अंतःस्रावी ग्रंथियां एवं हार्मोन्स | endocrine glands in hindi

अंतःस्रावी ग्रंथियां एवं हार्मोन्स | endocrine glands in hindi- अंतःस्रावी ग्रंथियों के स्राव को हार्मोन कहते हैं। यकृत हमारे शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि हैं । हमारे शरीर मे निम्नलिखित मुख्य अंतः स्रावी ग्रंथिया हैं।

मुख्य अंतःस्रावी ग्रंथियां और उनसे स्रावित हार्मोन

【थायराइड या अवटु ग्रंथि】>यह सबसे बड़ी अंतः स्रावी ग्रंथि हैं। यह गले मे स्थित होती हैं। जो H या तितली के आकार की लाल ग्रंथि होती हैं। इस ग्रंथि से स्रावित हार्मोन थायरोक्सिन होता हैं। यह हार्मोन हमारे शरीर मे उपापचय (metabolism) दर पर नियंत्रण रखता हैं।

इस हार्मोन की कमी से शरीर मे आयोडीन की मात्रा में कमी हो जाती हैं जिससे गलगंड या घेंघा नामक रोग हो जाता हैं।

यह रोग पर्वतियों प्रदेशों में अधिक होता हैं। थायरोक्सिन हार्मोन की अधिकता से उपापचय की दर अधिक तथा हृदय की धड़कन की दर बढ़ जाती है । तथा शरीर का भार भी कम होने लगता है । इसकी अधिकता से ऑस्टियोपोरोसिस रोग हो जाता हैं।

एड्रिनल ग्रंथि 【Adrenal Gland】-ये ग्रंथियां एक जोड़ी होती हैं। जो प्रत्येक वृक्क के ऊपर स्थित होती हैं। प्रत्येक ग्रंथि कार्टिंन एवं एड्रीनलीन हार्मोन स्रावित करती हैं।

कार्टिन हार्मोन भोजन के कुछ तत्वों में ऑक्सीकरण में सहायता करता हैं। तथा शरीर मे जल एवं लवण का संतुलन बनाए रखता हैं। इस हार्मोन की अधिकता से जनन ग्रंथियां प्रभावित होती हैं। जिससे लिंग परिवर्तन भी हो सकता हैं। महिलाओं में कार्टिन हार्मोन की अधिकता से पुरुषों जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।

एड्रीनलीन हार्मोन हमारे शरीर मे रुधिर दाब व हृदय की धड़कन को नियंत्रित करता हैं। दौड़ के अंतिम क्षणों में सम्पूर्ण शक्ति का प्रयोग इसी हार्मोन के कारण होता हैं। इसे संकट या आपातकालीन हार्मोन भी कहते हैं। यह भय क्रोध तनाव आदि होने पर अधिक स्रावित होने लगता हैं।

पैराथायराइड ग्रंथि- यह ग्रंथि गले मे थायराइड ग्रंथि के पृष्ठ तल में स्थित होती हैं। इससे स्रावित हार्मोन कैल्शियम एवं फास्फोरस का नियंत्रण करता हैं। इस हार्मोन की कमी से पेशियों में ऐंठन होने लगती हैं। एवं अधिकता से ऑस्टियोपोरोसिस रोग हो जाता हैं।

पीयूष ग्रंथि 【Pitutary Gland】- इसे मास्टर ग्रंथि का नाम दिया गया हैं। क्योंकि यह सभी ग्रंथियों का नियंत्रण करती हैं। यह ग्रंथि प्रमस्तिष्क के नीचे स्थित होती हैं। एवं मटर के दानों के जितनी बड़ी होती हैं। यह शरीर की सबसे छोटी अंतःस्रावी ग्रंथि हैं।

पीयूष ग्रंथि अनेक हार्मोन स्रावित करती हैं। जिन्हें सामूहिक रूप से पिट्यूटेराइन हार्मोन कहते हैं। यह हार्मोन शरीर मे वृद्धि व अन्य ग्रंथियों को उद्दीपत करने का कार्य करता हैं। इस हार्मोन की कमी से बौनापन आ जाता हैं। तथा अधिकता के कारण शरीर अधिक दैत्याकार हो जाता हैं।

हाइपोथेलेमस ग्रंथि- यह पीयूष ग्रंथि के पास स्थित होती हैं। इसके हार्मोन पीयूष ग्रंथि को नियंत्रित करते है।

अग्नाशय- अग्नाशय की लैंगरहैन्स द्वीप कोशिकाओं से इंसुलिन हार्मोन स्रावित होता हैं। जो रुधिर में शर्करा की मात्रा को नियंत्रित करते हैं। इंसुलिन की कमी से मधुमेह रोग हो जाता हैं।

थाइमस ग्रंथि- यह हृदय के ऊपर व वक्ष की अस्थियों के नीचे स्थित होती हैं। यह 8 से 10 वर्ष की आयु तक ही रहती हैं। उसके बाद यह समाप्त हो जाती हैं। यह थाइमोसिन हार्मोन स्रावित करती हैं। इसकी कम सक्रियता से बालक के जनन तन्त्र अल्प विकसित राह जाते हैं। इसकी अति सक्रियता से टॉन्सिलाइटिस नामक रोग हो जाता हैं।

पिनिपल ग्रंथि- यह मस्तिष्क में स्थित होती हैं।

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