चर्चा का अर्थ परिभाषा प्रकार प्रक्रिया लाभ व हानि | Discussion meaning in Hindi

चर्चा का अर्थ परिभाषा प्रकार प्रक्रिया लाभ व हानि Discussion meaning in Hindi: दोस्तों आमतौर पर हम डिस्कशन या चर्चा शब्द का उपयोग करते हैं. इस शब्द का सार्थक अर्थ एवं परिभाषा क्या हैं. शिक्षण में चर्चा का क्या महत्व हैं तथा इसके कितने प्रकार हैं इन सभी को हम आज के आर्टिकल में विस्तार से समझने का प्रयास करेंगे.

चर्चा अर्थ परिभाषा प्रकार प्रक्रिया लाभ हानि Discussion meaning in Hindi

चर्चा अर्थ परिभाषा प्रकार प्रक्रिया लाभ हानि Discussion meaning in Hindi

हिंदी मे अर्थ; अंग्रेजी मे अर्थ; उदाहरण और उपयोग. Pronunciation of Discussion (डिस्कशन) play. Meaning of Discussion in hindi: समूह आधारित अधिगम शिक्षण तकनीक का सबसे सरल तरीका है चर्चा/ परिचर्चा करना अथवा परस्पर विचार विनिमय करना.

माध्यमिक विद्यालयों के संदर्भ में वहां की विभिन्न परिस्थितियों में इस शिक्षण तकनीक का महत्व मुख्यतः इस तथ्य पर आधारित है कि वह एक प्रकार का ऐसा सामूहिक बौद्धिक कार्य है जो यह मानकर चलता है कि एक व्यक्ति विशेष की तुलना में कई लोगों से प्राप्त जानकारियाँ, विचारों और भावनाओं का संग्रह अधिक उपयोगी या लाभप्रद होता हैं.

समूह के सभी सदस्य मिलकर विचारों का आदान प्रदान करते हैं. यही चर्चा परिचर्चा की सबसे बड़ी खूबी है. इस तकनीक के अनुसार सभी छात्र और अध्यापक मिल बैठकर किसी विषय विशेष पर खुलकर अपने विचार प्रकट करते हैं. यदि सामूहिक चर्चा परिचर्चा न हो और केवल एक व्यक्ति या वर्ग की चले और वही निष्कर्ष को प्रभावित करे तो फिर यह शिक्षण तकनीक विफल हो जाएगी.

चर्चा परिचर्चा की श्रंखला बीच में ही टूट जाएगी. अतः शिक्षक का यह कर्तव्य है कि वह सामान्यतः सभी छात्रों को और विशेषतः अधिक जानकारी रखने वाले छात्रों को चर्चा परिचर्चा में भागीदारी निभाने के लिए प्रोत्साहित करता रहे. उदाहरण के लिए किसी कक्षा परीक्षण के दौरान छात्रों से प्राप्त उत्तरों के ठीक न होने के बारे में अध्यापक को बताना हो या किसी व्याख्यान के अंत में छात्रों की ओर से उठाई गई शंकाओं का निराकरण करना हो या कक्षा अध्यापन के दौरान उठाई गई किसी समस्या के वैकल्पिक समाधान बताए जाने हों या फिर अध्यापकीय वक्तव्य की नीरसता भंग करनी हो, तो इन सभी परिस्थितियों में चर्चा परिचर्चा की तकनीक अपनाई जा सकती हैं.

इस प्रकार चर्चा निर्धारित शिक्षण अधिगम उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु प्रयोग में लाई जाने वाली ऐसी व्यूह रचना है जिसमें विद्यार्थि यों व शिक्षक के मध्य होने वाले पारस्परिक वाद विवाद, विचारों के आदान प्रदान को शिक्षण अधिगम प्रक्रिया को मुख्य आधार बनाने का प्रयत्न किया जाता हैं. शिक्षक और विद्यार्थी दोनों को ही इस परिचर्चा में पूरी तरह सक्रिय साझीदारी निभाकर परि चर्चा गतिविधियों के नियोजन एवं संगठन पर इस तरह ध्यान देना होता है कि उनके माध्यम से निर्धारित शिक्षण अधिगम उद्देश्यों को ठीक ढंग से प्राप्त किया जा सके.

चर्चा का अर्थ परिभाषा discussion meaning definition in hindi

ए एच ह्यूज के अनुसार यह एक सहयोगी कार्य है जिसमें प्रत्येक सहभागी किसी समस्या को समझने का प्रयास करता है और सत्य की खोज करना चाहता हैं इसे व्यवस्थित वार्तालाप से भी सम्बोधित किया जाता हैं.

