देश प्रेम पर निबंध – Desh Prem Essay in Hindi

Desh Prem Essay in Hindi नमस्कार दोस्तों आज हम देश प्रेम पर निबंध लेकर आए हैं. हमारी धरती माँ स्वर्ग से भी बढ़कर है प्रत्येक व्यक्ति के दिल में स्वदेश के प्रति प्रेम होना ही चाहिए. आज के निबंध, भाषण, अनुच्छेद, लेख में हम देश प्रेम क्या हैं किसे कहते है इस पर क्लास 1, 2,3,4,5,6,7,8,9,10 के स्टूडेंट्स के लिए सरल भाषा में हिंदी निबंध एस्से यहाँ बता रहे है.

Desh Prem Essay in Hindi

Desh Prem Essay in Hindi

प्रेम एक मानवीय गुण है जो जीवन को सार्थकता देता है, बगैर प्रेम के कटु जीवन विष की तरह बन जाता हैं, मानव का यह प्रेम विविध रूप में छलकता है यथा परिवार प्रेम, जातीय प्रेम, दोस्तों से प्रेम इन सबसे बढ़कर प्रेम का जो स्वरूप हैं वह है देश प्रेम अथवा स्वदेश प्रेम. मानव ही नहीं पशु और पक्षी अपनी जननी जन्मभूमि से अगाध प्रेम करते हैं. फिर भला मानव इससे अछूता कैसे रह सकता हैं.

प्रत्येक भारतीय अपनी जन्मभूमि को माँ कहकर सम्बोधित करता हैं, उसके मन के ये भाव देशप्रेम की तीव्र अभिव्यंजना करते हैं. यह प्रेम स्वाभाविक है क्योंकि हम जिस मिट्टी में पले बढ़े हमने अपने विकास किया तथा जीवन की आवश्यक सुविधाओं को इसने प्रदान किया, अतः हमारा दिल स्वतः ही इस भूमि से प्रेम करने लगता हैं. प्रत्येक नागरिक का यह प्रथम कर्तव्य है कि वे अपने देश के प्रति उनके प्रतीक चिन्हों, संकेतों एवं अन्य लोगों से प्रेम करे तथा घुलमिलकर रहे.

देशभक्ति/देश प्रेम पर निबंध 1 (200 शब्द)

देशभक्ति का अर्थ हैं अपने देश के विकास, उसकी गरिमा को बढ़ाने में सकारात्मक भूमिका निभाना एवं आवश्यकता पड़े तो अपने देश के लिए मर मिटने के लिए तैयार रहना ही देश प्रेम हैं. बहुत से लोग मानते है कि अपने वतन की रक्षा की खातिर मर मिटने वाला ही देश प्रेमी होता हैं, जबकि ऐसा नहीं है. निसंदेह देश की सीमाओं की रखवाली करने वाले हमारे सैनिक देश प्रेम से लबरेज होते ही हैं, मगर देश में बसने वाला आम नागरिक, शिक्षक, छात्र, व्यापारी, राजनेता, अभिनेता भी देश प्रेमी होते है जो अपने देश के विकास एवं सुधार में अपना अधिकतम योगदान देने का प्रयत्न करते हैं.

संसार में यदि कही देश प्रेम की अनूठी मिसाल देखने को मिलती हैं तो वह भारत देश एवं यहाँ के लोगों में ही हैं. जिन्होंने इतिहास की हर सदी में अपने वतन की रक्षा की खातिर जान तक कुर्बान कर देने के उदाहरण प्रस्तुत किये हैं. स्वतंत्रता संग्राम को ही ले लीजिए. न जाने कितने अनाम यौद्धाओं, क्रांतिकारियों ने ब्रिटिश हुकुमत को उखाड़ने के लिए अपना घर, परिवार और अंत में अपने जीवन का त्याग कर दिया था. देश के प्रति इसी समपर्ण के भाव को देश प्रेम की उपमा दी जाती है जिसे हमारे साहित्य में भी महत्वपूर्ण स्थान दिया हैं. कवि गुप्त लिखते है कि वह दिल नहीं पत्थर है जिसमें स्वदेश के प्रति प्रेम का भाव नहीं हैं.

यदि हम आधुनिक पीढ़ी में देश प्रेम की बात करे तो अफ़सोस की बात हैं अपनी फलीफुली राष्ट्र भक्ति की विरासत लिए हमारी पीढ़ी राष्ट्र के नाम पर उदासीन प्रतीत होती हैं. मात्र कुछ दिनों पन्द्रह अगस्त या छब्बीस जनवरी को ही उनका देश प्रेम जगता है कुछ कार्यक्रमों की आहुति के बाद वह अगले सीजन तक के लिए सुप्त हो जाता है. धीरे धीरे खत्म होती जा रही देश प्रेम की यह भावना राष्ट्र के स्वर्णिम भविष्य की अच्छी निशानी नहीं हैं. हमारे युवकों छात्र छात्राओं में वतन पर मर मिटने का जज्बा हमें उत्पन्न करना होगा, तथा इस कार्य में शिक्षण संस्थान एवं हमारे गुरुजन अहम भूमिका निभा सकते हैं.

