दीपावली कब है महत्व पूजा विधि और शायरी | Deepawali Kab Hai Importance Lakshmi Poojan vidhi And Shayari

Deepawali Kab Hai Importance Lakshmi Poojan vidhi And Shayari प्राचीन हिन्दू वर्ण व्यवस्था में चार प्रकार के वर्ण माने गये थे. जिनके अपने अपने व्रत एवं त्यौहार थे. वर्ण व्यवस्था कमजोर पड़ने के कारण धीरे धीरे इन्हे सभी मनाते है. जिनमे दीपावली का त्यौहार मुख्य है. वैसे तो यह वैश्य वर्ण का पर्व था मगर आज भारत के सभी धर्मो के लोग दिवाली को हर्षोल्लास के साथ मिलकर मनाते है.वर्ष 2017 में दीपावली कब है इसकी katha मनाने का महत्व लक्ष्मी पूजन पूजा विधि और मित्रों व रिश्तेदारों को इस पर्व की अग्रिम शुभकामना प्रेषित करने के लिए शायरी SMS नीचें दिए जा रहे है.

दीपावली कब है महत्व पूजा विधि और शायरी

(Deepawali Kab Hai Importance Lakshmi Poojan vidhi And Shayari)

दीपावली का शाब्दिक अर्थ होता है दीपों की पक्ति. दिवाली के दिन लोग अपने घरों में और घरों के बाहर की दीवार को दीपकों से सजाते है. इस कारण इसे दीपोत्सव भी कहा जाता है. यह त्यौहार हिन्दू कैलेंडर के अनुसार कार्तिक महिने के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मनाई जाती है. इस दिन धन दौलत और एश्वर्य की देवी मानी जाने वाली माँ लक्ष्मी की विधिवत पूजा की जाती है.

2017 Deepawali Kab Hai (दीपावली कब है)

दिवाली का पर्व मुख्यतः 5 दिन का होता है. जो धनतेरस से आरम्भ होकर भैया दूज तक चलता है मगर कुछ राज्यों में इसे धनतेरस के एक दिन पूर्व बारस से ही गोवत्स के साथ आरम्भ किया जाता है. इन सभी में अमावस्या का दिन सबसे महत्वपूर्ण होता है तथा इसी दिन दीपावली का पर्व मनाया जाता है. इस वर्ष 19 अक्तूबर 2017 को दीवाली का पर्व है. जिस दिन गुरूवार का दिन है.

इस पांच दिवसीय त्यौहार की बात करे तो 16 अक्टूबर सोमवार के दिन धनतेरस का दिन है. इसके अगले दिन 17 अक्टूबर को नरक चतुर्थी का पर्व है. 18 को दिवाली तथा लक्ष्मी पूजा है जबकि इसकी अगली सुबह 19 तारीख को दीपों का त्योहार दीपावली मनाया जाना है. इसके बाद के दो दिनों को गोवर्धन पूजा और भैया दूज के रूप में मनाये जाते है.

दीपावली का महत्व (Importance of Deepawali festival)

हर तीज त्यौहार को मनाने का अपना महत्व होता है. दिवाली मनाने का अपना सामजिक धार्मिक और पौराणिक महत्व है. इस पर्व से कुछ दिन पहले तक काफी लम्बी अवधि तक सरकारी अवकाश घोषित किया जाता है. लोग इन दिनों का उपयोग दीपावली की तैयारियां घर की साफ़-सफाई और इसे सजाने में व्यतीत करते है. रौशनी के इस पर्व को बुराई पर अच्छाई, असत्य पर सत्य के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है.

इस पर्व का धार्मिक महत्व यह है कि माना जाता है दशरथ पुत्र भगवान् श्री राम को 14 वर्ष का वनवास प्राप्त हुआ था. इस अवधि में उनके साथ उनकी पत्नी सीता और लक्ष्मण थे. लंका के राक्षसी राज रावण ने अपनी बहिन सूर्पनखा के लक्षमण द्वारा नाक काटे जाने के बाद प्रतिशोध के रूप में मैया सीता का हरण कर लिया. महाराजा सुग्रीव और भक्त हनुमान की मदद से रामजी ने रावण से युद्ध किया और दशहरे के दिन रावण को मार डाला एवं सीता को लेकर अयोध्या लौटे इस दिन राम जी के 14 वर्ष का वनवास पूरा हुआ था. इस ख़ुशी के अवसर में अयोध्यावासियो ने घी के दीपक जलाकर राम जी का स्वागत किया. इसकी मान्यता को लेकर आज भी दीपावली का त्यौहार मनाया जाता है.