ली के अनुसार वार्तालाप शैक्षिक समूह क्रिया है इसमें छात्र सहयोगपूर्वक एक दूसरे से किसी समस्या पर विचार विमर्श करते हैं. वेबस्टर के अनुसार चर्चा का तात्पर्य किसी प्रश्न, प्रकरण तथा समस्या के विभिन्न पहलुओं पर विचार करना, उनका परीक्षण तथा उनकी जांच करना. यह विधि प्रश्न उत्तर की संकीर्ण तकनीक से आरम्भ होकर अनिर्देशित उपागम की ओर अग्रसर होती हैं. जिसमें अध्यापक यथास्थिति बनाए रखने की भूमिका निभाता हैं. यह प्रविधि लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अनिवार्य अंग हैं.

रिस्क के अनुसार चर्चा का अर्थ है अध्ययन अधीन प्रकरण अथवा समस्या में निहित सभी सम्बन्धों पर पूर्णता से विचार करना. इसमें सम्बन्धों का विश्लेषण किया जाता हैं, उनकी तुलना और मूल्यांकन किया जाता हैं. और निष्कर्ष निकाले जाते हैं.

गुड की डिक्शनरी ऑफ़ एजुकेशन के अनुसार चर्चा का अर्थ उस क्रिया से है जो किसी प्रकरण, प्रश्न या समस्या के साथ संबंधित होती हैं और उसमें भाग लेने वाले किसी निर्णय अथवा निष्कर्ष पर पहुँचने की सच्ची इच्छा रखते हैं. उपरोक्त अध्ययन से स्पष्ट है कि चर्चा में निम्न विशेषताएं होती हैं.

  • चर्चा किसी समस्या में निहित सभी सम्बन्धों का विचारपूर्ण चिंतन हैं.
  • चर्चा में विचारों का विनिमय होता है और तथ्यों के आधार पर खोज की जाती हैं.
  • विचारों का विनिमय विद्यार्थियों को चिंतन का महत्वपूर्ण प्रशिक्षण प्रदान करता हैं.
  • चर्चा का उद्देश्य कक्षा के कार्य को संगठित करना होता हैं. चर्चा औपचारिक भी हो सकती है और अनौपचारिक भी. चर्चा निम्नलिखित सिद्धांतों पर आधारित होती हैं.
  1. सक्रिय भागीदारी का सिद्धांत
  2. कार्य की स्वतंत्रता का सिद्धांत
  3. प्रश्न पूछने और उत्तर देने के सामूहिक एवं समान अवसर देने के सिद्धांत
  • यह एक लोकतांत्रिक पद्धति हैं.
  • चर्चा के माध्यम से छात्रों के व्यवहार में वांछित परिवर्तन लाया जाता हैं.
  • इसमें गलत उपागमों को हतोत्साहित किया जाता हैं.

चर्चा के उद्देश्य (Discussion objectives)

  1. विषय का विस्तृत ज्ञान देना.
  2. समस्या के विभिन्न पहलुओं की जानकारी देते हुए हल निकालना
  3. स्वस्थ नैतिक अवधारणाओं की स्थापना और संवर्धन करना.
  4. विद्यार्थियों में व्यक्तिगत उत्तरदायित्व की भावना सुद्रढ़ करना.
  5. तथ्यात्मक स्रोतों के आधार पर रूचि जागृत करना
  6. उपलब्धियों का दूसरों के विभिन्न विचारों द्वारा मूल्यांकन करना
  7. उच्च स्तरीय ज्ञानात्मक और भावनात्मक उद्देश्यों को प्राप्त करना.

चर्चा के अनिवार्य घटक (Essential components of discussion)

अध्यापक: अध्यापक चर्चा का एक महत्वपूर्ण घटक या अंग हैं. चर्चा का आयोजन तथा विषयवस्तु का चयन एवं गठन सब कुछ अध्यापक को स्वयं करना होता हैं. चर्चा के दौरान अध्यापक सावधानीपूर्वक निरिक्षण व विद्यार्थियों की कठिनाईयों का समाधा न कर चर्चा के सफल आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता हैं.

विद्यार्थी: चर्चा का दूसरा महत्वपूर्ण अंग विद्यार्थी होते है जो चर्चा में भाग लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुँचते हैं.

समस्या: यह चर्चा का मूल विषय होता हैं. जिसका समाधान करने के लिए ही चर्चा का आयोजन किया जाता हैं. समस्या यथा सम्भव स्पष्ट व विद्यार्थियों की बोधक्षमता की सीमा में होनी चाहिए. समस्या का चयन अध्यापक को विद्यार्थियों के सहयोग से करना चाहिए.

