दशहरा या विजयादशमी कथा पूजा विधि महत्व डेट निबंध | dussehra vrat katha Puja Vidhi importance Dates In India In Hindi

दशहरा या विजयादशमी कथा पूजा विधि महत्व डेट निबंध | dussehra vrat katha Puja Vidhi importance Dates In India In Hindi

विजयादशमी यानी दशहरा फेस्टिवल इस साल 18 अक्टूबर 2018, गुरुवार को को भारत में मनाया जाएगा। यह पर्व आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी को मनाया जाता हैं। भगवान् राम ने इसी दिन लंका पर चढ़ाई करके विजय प्राप्त की थी। ज्योतिर्निबन्ध में लिखा हैं कि आश्विन शुक्ल दशमी को तारा उदय होने के समय विजय नामक मुहूर्त होता हैं। दशहरा का यह मुहूर्त सभी कार्यों को सिद्ध करने वाला होता हैं। विजयादशमी या दशहरा हमारा राष्ट्रीय पर्व हैं। मुख्य रूप से यह क्षत्रियों का त्यौहार है। दशमी के दिन रामचन्द्रजी की सवारी बड़ी सजधज के साथ निकाली जाती हैं और रावण वध लीला का प्रदर्शन होता हैं, दशहरे के दिन नीलकंठ का दर्शन शुभ माना जाता हैं। इस आर्टिकल में दशहरा की कथा, dussehra essay,dussehra wikipedia, dussehra holidays 2018, importance of dussehra, dussehra 2018, dussehra meaning, dussehra information की जानकारी प्रदर्शित की गई हैं।दशहरा या विजयादशमी कथा पूजा विधि महत्व डेट निबंध | dussehra vrat katha Puja Vidhi importance Dates In India In Hindi

शहरा कब मनाया जाता हैं? (Dussehra 2018 Date) :

जैसा कि ऊपर विदित है, यह विजय पर्व आश्विन (आसोज) महीने की शुक्ल दशमी को दशहरा मनाया जाता हैं । शारदीय नवरात्र (आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से नवमी) के अगले दिन विजया दशमी एव इसके ठीक 20 दिन बाद हिंदुओं का सबसे बड़ा पर्व दीपावली आता हैं । वर्ष 2018 मे दशहरा का फेस्टिवल 18 अक्टूबर 2018, गुरुवार को मनाया जाएगा। इसके पूजा समय मुहूर्त समय की जानकारी नीचे दी गई हैं ।

Vijayadashami Puja Time

  • विजय मुहूर्त का समय- 13:58 बजे से 14:43 बजे तक
  • कुल अवधि- 45 मिनट
  • अपरहना पूजा मुहूर्त- 13:13 से 15:28 बजे तक
  • कुल अवधि- 2 घंटा 15 मिनट
  • विजयादशमी तिथि की शुरुआत- 15:28 बजे (18 अक्टूबर 2018)
  • दशमी तिथि की समाप्ति- 17:57 बजे 19 अक्टूबर 2018

दशहरा या विजयादशमी कथा (dussehra vrat katha kahani Story In Hindi Language) :

एक बार पार्वती ने पूछा कि लोगों मे दशहरा का त्योहार प्रचलित हैं, इसका क्या फल हैं? शिवजी ने बताया आश्विन शुक्ल दशमी को सांयकाल मे तारा उदय के समय विजय नामक काल होता हैं जो सब इच्छाओं को पूर्ण करने वाला होता हैं । शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने वाले राजा को इसी समय प्रस्थान करना चाहिए । इस दिन यदि श्रवण नक्षत्र का योग हैं तो और भी शुभ हैं ।

मर्यादा पुरुषोतम भगवान श्री राम ने इसी विजयकाल मे लंका पर चढ़ाई की थी । इसलिए यह दिन बहुत ही पवित्र माना गया हैं। और क्षत्रिय लोग इसे अपना प्रमुख त्योहार मानते हैं। शत्रु से युद्ध करने का प्रसंग न होने पर भी इस काल मे राजाओं को अपनी सीमा का उल्लघन अवश्य करना चाहिए। अपने तमाम दल बल को सुसज्जित करके पूर्व दिशा मे जाकर शमी वृक्ष की पूजा करनी चाहिए। शमी के सामने खड़ा होकर इस प्रकार ध्यान करे- हे शमी तू सब पापों को नष्ट करने वाला हैं और शत्रुओं को भी पराजय देने वाला हैं, तूने अर्जुन का धनुष धारण किया और रामचंद्र जी से प्रियवाणी काही।

पार्वती जी बोली- शमी पेड़ ने कब और किस कारण अर्जुन का धनुष धारण किया था तथा रामचन्द्र जी ने कब और कैसी प्रियवाणी कही थी, सो क्रपा कर समझाइए ।

