दहेज प्रथा क्या है कारण दुष्परिणाम रोकने के उपाय व कानून | Dowry System Essay Meaning Causes Effects To Stop Low In India In Hindi

dahej pratha/ Dowry System Essay Meaning Causes Effects To Stop Low In India In Hindi: दहेज वह धन या सम्पति होती है, जो विवाह के अवसर पर वधू पक्ष द्वारा विवाह की आवश्यक शर्त के रूप में वर पक्ष को दी जाती है. इस कुप्रथा ने लड़कियों के विवाह को एक दुष्कर कार्य बना दिया है. निम्न तथा मध्यमवर्गीय परिवार के पिता दहेज के कारण अपनी बेटियों की शादी समय पर नही कर पाते है. यदि कर भी देते है तो इनके लिए उन्हें बड़ी रकम ऋण के रूप में लेनी पड़ती है. भारत में दहेज प्रथा पर पूरी तरह रोक है, मगर आज भी यह धड़ल्ले से चल रही है.

दहेज प्रथा क्या है कारण दुष्परिणाम रोकने के उपाय व कानून (dowry system in hindi)

dowry system in hindi

दहेज प्रथा क्या है और इसका भारत में इतिहास (What is dowry System and its history in India)

प्राचीन समय में वधू के पिता कन्या के साथ कन्यादान के रूप में कुछ धन वर को देता था. जो स्वेच्छा से तथा स्नेह के रूप में प्रदान किया जाता था. उसमें किसी तरह की अनिवार्यता नही होती थी.

धीरे धीरे इस प्रथा ने विकृत रूप धारण कर लिया जिसे दहेज प्रथा का नाम दिया गया. इसमें वधू के पिता को आवश्यक रूप से धन और अन्य सामान वर को प्रदान करना पड़ता है. कई बार वर या वर पक्ष द्वारा विवाह मंडप में ही वधू पक्ष से अनावश्यक धन व महंगी वस्तुओं की मांग कर ली जाती है.

जो वधू पक्ष को आर्थिक कठिनाई में डाल देती है. कई बार तो वधू पक्ष को वर पक्ष की ऐसी अनावश्यक मांग को पूरा करने के लिए अपनी सम्पति तक बेचनी पड़ जाती है. तथा कई बार इस शर्त को पूरा किये बिना विवाह ही नही होता है. वर्तमान में दहेज प्रथा ने विकराल रूप धारण कर लिया है.

दहेज प्रथा के कारण (dowry system cases in india)

  • गरीबी के कारण अपनी आर्थिक स्थति सुधारने की नियत से वर पक्ष वधू पक्ष से इस प्रकार की मांग करता है.
  • 1956 से पहले भारत में हिन्दू उतराधिकारी कानून के पूर्व पुरुषों को उतराधिकार प्राप्त था. इस कारण महिलाओं को हमेशा उन पर आश्रित रहना पड़ता था. इस कारण भी पुरुष वर्ग द्वारा विवाह के अवसर पर दहेज के रूप में धन लेने की प्रवृति को बढ़ावा मिला.
  • अशिक्षा भी दहेज प्रथा का एक मुख्य कारण रहा है. आज जैसे जैसे बालिका शिक्षा को बढ़ावा मिल रहा है, इस प्रथा का उन्मूलन हो रहा है.
  • अपनी झूठी सामाजिक प्रतिष्ठा के कारण भी लोग वधू पक्ष से विवाह के समय दहेज की मांग करते है.
  • महिलाओं का आर्थिक रूप से सक्षम न होना भी दहेज प्रथा का एक मूल कारण है.

भारत में इस कुप्रथा की रोकथाम के लिए बच्चों को शिक्षित किया जाना बेहद जरुरी है. समाज में इस कुरीति के विरुद्ध जागरूकता पैदा की जानी चाहिए तथा जो व्यक्ति दहेज की मांग करे उसका सामाजिक बहिष्कार कर दिया जाना चाहिए. हमारे देश में दहेज प्रथा की रोकथाम के लिए वर्ष 1961 में दहेज निरोधक कानून पारित किया गया. लेकिन इस प्रथा को रोकने में यह प्रभावी नही हो सका है.

दहेज प्रथा के दुष्परिणाम (dowry system effects Essay in hindi)