देश प्रेम पर निबंध 2 (300 शब्द)

प्रस्तावना

सरल शब्दों में देश प्रेम अपने राष्ट्र, वतन के प्रति सम्मान, सर्वोच्च इज्जत की भावना का होना हैं. आप भी दिल में अपने भारत के प्रति अगाध श्रद्धा व प्रेम रखते है तो आप देशभक्त हैं. किसी भी सम्प्रभु राष्ट्र में देशभक्तों का बड़ा समूह होता है जो स्व से अधिक अपने वतन को तरजीह देते हैं. अपने स्तर पर वे सब कुछ करने के लिए तत्पर रहते है जिसमें देश का भला निहित हो, आज की आधुनिक जीवन शैली एवं दोहरी नागरिकता ने व्यक्ति में देश प्रेम के भाव को न केवल कम किया बल्कि इन्हें रूढ़ि वादी सोच तक करार दिया हैं.

देश प्रेम का होना नितांत अनिवार्य हैं.

यह भी सत्य है कि लोगों में राष्ट्र भक्ति के संचार के लिए परिस्थितियाँ भी कुछ हद तक जिम्मेदार होती हैं, फिर भी आम हालातों में भी राष्ट्र सर्वोपरि ही समझा जाता हैं. ब्रिटिश दौर में अंग्रेजी सरकार के दमन चक्र एवं क्रांतिकारियों को कठोर यातनाएं देने की सोच ने जन जन के दिल में देश प्रेम की ज्योति जला दी. अंग्रेजी सरकार न अपनी कार्यवाहियों से समूचे भारत को अपने विरोध में खड़ा कर दिया. इस वातावरण में प्रत्येक व्यक्ति चाहे व किसान, मजदूर या कलमकार वह स्वयं को अपने वतन का प्रतिनिधि के रूप में देखने लगा. भारत के इतिहास में देश प्रेम का ऐसा ज्वर पूर्व में कभी नहीं देखा गया था.

आज भले ही हमारा देश स्वतंत्र है मगर लोगों को देश प्रेम छोड़ने की जरुरत नहीं हैं. क्योंकि हमारा अस्तित्व हमारे वतन हमारी भूमि से ही हैं. हम जो कुछ है इसकी बदौलत हैं. आज संसार बदल चूका है हम आए दिन आर्थिक युद्ध में पिछड़ते जा रहे हैं. पूंजी वादी ताकते हमारें बाजारों पर कब्जा कर रही हैं. हमारे लोग बेगारी पर विवश हैं. हमें नयें युग में अपने राष्ट्र प्रेम को फिर से जागृत करने की जरुरत हैं. स्वदेश में बनी वस्तुओं के उपयोग को बढ़ावा देकर, विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार एवं समाज में शांति व भाईचारे की स्थापना करके अपने राष्ट्र की तरक्की में योगदान दे सकते हैं. क्योंकि विकास एवं शान्ति एक दूसरे के पूरक हैं.

एक नागरिक के रूप में हमारा देश प्रेम न केवल स्वतंत्रता दिवस एवं गनतंत्र दिवस पर दिखना चाहिए, हमारे दिल की गहराई में इसे बचाने की जरुरत हैं. मात्र वतन के गुणगान एवं जयकारे से देश का भला नहीं होता हैं. कर्मशील बनिये और अपने परिवार, समाज, राज्य व देश के विकास में भागीदार बनकर हम अपने कर्तव्यों को अदा कर सकते हैं. वह राष्ट्र हमेशा प्रगति के शिखर पर आरूढ़ होता है जिसके रूप अपने सामाजिक व आर्थिक विकास के प्रति सचेत रहते है इसलिए नयें भारत के प्रेमी नागरिक बनकर इसकी तरक्की में हाथ बटाएं.

निष्कर्ष

जिस देश में जिस श्रेणी के लोग बसते है उस राष्ट्र का चरित्र वैसा ही बन जाता हैं. अतः हम अपने भारत के चरित्र को कैसा बनाना चाहते हैं इसका निर्णय अपने स्वविवेक से करें. इतिहास में जयचंद और मीर जाफर भी हुए है और आज भी हैं भले ही हम सीमाओं पर जाकर अपने वतन के बाहरी दुश्मनों का मुकाबला न कर सके, मगर घर में रहकर भी इन सापों के फन तो कुचले जा सकते हैं. एक आक्रामक कट्टर देशप्रेमी का स्व देश प्रेम कभी सोता नहीं है क्योंकि सोया हुआ प्रेम तो महज एक दिखावा होता हैं.

