कृषि पर निबंध | Essay On Agriculture In Hindi | Farming In India

Essay On Agriculture In Hindi : नमस्कार दोस्तों आपका स्वागत है आज हम भारतीय कृषि पर निबंध फार्मिंग इन इंडिया पर सरल भाषा में निबंध, अनुच्छेद, भाषण, लेख उपलब्ध करवा रहे हैं. भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी कही जाने वाली कृषि व्यवस्था के प्रकार, इतिहास, महत्व, लाभ आदि के बारे में इस आर्टिकल में जानकारी दी गई हैं.

Essay On Agriculture In Hindi

Essay On Agriculture In Hindi – krishi par nibandh

कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार हैं. कृषि और सहायक क्षेत्र सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 15-20 प्रतिशत का योगदान देते हैं, जबकि लगभग 60 प्रतिशत आबादी अपनी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर हैं. भारत में कृषि उत्पादन मानसून पर निर्भर करता हैं.

सभी जीवधारियों को भोजन की आवश्यकता होती हैं. अधिकांश भोज्य पदार्थ हमें कृषि, बागवानी एवं पशुपालन से प्राप्त होते हैं. भोजन की आवश्यकता पूरी करने के लिए अन्न तथा अन्य कृषि उत्पादों की आवश्यकता होती हैं. ये पदार्थ किसान खेती करके प्रदान करता हैं.

एक ही किस्म के पौधे किसी स्थान पर बड़े पैमाने पर उगाए जाते है, तो इसे फसल कहते हैं. फसलें विभिन्न प्रकार की होती हैं जैसे अन्न, सब्जियाँ एवं फल आदि. अन्न व अन्य फसल उत्पादन का कार्य कृषि उत्पादन कहलाता हैं. देश के विभिन्न भागों में विभिन्न प्रकार की फसलें उगाई जाती हैं.

फसल उगाने के लिए किसान को अनेक क्रियाकलाप करने पड़ते हैं. ये क्रियाकलाप अथवा कार्य कृषि पद्धतियाँ कहलाते हैं, किसान, हल, कुदाली, फावड़ा, हंसिया, खुरपी, बैल, बैलगाड़ी, ट्रैक्टर, कम्बाइन, थ्रेसर आदि कृषि उपकरणों की सहायता से विभिन्न कृषि कार्य करता हैं. कृषि कार्य निम्न हैं.

मिट्टी तैयार करना या जुताई करना– फसल उगाने से पहले मिट्टी तैयार करना प्रथम चरण है. इसके लिए किसान मिट्टी को पलट कर उसे पोला बनाने का कार्य करता हैं. इससे जड़े भूमि में गहराई तक जा सकती हैं. पोली मिट्टी में गहराई से घंसी जड़े भी सरलता से श्वसन कर सकती हैं. पोली मिट्टी में रहने वाले केंचुओं और सूक्ष्म जीवों की वृद्धि में सहायता करती हैं. ये जीव किसान के मित्र होयते है, क्योंकि ये मिट्टी में ह्यूमरस का निर्माण करते हैं, जिससे वह अधिक उपजाऊ हो जाती हैं.

इसके अतिरिक्त मिट्टी को उलटने पलटने व पोला करने से पोषक पदार्थ ऊपर आ जाते हैं व पौधे उन पोषक पदार्थों का उपयोग कर सकते हैं. मिट्टी को उलटने पलटने एवं पोला करने की क्रिया जुताई कहलाती हैं. जुताई के कार्य के लिए हल, कुदाली व कल्टी वेटर आदि कृषि उपकरण काम में लिए जाते हैं.

बुआई करना: बुआई का आशय बीज बोने से हैं. इस प्रक्रिया में भूमि में वांछित फसल के अधिक उपज व गुणवत्ता वाले बीज बोए जाते हैं. बुआई के लिए काम आने वाले औजार निम्न हैं.

  • ओरणा– कीप के आकार के इस औजार में बीजों को कीप के अंदर डालने पर यह दो या तीन नुकीले सिरे वाले पाइप से गुजरते है. ये सिरे मिट्टी को भेदकर बीज को भूमि में स्थापित कर देते हैं. ओरणा को हल के पीछे बांधकर बिजाई की जाती हैं.
  • सीड ड्रिल– इसके द्वारा बीजों को समान दूरी व गहराई बनी रहती हैं. यह ट्रैक्टर द्वारा संचालित होती हैं. सीड ड्रिल द्वारा बुआई करने से समय एवं श्रम दोनों की बचत होती हैं. बीजों के बीच आवश्यक दूरी होना आवश्यक हैं. इससे पौधों को सूर्य का प्रकाश, पोषक पदार्थ एवं जल पर्याप्त मात्रा में प्राप्त होते हैं.
  • पाटा चलाना– खेती करते समय यह आवश्यक है कि बुआई के बाद बीज मिट्टी द्वारा ढक जाए. अतः पाटा चलाकर मृदा के ढेलों को तोडा जाता हैं. तथा बोये गये बीजों को भी इस क्रिया से दबाया जाता हैं.
  • खाद एवं उर्वरक मिलाना- सामान्यतया पौधों के लिए सोलह पोषक तत्व आवश्यक माने जाते हैं. ये तत्व हैं कार्बन, हाइड्रो जन, ओक्सीजन, नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटेशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम, लोहा, सल्फर, क्लोरिन, जिंक, बोरोन, ताम्बा और मोलिविडनम. इनके अभाव में पौधों पर इनके अभाव के लक्षण प्रदर्शित होते हैं. अधिक मात्रा में होने पर ये हानि भी पहुचाते हैं. प्रत्येक जाति के पौधों के लिए इनकी अलग अलग मात्रा निर्धारित करते हैं. उक्त पोषक तत्वों को हम खाद या उर्वरक के रूप में पौधों को देते हैं.