विषय सामग्री: जॉनसन के अनुसार चर्चा की विषयसामग्री ज्ञान तथ्यों एवं सामान्यीकरणों का समूह हैं. यदि किसी समस्या पर विचार विमर्श करके उसका समाधान ढूढना है तो इसे प्राप्त करना चाहिए. अत विषय सामग्री के आधार पर ही समस्या का समा धान प्राप्त किया जा सकता हैं.

चर्चा के प्रकार (types of Discussion)

  • औपचारिक चर्चा– औपचारिक चर्चा पूर्व निर्धारित कार्यक्रम तथा उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु आयोजित की जाती हैं. इस प्रकार की चर्चा के अपने निर्धारित नियम और उद्देश्य होते हैं. यह शिक्षक व छात्रों के मध्य आयोजित की जाती हैं.
  • औपचारिक चर्चा या वार्तालाप– इसमें निर्धारित नियम एवं सिद्धांतों का प्रयोग नहीं होता है. यह शिक्षक एवं छात्रों तथा छात्र छात्र के मध्य हो सकती हैं.
  •  बज वार्तालाप– ये छोटे व उद्देश्यपूर्ण चर्चा सत्र होते है जो एक छोटे समूह द्वारा किसी विशेष प्रश्न पर आयोजित किये जाते हैं.
  • सार्थक संरचनात्मक सामान्य चर्चा: ये उद्देश्यपूर्ण समूह चर्चा होती हैं जिसमें कक्षा के सभी विद्यार्थी भाग लेते हैं.
  • शिक्षण बिन्दुओं पर सामूहिक चर्चा: इसमें कुछ विशिष्ठ शिक्षण बिन्दुओं पर सामूहिक चर्चा की जाती हैं.

चर्चा के रूप (form of Discussion)

पैनल चर्चा– इसमें चुने हुए चार से छः व्यक्तियों के समूह में विचार विनिमय होता हैं. यह समूह इतना बड़ा होता हैं कि इसमें विविधता के लिए अवसर हो सकता है और इतना छोटा भी हो सकता है कि इसमें उद्देश्यपूर्ण विचार विनिमय हो सकता हैं. इसमें प्रायः सम्बन्धित क्षेत्रों के प्रसिद्ध सदस्य श्रोताओं के सम्मुख अपने विचार रखते हैं. जब विवेच्य विषय बहुत ही संश्लिष्ट या विवादास्पद हो तो उन्हें पढ़ाने के लिए नामिका परिचर्या यानि विषय विशेष के विशेषज्ञो को एक साथ बिठाकर परिचर्चा करने का विकल्प अपनाया जाना चाहिए. इस विकल्प का चयन इसलिए अच्छा माना जाता हैं क्योंकि नामिका परिचर्या के माध्यम से किसी भी विषय के कठिन पक्षों को बड़ी आसानी से और रचनात्मक तरीके से सबके सामने रखा जा सकता है.

आयोजन– परिचर्या करने वाली नामिका के सदस्य रूप में छात्रों या अध्यापकों अथवा छात्रों और अध्यापकों में से कुछ लोगों का चयन किया जा सकता हैं. किसी भी विषय या कई विषयों से संबंधित छात्रों के प्रश्नों का संकलन पहले से कर लेना चाहिए. जो व्यक्ति जिस विषय का या उस विषय के किसी पक्ष विशेष का विशेष्यज्ञ हो उसे उन्हें वे प्रश्न पहले दे दिए जाए ताकि नामिका परिचर्चा के समय वे सब अपने अपने विषय उपविषय की पूर्व तैयारी कर परिचर्या में भाग ले.

सबसे पहले जो परि नियामक हो वह परिचर्चा का प्रवर्तन करते हुए उस परिचर्चा के उद्देश्य या प्रयोजन और विषय क्षेत्र को स्पष्ट करें. पूर्वनिर्धारित क्रमानुसार एक एक प्रश्न का उल्लेख करते हुए नामिका सदस्यों को बोलने के लिए आमंत्रित किया जाए. आमंत्रित सदस्य एक एक कर उन विषयों उपविषयों के बारें में अपने अपने विचार प्रस्तुत करते जाए. अपनी मूल बात कह देने के बाद हर वक्ता को अपने से पूर्व वक्ताओं द्वारा कहि गई बात पर अपनी संक्षिप्त प्रतिक्रिया व्यक्त करने का अधिकार दे दिया जाना चाहिए.

