दशहरा क्यों मनाया जाता है | Paragraph On Dussehra In Hindi

Paragraph On Dussehra In Hindi दशहरा हिंदुओ का मुख्य त्यौहार है, दशहरा कब और क्यों मनाया जाता है. दशहरा के बारे में- सभी हिन्दू पर्वो में दशहरे का महत्वपूर्ण स्थान है. कोटा का दशहरा देशभर में प्रसिद्ध है इस दिन बंगाल में विशेष दुर्गापूजा का आयोजन भी किया जाता है.

दशहरा क्यों मनाया जाता है (Paragraph On Dussehra In Hindi)

हिंदी पंचाग के अनुसार यह विजय पर्व अश्विन महीने की दशवी तिथि को यानि शारदीय नवरात्र की समाप्ति पर मनाया जाता है. बुराई पर अच्छाई, असत्य पर सत्य के विजय पर्व दशहरा को विजयादशमी भी कहा जाता है. जिन्हें वर्ष 2017 में 30 सितम्बर के दिन मनाया जाना है. इसे मनाने का स्थान विशेष पर अलग अलग तरीके है. भारत के अतिरिक्त दशहरे को श्रीलंका और बांग्लादेश व अन्य देशों में रहने वाले धर्म के अनुयायी मनाते है.

Why Dusshera is celebrated इसे मनाने की मूल कथा भगवान् श्रीराम से जुड़ी हुई है., 14 वर्ष के वनवास में रावण द्वारा सीता का हरण कर लिया गया था. सीता को छुडाने व् अधर्मी का नाश करने के लिए राम जी ने रावण के साथ कई दिनों तक युद्ध किया.

शारदीय नवरात्रों के दिनों भगवान राम ने शक्ति की देवी दुर्गा की अराधना लगातार नौ दिनों तक की. दुर्गा के सहयोग से राम ने युद्ध के दसवें दिन रावण का वध कर उनके अत्याचारों से मानव जाती को बचाया. इसी परम्परा को मानते हुए हम हर साल रावण, मेघनाथ और कुम्भकर्ण को बुराई का प्रतीक मानकर इनके पुतले दशहरे के दिन मनाते है.

हंसी ख़ुशी के इस पर्व पर शारदीय नवरात्र की स्थापना पर कलश और मूर्ति स्थापना का विसर्जन भी इसी दिन किया जाता है. वैसे दशहरा एक प्रतीक पर्व है दशहरे के पुतले को बुराई और समस्त प्रकार की अमानवीय प्रवृति का प्रतीक मानकर जलाया जाता है. ताकि हमारा समाज इस प्रकार की बुराइयों विक्रतियो से मुक्त हो सके. मगर आज दशहरा एक तमाचा मात्र बनकर रह गया है.

कहने भर को बुराई पर अच्छाई का दशहरा मनाने या रावण का दहन करने भर से समाज से बुराइयों का नाश नही होने वाला है. इस दिन हम सभी को अपना विश्लेष्ण करते हुए बुरी आदतों और विचार को त्यागने का संकल्प करना होगा. तभी सच्चे अर्थो में दशहरा मनाने का महत्व सार्थक सिद्ध होगा.

अश्विन की दसवी तिथि को दस सिर के रावण को सच में जलाना है तो काम, क्रोध, लोभ, मोह मद, मत्सर, अहंकार, आलस्य, हिंसा और चोरी इन दस बुरी प्रवार्तियो और आदतों का सर्वप्रथम हमे त्याग करना होगा.

मुख्य रूप से क्षत्रिय वर्ग दशहरा के दिन अपने अस्त्र शस्त्रों की पूजा अर्चना करते है. नवरात्रों के दौरान रामायण की कथा का वाचन होता है. जिसमे योग्य कलाकार राम, रावण, सीता, लक्ष्मण आदि रूप धारण कर मंचन करते है. दशहरे के दिन लकड़ी और काग़ज जिनमे फटाखो से भरे रावण, मेघनाथ और कुम्भकर्ण के पुतलों को तीर से मारकर जलाया जाता है. कुछ मिनटों तक यह पुतला धू-धू कर जलता हुआ पटाखों की गूंज के साथ धरा पर गिर पड़ता है. लोग जय सिया राम के जयकारे करते हुए एक दुसरे को मिठाई से मुह मीठा करवाकर दशहरे की बधाई देते है.

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