  • कर्ज का बोझ-दहेज प्रथा गरीब परिवारों के लिए ऋणग्रस्तता का कारण बनती है. गरीब माँ बाप को अपनी लाडली कन्या का विवाह करने के लिए धन जुटाना आवश्यक होता है. चूँकि उनके आर्थिक साधन सिमित होते है, अतः उन्हें मजबूरन इस कार्य के लिए ऋण लेना पड़ता है. जिसकों चुकता कर पाना उनके लिए कठिन कार्य होता है. कई बार इस कार्य के लिए उन्हें अपनी जमीन, जायदाद, आभूषण आदि भी बेचने पड़ते है.
  • महिलाओं पर अत्याचार- जो महिलाएं अपने साथ दहेज के रूप में काफी धन व अन्य सामान नही ला पाती है, उन्हें ससुराल में पति, सास व अन्य परिवारजनों की प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है. कभी कभी वे इन दहेजलोभियों से तंग आकर आत्महत्या तक कर लेती है. तो कभी ससुराल वालों द्वारा जलाकर या अन्य प्रकार से मार दी जाती है. अतः दहेज प्रथा के कारण कन्या का जीवन नरक बन जाता है.
  • समाज में कन्या भ्रूण हत्या व कन्या वध को बढ़ावा- दहेज की इस प्रथा के कारण लड़कियां माँ बाप पर बोझ मानी जाती है. अतः समाज भी युवतियों को हेय दृष्टि से देखता है. लड़की के जन्म पर कोई खुशी नही मनाई जाती है. बल्कि समाज के कई वर्गों में तो पैदा होने से पूर्व ही मार दिया जाता है. या उन्हें पैदा होते ही गला घोटकर मार दिया जाता है.
  • बेमेल विवाह को प्रोत्साहन- गरीब परिवारों में युवतियों को दहेज की व्यवस्था करने में विफल हो जाने पर कई बार अनमेल विवाह जैसे शारीरिक रूप से अक्षम या अधिक उम्रः के व्यक्ति के साथ विवाह कर दिया जाता है.

दहेज प्रथा रोकने के उपाय व कानून (To Stop Low Act Dowry System In India In Hindi)

  • दहेज निरोधक कानून 1961 (dowry prohibition act 1961 in hindi)

इस प्रथा को समाप्त करने के उद्देश्य से वर्ष 1961 में इस कानून को पारित किया गया. यह अधिनियम 20 मई 1961 से लागू हुआ. 1984 में इसमें संशोधन हुआ तथा 1986 में इसे पुनः संशोधित किया गया, ताकि यह कानून और अधिक शक्तिशाली बन सके.

अब इस कानून के तहत न्यायालय अपने ज्ञान के आधार पर किसी भी मान्यता प्राप्त कल्याण संस्था की शिकायत पर कार्यवाही कर सकता है. इन अपराधों की ठीक प्रकार से जांच करने के लिए इसे गैर जमानती अपराध की श्रेणी में रखा गया है.

इस अधिनियम के तहत दहेज लेने या देने के लिए प्रेरित करने वाले व्यक्ति को कम से कम 5 वर्ष तक का कारावास या न्यूनतम 15000 रूपये या दहेज की रकम जो भी अधिक हो, का आर्थिक दंड या दोनों सजाएं न्यायालय द्वारा दी जा सकती है.

  • दहेज कानून इंडियन पैनल कोड (dowry case punishment rules law in india)

भारतीय कानून संहिता (ipc) में एक नया अनुच्छेद 304B हाल ही के वर्षों में जोड़ा गया है. जिसके अनुसार यदि लड़की की मृत्यु विवाह के 7 वर्ष के अंदर असामान्य परिस्थितियों में हुई हो तो, इसमें पति या उसके परिवार वालों को प्रमाण प्रत्र देने का उत्तरदायी ठहराया गया है.

तथा यदि के दहेज हत्या के दोषी है तो यह कानून उन्हें 7 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक का प्रावधान करता है. अधिनियम में दहेज निषेध अधिकारी की नियुक्ति का भी प्रावधान किया गया है. दहेज के मामलों को प्रभावशाली ढंग से निपटाने के लिए दहेज विरोधी प्रकोष्ठ की स्थापना की गई है.

IPC की धारा 498 A भी पत्नी को उसके पति या ससुराल वालों की ओर से दहेज हेतु प्रताड़ित करने पर दोषियों को तीन वर्ष तक की सजा का प्रावधान करती है.

  • महिलाओं का घरेलू हिंसा संरक्षण अधिनियम (Protection Of Women From Domestic Violence Act 2005)

भारतीय संसद द्वारा महिलाओं को घरेलू उत्पीड़न व अपराधों से बचाने के लिए जिनमें दहेज के लिए तंग करना भी शामिल है. यह अधिनियम पारित किया गया था. इस अधिनियम के तहत महिलाओं के विरुद्ध घरेलू हिंसा के विरुद्ध दीवानी न्याय (civil remedy) उपलब्ध करवाने का प्रावधान है.

इस अधिनियम के तहत न्यायालय को पीड़ित महिला को न्यायिक सुरक्षा प्रदान करने व दोषी पक्षकार को मौद्रिक परितोष (Monetary gratification) प्रदान करने का अधिकार भी दिया गया है.

दहेज प्रथा रोकने के उपाय

जैसे जैसे समाज में शिक्षा का स्तर बढ़ेगा, वैसे वैसे दहेज प्रथा, बाल विवाह आदि कुप्रथाएँ समाप्त होती जाएगी. अब लड़कियां भी शिक्षित होकर अपने पैरों पर खड़ी होने लगी है. अतः शिक्षित परिवारों में दहेज की पूर्व जिसु अनिवार्यता काफी हद तक कम होने लगी है.

साथ ही समाज में अन्तर्रजातीय विवाह को बढ़ावा देकर भी इस प्रथा को कम किया जा सकता है.

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