परिचर्या के अंत में जो परानियामक होता है वह विभिन्न दृष्टिकोणों का और विचार विमर्श के सभी मुद्दों का संश्लेषण करते हए संक्षेप में अपने विचार प्रस्तुत करता हैं. नामिका परिचर्चा के माध्यम से सभी विवादास्पद और बहुआयामी विषयों पर विषय विशेष्यज्ञों के स्पष्टीकरण के अनसुलझे पहलुओं और प्रश्नों का समाधान सम्भव हैं.

सिम्पोजियम : सिम्पोजियम में भाग लेने वाले व्यक्ति श्रोताओं के सम्मुख किसी निश्चित समस्या या प्रकरण पर अपने विचारों का कथन करते हैं और पत्र वाचन करते हैं. सिम्पोजियम का मुख्य प्रयोजन है विवादास्पद प्रश्नों पर स्पष्ट रूप से विचार करना. सामान्य श्रोतागण विचारों को सुनते है और उन विचारों की वैधता एवं महत्व के बारें में अपना दृष्टिकोण व्यक्त करते हैं.

फोरम: यह भाषण के रूप में होता है जिसमें प्रश्न पूछने का समय दिया जाता हैं.

संसदीय रूप: इसमें चयनित सदस्यों के पालनार्थ कुछ नियम पहले ही बना दिए जाते हैं. इनके अनुसार प्रस्तावों को प्रस्तुत करने, अनुमोदन करने और मत लेकर उन्हें पारित करने की प्रक्रिया की जाती हैं. इसका अभिलेख रखा जाता हैं.

गोलमेज चर्चा: समस्या पर उतने ही व्यक्ति विचार करते है जितने सदस्य मेज के चारो ओर बैठ सके.

मंच वार्तालाप: यह पैनल चर्चा की भांति होता हैं. इसमें थोड़े से व्यक्तियों का समूह अधिक श्रोताओं के सम्मुखी एक मंच पर बैठकर वार्तालाप करता हैं. अन्य इस वार्तालाप में भाग नहीं लेते हैं.

व्याख्यान: शिक्षक व्याख्यान द्वारा विचारणीय प्रसंग प्रस्तुत करता है या संबंधित तथ्यों को उद्घाटित करता हैं तत्पश्चात समूह के सदस्य उस प्रसंग पर किसी भी तरह से विचार कर सकते हैं.

चर्चा का आयोजन या प्रक्रिया (Discussion process)

इस शिक्षण तकनीक के प्रभावी उपयोग के लिए आवश्यक है कि शिक्षक विषय की पृष्टभूमि स्पष्ट करने वाली आधारभूत जानकारी संबंधी पर्याप्त सूचनाएं छात्रों को पहले ही बता दे ताकि छात्रों के मस्तिष्क में वे सूचनाएं उपलब्ध रहे. और चर्चा परिचर्चा करते समय आवश्यकता पड़ते समय पर वे उन सूचनाओं का सदुपयोग कर सके. चर्चा शुरू करने के लिए यह प्राथमिक आवश्यकता हैं.

सूचनाओं के अभाव में चर्चा परिचर्चा हो ही नहीं सकती. चर्चा को प्रारम्भ करने की अध्यापक की योग्यता से ही प्रायः यह साबित हो जाता हैं कि विचार विमर्श का दौर आगे कैसे बढ़ेगा. जिस विषय पर चर्चा शुरू हो, उसके प्रत्येक मुद्दे पर हर छात्र अपनी क्या प्रतिक्रिया व्यक्त करता है और सभी छात्र उनके बारें में क्या क्या विचार प्रकट करते हैं उन्हें ध्यान में रखते हुए अध्यापक बाद में अपना निर्णय प्रकट करें.

अध्यापक का जो भी निर्णय होगा चाहे वह अवाचिक और संकेतात्मक ही क्यों न हो वह छात्रों की ओर से दिए जाने वाले उत्तरों की प्रकृति और अभिरचना को प्रभावित करने वाला होगा. चर्चा परिचर्चा से ज्ञान तो प्रबल होता ही है साथ ही साथ इससे प्रभावी तौर पर उच्चस्तरीय संज्ञानात्मक योग्यताओं में वृद्धि भी होती हैं. इस विकल्प की अद्वितीयता उसकी सरलता में निहित है किन्तु प्रभाविता उसके प्रिनियामक या नेता की योग्यताओं पर निर्भर करती हैं.

किसी कक्षा के विद्यार्थी विषय अध्यापक के साथ मिलकर चर्चा का आयोजन कर सकते हैं. इस समूह का नेतृत्व विषय अध्यापक के हाथ में ही रहता हैं. विद्यार्थियों के साथ मिलकर चर्चा के संगठन व संचालन की प्रक्रिया निम्न हैं.

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