भारतीय कृषि का इतिहास History of Agriculture in India

आज हमारे देश में कृषि का जो स्वरूप देखने को मिल रहा हैं वह परम्परागत एव आधुनिक कृषि का संयुक्त रूप हैंइसे विकसित करने में कई सदियाँ लगी हैं. कुछ सदी पूर्व तक हम अपने लोगों का पेट भरने योग्य अन्न नहीं उपजा पाते थे, मगर कृषि के क्षेत्र में आई हरित क्रांति एवं आधुनिक तकनीक के उपयोग ने न केवल हमे कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया बल्कि अब हम आयात के स्थान पर बड़ी मात्रा में अन्न का निर्यात करते हैं.

भारत में कृषि का इतिहास उतना ही पुराना है जितना की मानव सभ्यता का. आदिमानव भोजन के प्रबंध के लिए वनों एवं जगली जीवों के शिकार पर निर्भर था, वह अपने इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए दर दर भटकता रहता था. मगर कृषि व फसल उगाने के ज्ञान के बाद वह एक स्थान पर संगठित रहकर खेती करने लगा. माना जाता हैं. कि पश्चिम एशिया में सर्वप्रथम मानव ने गेहूं और जौ की फसल उगानी शुरू की. वह कृषि के साथ साथ गाय, भैंस, भेड़, बकरी, ऊंट आदि पशुओं को भी पालने लगा था.

लगभग 7500 ई पू मानव ने प्रथम बार कृषि करना आरम्भ किया था, 3000 ई पू आते आते वह उन्नत तरीकों के साथ खेती करने लगा. इस दौर में मिश्र व सिन्धु घाटी सभ्यता के लोगों ने कृषि को मुख्य व्यवसाय के रूप में अपनाया था, वैदिक काल में लोहे के हथियारों के उपयोग ने इसे अधिक सुविधाजनक बना दिया. धीरे धीरे सिंचाई की पद्धतियों का जन्म हुआ, अब नदी या अन्य जल स्रोतों के निकट अधिक खेती की जाने लगी. नदी के किनारे कृषि करने के दो फायदे थे एक तो सिंचाई के लिए जल आसानी से उपलब्ध था, वही भूमि की उर्वरता भी अधिक थी, अतः इन स्थानों पर चावल व गन्ने की बुवाई बड़े स्तर पर की जाने लगी.

अंग्रेजी काल से पूर्व तक भारतीय कृषक अधिकतर खाद्यान्न फसलें उगाते थे. अंग्रेजों ने किसानों को वाणिज्यिक कृषि से परिचय करवाया, जिसके परिणामस्वरूप न केवल किसानों की आमदनी बढ़ी बल्कि देश के व्यापारियों को भी व्यापक स्तर पर कच्चा माल आसानी से मिलने लगा. जूट, नील, चाय, रबर तथा कोफ़ी की वाणिज्यिक खेती की जाने लगी. इसका बड़ा नुकसान यह हुआ कि भारत में खाद्य संकट उत्पन्न हो गया.

कृषि के प्रकार

  • मिश्रित कृषि – कृषि एवं पशुपालन एक साथ साथ करना.
  • शुष्क या बारानी कृषि – शुष्क क्षेत्रों में वर्षा जल का सुनियोजित संरक्षण व उपयोग कर कम पानी की आवश्यकता वाली व शीघ्र पकने वाली फसलों की कृषि करना.
  • झुमिंग कृषि- पहाड़ी व वन क्षेत्रों में वन एवं पेड़ पौधों को जलाकर जमीन साफ़ करना तथा उस पर 2-3 वर्ष खेती करने के पश्चात उसे छोड़कर किसी अन्य स्थान पर इसी तरह कृषि कार्य करना.
  • समोच्च कृषि– पहाड़ी क्षेत्रों में समस्त कृषि कार्य और फसलों की बुवाई ढाल के विपरीत करना ताकि वर्षा से होने वाले मृदा क्षरण को न्यूनतम किया जा सके, समोच्च कृषि कहलाती हैं.
  • पट्टीदार खेती- ढालू भूमि में मृदा क्षरण को कम करने वाली तथा अन्य फसलों को एक के बाद एक पट्टियों में ढाल के विपरीत इस प्रकार बोना कि मृदा क्षरण को न्यूनतम किया जा सके.
  • कृषि वानिकी– कृषि के साथ साथ फसल चक्र में पेड़ों, बागवानी व झाड़ियों की खेती कर फसल व चारा उत्पादित करना.
  • रोपण कृषि – एक विशेष प्रकार की खेती जिसमे रबड़, चाय, कहवा आदि बड़े पैमाने पर उगाए जाते हैं.
  • रिले क्रोपिंग – एक वर्ष में एक ही खेत में चार फसलें लेना.

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उम्मीद करता हूँ दोस्तों Essay On Agriculture In Hindi का यह निबंध आपकों पसंद आया होगा, यहाँ हमने कृषि पर निबंध के बारे में जानकारी दी हैं. यह जानकारी आपकों कैसी लगी हमें कमेंट कर जरुर बताएं.

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