देश प्रेम पर निबंध 4 (400 शब्द), Essay on Love for Country in Hindi

देश-प्रेम का अर्थ – अपने देश, अपनी जन्मभूमि से लगाव रखना देशप्रेम हैं. इन्सान जिस भूमि पर जन्म लेता है अपना पेट उसके अन्न से भरकर शारीरिक व मानसिक विकास करता हैं. उससे प्रेम करना नैसर्गिक है.

देश-प्रेम में त्याग – अपने देश से प्रेम करने वाला राष्ट्र भक्त अपना सर्वोच्च त्याग करने के लिए तैयार रहता हैं. हमें यह विचार करना चाहिए कि हमें देश ने क्या नहीं दिया, जबकि बदलें में हम उसे क्या दे पाए है हमारा योगदान भारत के लिए क्या रहा हैं, अपना पेट भरना और शाम को सोकर अगले दिन कोल्हू के बैल की भांति अपने स्वार्थों में लग जाना तो पशुत्व की निशानी हैं.

एक पवित्र भावना – प्रेम एवं भक्ति राष्ट्र पर कीजिए, आपके जाने के बाद दुनियां याद रखेगी. अपने वतन की दीवानगी क्या क्या नहीं करवाती. वतन की खातिर जेल, यातनाएं, फांसी, गोली. यह सब कुछ तो हमारा हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने मगर आज भी हम उनके सम्मान एवं राष्ट्र प्रेम में सिर झुकाकर नमन करते हैं. एक व्यक्ति के लिए राष्ट्र ही उसका गौरव होता है इसलिए अपने भारतीय होने पर गर्व करिए और इसके लिए कुछ करने का जज्बा व दीवानगी को जीवित रखिये.

देश प्रेमी का जीवन– एक देश लोगों से बनता है, समाज उन्ही लोगों व परिवारों से बनता है जो राष्ट्र की नींव कहलाती हैं. अपने राष्ट्र से प्रेम करने का अर्थ यह नहीं है कि आप अपने परिवार, समाज को भूल जाए, यदि आप उन्हें लगाव रखते है उनकी तरक्की करते है तो स्वतः ही आप राष्ट्र की उन्नति में सक्रिय भागीदार हैं. मगर जब निजी हित एवं राष्ट्र हित में टकराव की स्थिति हो तो एक देशभक्त को अपने हित की बजाय देश के हित का सोचना चाहिए, क्योंकि राष्ट्रहित में प्रत्येक नागरिक का हित निहित हैं.

हमारी गौरवशाली विरासत व परम्परा- भारत के हर गाँव में चले जाइए किसी न किसी वीर यौद्धा, संत महात्मा एवं महापुरुषों के पद चिह्न मिलेगे. चन्द्रगुप्त, चाणक्य, प्रताप, तिलक, आजाद, भगतसिंह नेताजी बोस जैसे व्यक्तित्व में देश प्रेम की दीवानगी एवं उनके योगदान हमारी समृद्ध विरासत हैं. आज भले ही हमारी भूमिका स्वतंत्रता सेनानी से एक नागरिक के रूप में बदल गई है मगर पावन भावना आज भी विद्यमान हैं. किसान देश का पेट भरकर, चिकित्सक रोगियों का ईलाज कर, इंजीनियर निर्माण में, वैज्ञानिक शोध द्वारा, मजदूर अपनी परिश्रम से राष्ट्र की प्रगति व गौरव को बढ़ाने के अथक प्रयास कर रहे हैं.

देश-प्रेम-सर्वोच्च भावना – एक भारतीय के लिए सर्वोच्च भाव अपनी माता के प्रति होता हैं. वह उसे धन, दौलत अन्य प्रलोभन से अधिक प्यारी होती हैं. भारत भूमि भी हमारी माँ है इसकी सुन्दरता, वैभव, गरिमा, संस्कृति को बनाएं रखना हमारा पहला दायित्व हैं.

आज देश प्रेम की आवश्यकता – जब देश में आतंकी जवानों पर हमला करते है तो इस गम में पूरा देश रो पड़ता हैं, ये ही वीर जब सर्जिकल स्ट्राइक के रूप में दुश्मन को खत्म कर आते है तो हर भारतीय जश्न मनाने लगता हैं. वह जैसलमेर का हो या असम का, तमिल हो या पंजाबी सभी के दिल देश प्रेम के धागे से जुड़े होते हैं. जब मलेशिया ने जम्मू कश्मीर के पाकिस्तानी प्रोपेगंडा का साथ दिया तो देश के हजारों पाम आयल व्यापारियों ने अपने स्तर पर मलेशिया से व्यापारिक सम्बन्ध तोड़ने का निर्णय कर लिया, समय समय पर इस तरह देश प्रेम की मिसाले न केवल युवाओं को प्रेरित करती हैं बल्कि देश की एकता और अखंडता को सशक्त करती हैं.

