भारत एक उभरती हुई शक्ति पर निबंध | Essay on Emergence of India as a Super Power in Hindi

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आज के समय में सारे संसार के अर्थशास्त्री भारत को एक उभरती हुई शक्ति तथा अर्थव्यवस्था मान रहे हैं. सैकड़ों वर्षों की गुलामी के तत्पश्चात अपने आर्थिक ढाँचे में मूलभूत सुधार कर विकसित देशों को टक्कर देते हुए एक महाशक्ति के रूप में उदय भारत की यह राह आसान नही थी.

भारत ने आजादी के पश्चात विभिन्न क्षेत्रों में अलग अलग नीतियाँ अपनाई चाहे वो राष्ट्रीकरण की हो, हरित क्रांति, उदारीकरण एवं निजीकरण के विषय हो या शीत युद्ध काल में गुटनिरपेक्षता के रूप में विश्व शांति व राष्ट्र प्रगति के विषय में स्वयं को केन्द्रित करने की चाह ने आज भारत को एक तेजी से उभरती हुई सुपरपॉवर के रूप में खड़ा किया हैं.

भले ही भारत ने अंतर्राष्ट्रीय महत्व के निर्णयों को देरी से उठाया हो, मगर सोच समझकर उठाए गये इन कदमों की बदौलत ही आज भारत जैसे देश जिनकी जनसंख्या विश्व की दूसरी बड़ी आबादी के विकास के साथ साथ इसे एक समस्या न समझकर विकास का हथियार बनाकर, अधिक उत्पादन तथा कम लागत व मजदूरी की निति के चलते विकास के नए आयामों को स्थापित करने में सफलता अर्जित की हैं.

आज से तक़रीबन 30 साल पहले तक भारत को सुरक्षा, तकनीक तथा कई अन्य विषयों पर विदेशी सहायता तथा आयात के लिए हाथ फैलाना पड़ता था. मगर इसी समय के दौरान भारत ने इसी समय पिछड़े व विकासशील देशों के नेता व सच्चे हितेषी व परामर्शदाता की भूमिका का निर्वहन किया था. इसी के चलते भारत को इन देशों ने अपना प्रतिद्वंदी न समझते हुए परम मित्र के रूप में समझा.

ब्राजील जैसे राष्ट्र एक दशक में विकास की दृष्टि से भारत से कहीं आगे थे. मगर 1992 में उदारीकरण एवं निजीकरण की निति ने वैश्विक नजारा बदल कर रखा दिया, अब तक भारत को जनसंख्या के बोझ से दबा व पीछा देश माना जाता था. इन्ही नीतियों के सकारात्मक परिणामों की बदौलत भारत अब एक उभरती हुई शक्ति के रूप में उभर रहा हैं.

अब चीन ही भारत का प्रतिद्वंदी नजर आता हैं. भविष्य में भारत को विकास, तकनीक, सुरक्षा जैसे अहम विषयों पर चीनियों से मुकाबला होना संभावित हैं. इसके अतिरिक्त संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद में भारत के स्थायी सदस्य के रूप में देखा जा रहा हैं. भारत ने उदारीकरण यानि वर्ल्ड के लिए ओपन डोर की निति ९० के दशक में अपनाई थी, चीन ने भारत से ठीक एक दशक पूर्व इसे अपनाया था, जिसका लाभ उन्हें मिला.

आज के समय में जापान, फ़्रांस, रूस तथा सुपर पॉवर अमेरिका जैसे देश भी चीन में निवेश करने से पूर्व हजारों बार सोचते हैं, चीनी बाजार की अनिश्चिंतता तथा श्रम व लागत में वृद्धि के चलते भविष्य में चीनी बाजार अर्थव्यवस्था के लिए खतरा उत्पन्न कर सकते हैं. वही आज भारत को विश्व के अधिकांश देश व कम्पनियां एक बड़े बाजार के रूप में देख रहे हैं. हर देश आज भारत के साथ आर्थिक संबंध स्थापित करने को ललायित हैं.

