Essay On Diwali In Hindi | दीपावली पर निबंध

Essay On Diwali In Hindi जिन्हें दीपों का त्यौहार (दीपोत्सव) भी कहा जाता है. दिवाली को हिंदुओ का महत्वपूर्व त्यौहार मनाया जाता है. आज के इस लेख में आपके लिए 600 शब्दों में दीपावली पर निबंध प्रस्तुत करवा रहे है. इस Diwali Short Essay का उपयोग आप बच्चों के दीपावली भाषण के रूप में इसे उपयोग कर सकते है.

Essay On Diwali In Hindi/दीपावली पर निबंध

प्रस्तावना- हमारे देश में वर्ष भर अनेक पर्व और त्योहार मनाए जाते है. दीपावली भारतीय संस्कृति और धर्म की द्रष्टि से यह मनाया जाता है. दीपों के इस त्यौहार को देश भर के सभी लोग बड़े हर्ष और उल्लाश के दिन मनाया जाता है. इस पर्व से कुछ दिन पूर्व तक सरकार द्वारा दीपावली का राजकीय अवकाश घोषित कर दिया जाता है. जिससे लोग इसकी तैयारियों में जुट जाते है.

मनाने का समय-दीपावली का त्यौहार कार्तिक मास में मनाया जाता है. धनतेरस से भाईदूज तक यह त्यौहार मनाया जाता है. अमावस्या की रात को लक्ष्मी पूजन के साथ दीपावली का पर्व मनाया जाता है. इस दिन लोग अपने घरों में दीपों व् दीपमालाओ की कतारे लगाकर घर को पूर्ण रूप से सजाते है.

मनाने का कारण-दीपावली का त्यौहार क्यों मनाया जाता है. इस सवाल का उत्तर अलग-अलग तरीकों से दिया जाता है. हिन्दू धर्मावलम्बी इस दिन को भगवान राम से जोड़कर मनाते है. कहते है दिवाली के दिन ही श्रीराम जी रावण को मारकर पिता दशरथ जी द्वारा दिए गये 14 वर्ष के वनवास को पूर्ण कर अयोध्या लौटे थे.

वनवास पूर्ण पर जब वे अयोध्या लौटे तो लोगों ने घी के दिए जलाकर उनका स्वागत किया. इससे दिवाली मनाने की शुरुआत मानी जाती है. एक अन्य कथा के अनुसार इस त्यौहार को मनाने के पीछे भगवान श्री कृष्ण द्वारा नरकासुर के वध की कथा को भी मानते है.

जैन धर्म को मानने वाले इस दिन भगवान् महावीर से जुड़ा प्रंसग इसके पीछे बताते है. तो कुछ लोग इन्हे हनुमान जयंती मानते है, चाहे मनाने के पीछे जो भी सर्वमान्य कारण हो हर्ष और उल्लास से मनाए जाने वाले त्यौहार में दीपावली का हमारे त्योहारों में महत्वपूर्ण स्थान है.

दीपावली पर कविता (Poem on diwali)

दीपशिखाओ तुम जलने का
थोड़ा सा उन्माद जगाओ
स्वयं के तन को स्वाहा कर
उज्जवल सा आह्लाद जगाओ.

शेष उजास अवशेष उजास हो
निशा के आचल में प्रकाश हो
दिवस दीप का ऋणी हो जाए
अमावस्या में दीप्त आकाश हो

दीप दीपिका की अंजुरी में
अँधेरी रात का तर्पण हो
रोम-रोम पुलकित हो सबका
ह्रद्य ह्रद्य भी अर्पण हो

गोधुली वेला तिलक लगाकर
रजनी का अभिवंदन कर दो
दिनकर अपने नयन झुकाकर
इस त्यौहार का वन्दन कर दो

इस अंधियारी पगडंडी पर
पग-पग पर कोई शूल लगा हो
दीप प्रदीप से प्रदीप्त पद पर
चलकर तुम भी भाग्य जगाओ

कलियुग में कोई रामावतार हो
सबरी के जो झूठे बेर खाए
न्याय प्रत्यचा को खीचकर
रावण पर जो तीर चलाएं

हर दीपावली हर दशहरा
हर कोई विशवास जगाओ
ह्रद्य का रावण जल जाए
पुतले को अब आग लगाओ

मनाने की विधि-दीपावली का त्यौहार वर्षा ऋतू की समाप्ति पर मनाया जाता है. इस त्यौहार को मनाने से पहले सभी व्यक्ति अपने अपने घर मकानों व दुकानों की सफाई करते है. तथा इन्हे अच्छे तरीके से सजाते है. घरों में बच्चे बूढ़े व् जवान यथाशक्ति सभी लोग नए कपड़े धारण करते है.

इस त्यौहार से कुछ दिन पूर्व से ही पटाखों की गुज शुरू हो जाती है. दीपावली की रात पटाखों की गुज, आतिशबाजी व शौर शराबा आम तौर पर देखा जाता है. दीपावली के दिन सभी लोग सांयकाल से ही अपने घरों में दीपक जलाकर रोशन करते है. शहरों में लोग अपने घरों को बिजली के बल्बों, गुब्बारों व रंग बिरंगी लाइट्स से अपने-अपने घर को सजाते है.

दीपावली के एक दिन पूर्व धनतेरस पर गहने आभूषण व् बर्तन खरीद्ना गृहणिया शुभ मानती है. अगले दिन शाम को मुहूर्त पर माँ लक्ष्मी का पूजन घर-घर किया जाता है. दिवाली के दुसरे दिन गोवर्धन पूजा और भाई दूज का पर्व मनाया जाता है. इस दिन बहिने अपने भाई के ललाट पर तिलक लगाती है. इस तरह दीपावली का पर्व धनतेरस से लेकर भाई दूज तक चार दिनों में धूम धाम से मनाया जाता है.

उपसंहार-हिंदुओ के सभी त्योहारों में दीपावली का महत्वपूर्ण स्थान है. जो उत्साह का पर्व होने के साथ साथ लोगों में मंगल कामना की भावना को प्र्जल्वित करता है. इस दिन माँ लक्ष्मी का पूजन कर सबकी उन्नति और सम्रद्धि की मंगलकामना की जाती है.

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