देश-प्रेम पर निबंध Essay on Love for Country in Hindi

देश-प्रेम का अर्थ – दो शब्दों के मेल से देशप्रेम शब्द बनता हैं जिसका आशय है अपने देश से प्रेम प्यार मोहब्बत करना इसे हम दूसरे शब्दों में स्वदेश प्रेम भी कहते हैं. हम जिस भूमि पर जन्म लेते है जहाँ जीवन व्यतीत करते हैं अन्न जल खाकर जीवन संवारते हैं उस भूमि से प्रेम करना स्वाभाविक हैं.

त्याग –एक देश प्रेमी सदैव अपने वतन के लिए सर्वस्व समर्पण का भाव रखता हैं. अपने तन मन धन से वह सभी का त्याग करने से कभी हिचकता नहीं हैं. इस सम्बन्ध में महान अमेरिकन राष्ट्रपति लिंकन का कथन सारगर्भित हैं. उन्होंने अपने देश के लोगों को संबोधित करते हुए कहा था, तुम यह मत सोचो कि तुम्हे देश ने क्या दिया बल्कि यह सोचो तुमने देश को क्या दिया हैं.

देश प्रेम का महत्व: संसार के सभी प्रेमों में देशप्रेम सभी से बढ़कर हैं ये पवित्र भाव इन्सान को सदैव त्याग और बलिदान के लिए प्रेरित करता हैं. मानव के भावों का जन्म ह्रदय में होता हैं. प्रत्येक इन्सान की यह हार्दिक कामना रहती हैं कि उसने जिस जमीन पर जन्म लिया उसके अन्न जल का सेवन किया. वह उस मातृभूमि के ऋण की अदायगी करे, इसके उदहारण हम प्रवासी भार तीयों में भी देख सकते हैं अपने स्वदेश लौटने की ललक सदैव उनमें बसी रहती हैं. वे हरपल मात्रभूमि के दर्शन को ललायित रहते हैं. अपनी मातृभूमि के प्रति मानव के इसी प्रेम को राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त ने अपनी कविता के माध्यम से बताया हैं.

“पा कर तुझसे सभी सुखों को हमने भोगा.
तेरा प्रत्युपकार कभी क्या हमसे होगा.
तेरी ही यह देह, तुझी से बनी हुई है.
बस तेरे ही सुरस-सार से सनी हुई है.
फिर अन्त समय तू ही इसे अचल देख अपनायेगी.
हे मातृभूमि! यह अन्त में तुझमें ही मिल जायेगी.”

सभी भावों में देशप्रेम के भाव को सर्वोच्च माना गया हैं. इसके समक्ष व्यक्ति के निजी स्वार्थ और लोभ का कोई स्थान नहीं रह जाता हैं. जिस मनुष्य में अपने वतन के प्रति प्रेम व वफादारी के भाव नहीं हैं उसे पत्थर दिल अथवा पाशविक प्रवृत्ति ही कहा जाएगा.

“जो भरा नहीं है भावों से जिसमें बहती रसधार नहीं.
वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं.”

देश प्रेम के विविध क्षेत्र तथा देश सेवा– सेवा का कोई विशिष्ट क्षेत्र नहीं होता हैं. हम जो कुछ भी कर सकते है वह सहयोग या सेवा ही हैं. हम राष्ट्र की तरक्की में तन मन धन से समर्पित होकर अपना सहयोग कर सकते हैं. एक सैनिक के रूप में हम अपने वतन की सरहद की हिफाजत कर सकते हैं. एक किसान और मजदूर के रूप में अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए अपने देश प्रेम का प्रदर्शन कर सकते हैं.

हमारा देश दुनिया का सबसे बड़ा प्रजातांत्रिक राष्ट्र हैं. लोकतंत्र हमारी पहचान है एक जागरूक नागरिक के रूप में हम अपनी राजनैतिक जिम्मेदारियों का सही तरीके से निर्वहन करके भी राष्ट्र निर्माण के सच्चे भागीदार हो सकते हैं. हम अपने मत का विवेकपूर्ण उपयोग करके सही और योग्य लोगों के हाथ में देश की बागडोर सौप सकते हैं. इस तरह निजी हितों का त्याग करके छोटे छोटे कदमों से देश के विकास में बड़ी भूमिका अदा कर सकते हैं.

Desh prem essay

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