पिछले ५-६ सालों के दौरान मोदी सरकार के कार्यकाल में पूरे विश्व का भारत के प्रति आकर्षण बढ़ा हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी राष्ट्रों व सुपरपॉवर के साथ भारत के अच्छे रिश्ते बनाने की पहल की हैं. जिससे चीन सहित अन्य हमारे प्रतिद्वंदी चिंतित हैं. भारत में विदेशी कम्पनिओं को निवेश से जरा भी भय नहीं रहता हैं, क्योंकि भारत वो महाशक्ति हैं जहाँ विश्व के सभी देश आर्थिक मंदी से गुजर रहे होते हैं. भारत अपनी विकास दर के मुताबिक़ आगे बढ़ रहा होता हैं.

top developing countries list में china gdp growth rate  6.7 के साथ पन्द्रहवें स्थान पर हैं जबकि india gdp growth rate तक़रीबन 7.5 हैं. largest economies in the world 2050 तक भारत इसी गति से चला तो आस-पास कोई भी देश नजर नहीं आएगा.

1लीबिया55.1
2इथियोपिया8.5
3वियतनाम7.7
4आइवरी कोस्ट 7.632
5भारत 7.499
6ईराक 7.234
7मलेशिया 7.21
8बांग्लादेश7.1
9.जिबूती7
10कंबोडिया6.947
11लाओस6.907
12सेनेगल6.801
13नेपाल6.8
14मकाउ6.765
15चीन 6.7

दूसरी तरफ एक अरब 25 करोड़ की जनसंख्या वाला भारत आज विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र हैं. भारत ने विकास दर के नये नये रिकॉर्ड स्थापित किये हैं. भारत विजन 2020 इस दिशा में अहम पहल हैं. भारत एक ऐसे दौर से गुजर रहा हैं वो अभूतपूर्व हैं.

आयात की क्षमता रखने वाले देशों में भारत अग्रणी राष्ट्र हैं. हाल ही के वर्षों में हमने सूचना प्रोद्योगिकी, दूरसंचार और व्यापार आउटसोर्सिंग के क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाई हैं. इसमें कोई शक नहीं हैं, कि भारत एक उभरती हुई शक्ति हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा और अब डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा हैं, कि भारत अब एक उभरती हुई शक्ति नही बल्कि एक सुपरपॉवर राष्ट्र हैं. भारत परमाणु शक्ति के मामले में तीसरा बड़ा राष्ट्र हैं.

इसी साल रूस, अमेरिका तथा फ्रास जैसे देशों के साथ भारत के व्यापारिक समझौतों ने इस बात पर मुहर लगा दी हैं कि भारत एक उभरती हुई शक्ति हैं. इन विदेशी निवेश से भारत के लोगो को रोजगार तो मिलेगा ही साथ ही उनके जीवन स्तर में भी बड़ा बदलाव आएगा. आज के वैश्विक परिद्रश्य में भारत एक याचक राष्ट्र की भूमिका से बड़े राष्ट्रों की श्रेणी में खड़ा होने वाला देश बन चुका हैं. चाहे मित्र हो या दुश्मन, पड़ोसी हो या दूसरे द्वीप के राष्ट्र आज भारत की अवहेलना नहीं कर सकता.

21 वी सदी में अब भारत एशिया ही नही विश्व नायक के रूप में अपनी भूमिका निभा रहा हैं. चीन व पाकिस्तान को छोड़कर विश्व के लगभग सभी देश भारत को संयुक्त राष्ट्र संघ में स्थायी प्रतिनिधित्व का समर्थन करते हैं. आज अमेरिका जैसे देश की सभी बड़ी बड़ी अंतर्राष्ट्रीय कम्पनियों के मालिक व महत्वपूर्ण अधिकारी भारतीय अमेरिकी हैं. लक्ष्मी निवास मित्तल हो या मुकेश अंबानी इस देश के बड़े कारोबारी हैं, जो भारत सहित विश्व की अर्थव्यवस्था को नियंत्रित करने वाले मुख्य फैक्टर हैं. इन्होंने देश में रहकर तकनीकी तथा अन्य सरंचनातमक ढाँचे में मजबूती देकर राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की हैं.

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