Dussehra In Hindi | दशहरा पर छोटा निबंध कब क्यों और इसका महत्व

Dussehra In Hindi दशहरा हिन्दुओं का मुख्य पर्व है जो आश्विन महीने के नवरात्र के बाद शुक्ल दशमी पर मनाया जाता है. इसे दुर्गा पूजा और विजयादशमी के नाम से भी जाना जाता है.

असत्य पर सत्य की, बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में दशहरा के दिन ही भगवान श्रीराम ने अत्याचारी रावण का वध किया था. भारतवर्ष में दशहरा के अवसर पर गाँव गाँव व शहर शहर में रावण के पुतले जलाएं जाते है.

मैसूर का दशहरा, गुजरात का डांडिया नृत्य व पश्चिम बंगाल की दुर्गा पूजा दशहरा पर आकर्षण का केंद्र होते है. दशहरा (विजय/विजयादशमी) एक धार्मिक पर्व है जिनमे धर्म, आस्था और उत्साह का अनोखा संगम देखने को मिलता है.

नव नवरात्र के बाद दसवे दिन व् दीपावली से 20 दिन पूर्व दशहरा अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार सितम्बर अथवा अक्टूबर माह में पड़ता है.

Dussehra In Hindi (दशहरा पर छोटा निबंध )

दशहरा कब मनाया जाता है-इस साल 2017 में विजयादशमी यानि दशहरे का त्यौहार 30 सितम्बर को मनाया जाना है. बुराई पर अच्छी की जीत के संकेत के रूप में दशहरा के ठीक 20 दिन बाद 19 नवम्बर को दीपावली का त्यौहार है.

आश्विन शुक्ल की एकम से माँ दुर्गा जिन्हें शक्ति की अधिष्ठात्री देवी मानी जाती है. कि पूजा आराधना आरम्भ हो जाती है. भक्त दुर्गा को खुश करने के लिए नवरात्र में उपवास रखते है.

कुल्लू तथा मैसूर का दशहरा पर्व दुनियाभर में जाना जाता है. धार्मिक कथाओं के अनुसार आश्विन दशमी के दिन ही राम जी दैत्य रावण का वध किया था.

दशहरा मनाने का कारण-दशहरा मनाने के पीछे कई कारण जुड़े हुए है. हिन्दू धर्म में प्रचलित पौराणिक कथाओं के मुताबिक आश्विन प्रतिपदा से भगवान् राम और राम का युद्ध आरम्भ हुआ था. जो दस दिन तक चला था.

दस दिन की अवधि तक चले इस युद्ध में रावण को मारने के लिए रामजी ने नौ दिन तक शक्ति की देवी माँ दुर्गा की पूजा की. फलस्वरूप दसवे दिन रावण को युद्ध के मैदान में मार डाला. तथा माता सीता को लेकर अयोध्या के लिए रवाना हुए.

इस विजय दिवस को हर साल विजयादशमी अथवा दशहरा के रूप में मनाकर रावण का दहन किया जाता है. दूसरी तरफ वर्षा ऋतू की समाप्ति के इस समय फसले पककर तैयार हो जाती है. तथा शरद ऋतू की शुरुआत के रूप में किसान इसे पर्व के रूप में मनाते है.

दशहरा मनाने का तरीका-विजयादशमी में देश भर के हर छोटे बड़े शहर में रावण का पुतला बनाकर जलाया जाता है. कई स्थानों पर दशहरे मेले भी लगते है, जिनमे कोटा का मेला विश्वप्रसिद्ध है. जिसे देखने लोग देश विदेश से आते है.

दशहरे के इस दस दिवसीय पर्व को आश्विन माह की पहली तारीख से रामलीलाओं का दौर शुरू होता है. जिनमें श्रीराम और सीता के जीवन पर आधारित कथा प्रस्तुती दी जाती है.  मुख्यत राजपूत जाति के लोग इस दिन अपने अस्त्र-शस्त्रों की पूजा भी करते है.

शमी वृक्ष की पूजा के साथ ही श्रीराम जी की झांकी भी निकाली जाती है. बैंड बाजे सहित लोग श्रद्धा भाव से इस जुलुस में भाग लेते है.

दशहरे का मेला– हर गाँव शहर में दशहरे का मेला लगता है. जहाँ लोग दोपहर से बड़ी संख्या में एकत्रित होने आरम्भ हो जाते है. इस दिन बाजार खिलोनों, तस्वीरों तथा नए वस्त्रो व् मिठाइयो से अट्टे पड़े रहते है.

शाम शुरू होने से पूर्व तक रावण, कुम्भकर्ण और मेघनाथ के विशालकाय पुतले तैयार किये जाते है.

शहर कस्बे के सभी लोग पुरुषोतम श्रीराम के जयकारो के साथ इन पुतलों को जलाते है. भग्वान राम की आरती पूजा के इस इस दशहरे पर्व के मेले का आयोजन प्रसादी के साथ समाप्त किया जाता है.

दशहरे का महत्व-भारतीय जनमानस में त्यौहार और पर्व उत्साह और प्रेम का संचार करते है. जिनमे दशहरा मुख्य है.असत्य पर सत्य, अन्याय पर न्याय का यह पर्व प्रतीक है. जो समाज में व्याप्त बुराइयों को मिटाने का संदेश देता है.

इस प्रकार के धार्मिक त्यौहार आमजन में जोश और ख़ुशी का संचार करते है. लोग इस अवसर को मंगलकारी मानते है.

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