शिवजी ने उत्तर दिया- दुर्योधन ने पांडवों को जुए मे हराकर इस शर्त पर वनवास दिया था कि वे बारह वर्ष तक प्रकट रूप से वन मे जहाँ चाहे फिरे, मगर एक वर्ष बिलकुल अज्ञात मे रहे। यदि इस वर्ष में उन्हे कोई पहचान लेगा तो उन्हें बारह वर्ष और भी वनवास भोगना पड़ेगा। इस अज्ञातवास के समय अर्जुन अपना धनुष बाण एक शमी वृक्ष पर रखकर राजा विराट के यहाँ व्रहन्नला के वेश मे रह रहे थे।

विराट के पुत्र कुमार ने गौओं कि रक्षा के लिए अर्जुन को अपने साथ लिया और अर्जुन ने शमी के व्रक्ष पर से अपना हथियार उठाकर शत्रुओं पर विजय प्राप्त कि। शमी व्रक्ष ने अर्जुन के हथियारों की रक्षा की थी। विजयादशमी के दिन रामचन्द्र जी ने लंका पर चढ़ाई करने के लिए प्रस्थान करने के समय शमी व्रक्ष ने कहा था कि आपकी विजय होगी। इसीलिए विजय मुहूर्त मे शमी वृक्ष कि भी पूजा होती हैं।

एक बार युधिष्टर के पुछने पर श्री क्रष्ण जी ने उन्हे बतलाया था हे राजन विजयादशमी के दिन राजा को स्वय अलंकरत होकर अपने दासों और हाथी घोड़ों का श्रंगार करना चाहिए तथा गाजे बाजे के साथ मंगलाचार करना चाहिए। उसे उस दिन पुरोहित को साथ लेकर पूर्व दिशा में प्रस्थान करके अपनी सीमा के बाहर जाना चाहिए और वहाँ वास्तु पूजा केएआरकेई अष्टदिगपालों तथा पार्थ देवता की वैदिक मंत्रों से पूजा करनी चाहिए। शत्रु की मूर्ति अथवा पुतला बनाकर उसकी छाती में बाण लगाए और पुरोहित वेद मंत्रों का उच्चारण करे।

ब्राह्मणों की पूजा करके हाथी, घोड़ा, अस्त्र, शस्त्र का निरीक्षण करना चाहिए। यह सब क्रिया सीमांत में करके अपने महल को लौट आना चाहिए। जो राजा इस विधि से विजयादशमी या दशहरा करता हैं वह सदा अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त करता हैं।

दशहरा या विजयादशमी महत्व  ( Dussehra / Vijayadashami Mahatv importance In Hindi)

बुराई पर अच्छाई की, असत्य पर सत्य की, अंधकार पर प्रकाश की विजय के रूप में मनाया जाने वाला दशहरा एक सांकेतिक हिन्दू विजय पर्व हैं। प्राचीन समय में विजयादशमी का पर्व मात्र क्षत्रिय वर्ग तक सीमित था। आज उन वर्ण व्यवस्था के दायरे से बाहर निकलकर दशहरा सभी वर्ग, संप्रदाय के लोगों द्वारा मनाया जाता हैं। भारत के आधिकारिक त्योहार व पर्वों में भी विजयादशमी को प्रमुखता से गिना जाता हैं। किसान, मजदूर, अभिनेता, सैनिक, राजनेता सभी व्यवसाय के लोगों द्वारा हर साल नवरात्र के बाद इस खुशी के पर्व को मनाकर समाज, मन से बुराइयों को समाप्त करने की परंपरा का पालन किया जाता हैं।

दशहरा पूजन विधि, Dussehra Puja Vidhi in Hindi

विजयादशमी या दशहरा के दिन किसी नए कार्य अथवा व्यापार की शुरुआत की जा सकती हैं। यदि आप कोई आभूषण अथवा कीमती सामग्री खरीदना चाहते हैं तो दशमी का यह अच्छा अवसर हैं। विजया दशमी 2018 पर ऐसे करें पूजन-

– पूजन कर्ता को सवेरे जल्दी उठकर अपने नित्य कर्मों से निव्रत होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए।
– परिवार के जीतने भी सदस्य इस पूजा हवन मे शामिल होना चाहते है उन्हे नहा धोकर स्वच्छ वस्त्र पहनने चाहिए।
– गाय के गोबर के दस कंडे बनाकर उन पर दही का लेपन करे।
– नवरात्रि कि स्थापना के समय जो जौ उगाए गए हैं उन्हे इन कंडो पर रखे।
– भगवान राम की प्रतिमा पर इन जौ को चढ़ाएँ।
– कई स्थानों पर इन्हें परिवारजनों के कान तथा सिर पर आशीर्वाद स्वरूप भी रखा जाता हैं।
– इस दिन शमी व्रक्ष की पूजा करनी चाहिए तथा शाम को रावण मेघनाद तथा कुंभकर्ण के दहन मे सम्मिलित होना चाहिए।

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