दीपावली पूजा विधि (Deepawali Lakshmi Poojan vidhi)

दीपों के इस त्यौहार में धन सम्पदा की देवी माँ लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व है. दिवाली से कुछ दिन पहले ही माँ लक्ष्मी के आगमन के लिए घर की साफ़ सफाई की जाती है. पूजा के शुभ मुहूर्त पर लक्ष्मीजी की मूर्ति अथवा तस्वीर की स्वच्छ स्थान पर स्थापना की जाती है. पूजा में परिवार के सभी सदस्य मिलकर ऊं श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नम: ॥ मन्त्र का उच्चारण करते है.

  • सर्वप्रथम उपयुक्त दिशा में माँ लक्ष्मी के लिए आसन की स्थापना.
  • लक्ष्मी की नवीनतम फोटो या मूर्ति की स्थापना मन्त्रोच्चार के साथ.
  • गुलाल, कुमकुम, सिंदूर, कलश, नारियल, अक्षत, नैवेद्य, दीपक सहित सारी पूजा सामग्री पास रखे.
  • कमल के पुष्पों का आसन तैयार करे.
  • आरती व् कलश के साथ गणपति, सरस्वती, लक्ष्मीजी जी की आराधना की जाए.
  • जल, वस्त्र, पुष्प और प्रसाद चढाए.
  • परिवार के सामूहिक सदस्यों के साथ लक्ष्मी जी की आरती करे.
  • माँ के साथ जयकारे के साथ प्रसादी वितरण

दिवाली/दीपावली शायरी (Diwali / Diwali Shayari)

कई इतिहास को एक साथ दोहराती
है दिवाली,
मोहबत पर विजय के फूल बरसाती है
दिवाली.


aaya hain deepo ka tyauhaar
taiyaaree karee hain beshumaar
bas ab hain yaaron ka intajaar
aayenge apane tab hee sajegee bahaar


deepak kee jvaala sa tej ho
ghar mein sukh samrddhi ka samaavesh ho
karate hain bhagavaan se dua
har kasht jeevan ke door ho.


कह दो अँधेरों से……!!!
कहीं और घर बना लें ,
साहेब….!!!
मेरे मुल्क में रौशनी का सैलाब आने वाला है ।
।। दीपावली की बधाई ।।


parivaar ko baandhe har tyauhaar
khushiyon kee chhaaye jeevan mein bahaar

sabake lie hain manachaahe upahaar
meethe meethe svaadisht pakavaan

karaata sabaka milan har saal
deepaavalee ka parv sabase mahaanparivaar ko baandhe har tyauhaar
khushiyon kee chhaaye jeevan mein bahaar

sabake lie hain manachaahe upahaar
meethe meethe svaadisht pakavaan

karaata sabaka milan har saal
deepaavalee ka parv sabase mahaan

दिवाली की कथा (diwali katha in hindi )

एक प्राचीन कथा के अनुसार सुग्रीव के भाई बली ने अपनी शक्ति और पराक्रम के दम पर एश्वर्य की देवी लक्ष्मी सहित सभी देवताओं को अपना बंधक बना दिया था. कहते है दिवाली के दिन यानि कार्तिक महीने की कृष्ण अमावस्या के दिन स्वय विष्णु ने आकर बली के नियन्त्रण से लक्ष्मी को मुक्त करवाया. कई दिनों की कैद के बाद सभी देवी देवता वहां से निकलते ही सोने चले गये. इसी धारणा को मानते हुए आज भी हम अपने घरों की सफाई करते है ताकि धन की देवी सहित देवता कही और जगह जाने की बजाय हमारे घर मेहमान बनाकर आए.

इसकी दूसरी कथा भगवान् श्री राम, सीता और लक्ष्मण से जुड़ी हुई है. माता कैकेयी द्वारा हठपूर्वक राम को चौदह वर्ष का वनवास दिलाया था. जिसके बाद राम जी ने भाई और पत्नी के साथ कठिन समय को जंगल में दर दर भटकते हुए बिताया. इस दौरान सीता का अपहरण रावण ने किया, फिर रावण के साथ लम्बे समय तक युद्ध चला और विजयी होकर राम सीता को लंका से लेकर आए. जिस दिन राम के वनवास के 14 वर्ष पुरे हुए और वे अपने नगर अयोध्या को आए तो लोगों ने घी के दीपक जलाकर उनका स्वागत किया. इसी दिन से दीपावली को प्रकाश के त्यौहार के रूप में हर वर्ष कार्तिक महीने की अमावस्या को देशभर में मनाया जाता है.

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