Deepawali Laxmi Pujan Vidhi Muhurat 2017 In Hindi

दीपावली पूजन विधि-हिन्दू धर्म के त्योहारों में दीपावली का बड़ा महत्व है, जिन्हें कार्तिक महीने की पूर्णिमा को मनाया जाता है. वर्ष 2017 में यह पर्व 19 अक्टूबर को आ रहा है. ज्योतिषियों के अनुसार लगभग 27 साल बाद दिवाली पर गजब का संयोग बन रहा है. इस बार दिवाली पूजा सुबह 7;18 मिनट से शुरू होगा जो अगले 24 घंटो तक विद्यमान रहेगा. १९९० में चित्रा नक्षत्र में दिवाली आई थी, इस बार भी ऐसा ही है, ज्योतिषियों की माने तो इस मुहूर्त में लक्ष्मी गणेश पूजा विशेष कर व्यापारी वर्ग के लिए लाभदायक है.

Deepawali Laxmi Pujan Vidhi Muhurat 2017 In Hindi

Diwali Pooja Ka Muhrat Time/Laxmi Pooja Muhrat Time; जैसा कि आप सभी जानते है दिवाली पर लक्ष्मी पूजा का बड़ा महत्व होता है. व्यापार में तरक्की तथा घर में सुख सम्रद्धि के लिए महालक्ष्मी जी की पूर्ण विधि विधान के साथ पूजा अर्चना की जाती है. इसमे यदि Pooja Ka Muhurat & Time को देखकर पूजा विधि से उपासना की जाए तो वह अधिक फलदायी होती है. यहाँ पर आपकों दीपावली तथा धनतेरस दोनों पर्वो के शुभ मुहूर्त और समय के बारे में जानकारी दी जा रही है. जिनकी पालना करके ही Diwali Pooja करे जिससे लक्ष्मी प्रसन्न हो तथा अपनी दया द्रष्टि सदा आप पर बनी रहे.

diwali pooja time & Muhurat 2017

  • दिवाली पूजन का शुभ मुहूर्त: रात 05.43 से 08.16 तक
    वृषभ काल रात 7.11 से 9.06 तक (प्रदोष काल मुहूर्त)
  • ज्योतिषीय पूजा मुहूर्त
    प्रात: 6.28 से 7.53 तक
    रात 4.19 से 8.55 तक
  • पूजन समय मुहूर्त
    महालक्ष्मी पूजन समयावधि- 51 मिनट
    समय – 11.40 से 12.31 

यहाँ पर आपकों बता दे कि दीपावली 2017 की तिथि का आरम्भ 12:13 मिनट 19 अक्टूबर की मध्यरात्रि से होगा. दिवाली तिथि का समापन 20 अक्टूबर मध्यरात्रि 12 बजकर 41 मिनट पर होगा. इस समयावधि में लक्ष्मी गणेश और कुबेर पूजन किया जाना चाहिए.

diwali pooja ki vidhi

  • प्रदोष काल में लक्ष्मी और गणेश जी की मूर्ति की स्थापना करे.
  • गणेश जी की मूर्ति लक्ष्मी के दाई ओर की जानी चाहिए.
  • घी से भरे दीपक को लक्ष्मी की मूर्ति के आगे तथा दुसरे तेल के दिए को घर की चौकी रखी जानी चाहिए.
  • लाल या पीले वस्त्र पर रखी पूजा सामग्री एवं मूर्ति को रखा जाना चाहिए.
  • मूर्ति उत्तर पूर्व दिशा में तथा घर के सभी सदस्यों का मुख मूर्ति की दिशा में होना चाहिए.
  • “ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नम:” के मन्त्र के साथ माँ लक्ष्मी की पूजा अराधना और स्तुति की जानी चाहिए.

धनतेरस कब है और इसका मुहूर्त

दीपावली के पर्व की शुरुआत धनतेरस से शुरू होती है जो भाई दूज तक पांच दिनों तक चलती है.यह दिन आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वन्तरि जी को समर्पित है. इस दिन धन्वन्तरी का जन्म हुआ था. समुद्र मंथन से जन्मे धन्वन्तरी अपने साथ आयुर्वेद की विद्या लेकर जन्मे थे. धनतेरस के अवसर पर लोग खरीददारी करना शुभ मानते है. इस दिन विशेषकर सोने चांदी के आभूषण तथा बर्तन खरीदे जाते है. इस दिन भगवान गणेश जी एवं धन्वन्तरी जी की पूजा का विशेष प्रावधान है. धनतेरस के दिन तेल का एक दीपक भी जलाया जाता है.

धनतेरस को क्या खरीदे ?

इस दिन मुख्यतः चांदी की धातु या आभूषण खरीदे जाते है, कहा जाता है चांदी कुबेर की धातु है और सही समय इसकी खरीददारी से घर में आरोग्य और सुख सम्रद्धि की प्राप्ति होती है. कई लोग आभूषणों की खरीददारी में इस बात का ध्यान रखना चाहिए, कि इस दिन सोने के आभूषण नही खरीदने चाहिए

कार्तिक महीने की त्रयोदशी को धनतेरस का पर्व मनाया जाता है, इस दिन शाम को यम का दीपदान भी किया जाता है. मृत्यु का छाया परिवार से दूर रहने के साथ ही कारोबारी लोग इस दिन नये बही खातों की खरीददारी करते है. जिन्हें लक्ष्मी पूजा के साथ ही शुरू कर देते है.

 

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