बने।


है नमन उनको कि जो यशकाय को अमरत्व देकर,
इस जगत में शौर्य की जीवित कहानी हो गये हैं,
है नमन उनको जिनके सामने बौना हिमालय,
जो धरा पर गिर पड़े पर आसमानी हो गये हैं.


वतन की ख़ाक ज़रा एड़ियाँ रगड़ने दे मुझे
यक़ीन है पानी यहीं से निकलेगा


खीच दो अपने ख़ू से जमीं पर लकीर
इस तरफ आने पाये ना रावण कोई
तोड़ दो अगर कोई हाथ उठने लगे
छू ना पाये सीता का दामन कोई
राम भी तुम तुम्ही लक्ष्मण साथियो
अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो


लहराएगा तिरंगा अब सारे आसमान पर
भारत का ही नाम होगा सबकी जुबान पर
ले लेंगे उसकी जान या खेलेंगे अपनी जान पर
कोई जो उठाएगा आँख हिंदुस्तान पर


लहू वतन के शहीदों का रंग लाया है
उछल रहा है ज़माने में नाम-ए-आज़ादी


जरा गौर से सुन ले दुश्मन,
तुम लोग कभी न बच पाओगे,
देख रूप रौद्र तुम सब,
नतमस्तक हो जाओगे


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