आर्य समाज पर निबंध – Essay on Arya Samaj In Hindi

Essay on Arya Samaj In Hindi- स्वामी दयानन्द सरस्वती ने १८७५ में बंबई में भारतीय आर्य समाज की स्थापना थी. इनका आदर्श वाक्य था विश्व को आर्य बनाते चलों, वर्तमान समय में भारत, मारीशस, संयुक्त राज्य, कनाडा, केन्या, थाईलैंड, दक्षिण अफ्रीका, नीदर लैंड, म्यांमार और चेक गणराज्य में आर्य बड़ी संख्या में हैं. सत्यार्थ प्रकाश इस समाज का सर्वमान्य ग्रंथ हैं. Arya Samaj Essay In Hindi [आर्य समाज पर निबंध] के इस लेख में हम आर्य समाज पर भाषण कविता निबंध बता रहे हैं.

आर्य समाज पर निबंध – Essay on Arya Samaj In Hindi

आर्य समाज पर निबंध - Essay on Arya Samaj In Hindi

आर्य समाज इन हिंदी– भारतीय समाज व धर्म में उन्नीसवीं शती में क्रांतिकारी परिवर्तन करने वाली संस्थाओं में आर्य समाज प्रमुख थी, आर्य समाज की स्थापना १८७५ ई में स्वामी दयानन्द सरस्वती ने की थी. दयानन्द अवतीर्ण हुए, हिन्दू समाज की दशा बड़ी सोचनीय थी. स्वामी दयानंद ने ऐसे समय में देश को जाग्रत किया.

उन्होंने पौराणिक रीतियों तथा कर्मकांडों का खंडन करके हिन्दुओं का ध्यान वैदिक धर्म के मूल रूप की ओर आकृष्ट किया. उन्होंने बताया कि सच्चा धर्म वैदिक धर्म हैं, जिसके बल पर भारत अब भी संसार में प्रतिष्ठा पा सकता हैं.

आर्य समाज की स्थापना- स्वामी दयानंद ने 10 अप्रैल सन 1875 ई को बम्बई में आर्य समाज की स्थापना की. कालान्तर में देश के अधिकाधिक प्रदेशों में भिन्न भिन्न जगह आर्य समाज की शाखाएं स्थापित हो गई. पंजाब सर्वाधिक प्रचारित स्थान रहा, जो आर्य समाज की जड़े एक लम्बे समय तक देश में जमाए रहा.

भारतीय पुनर्जागरण में आर्य समाज के योगदान पर निबंध (Essay on contribution of Arya Samaj in Indian Renaissance)

आर्य समाज के कार्यों एवं सुधारों को निम्न शीर्षकों में वर्णित किया जा सकता हैं.

आर्य समाज के धार्मिक सुधार– आर्य समाज ने भारतीयों को अपनी वास्तविक संस्कृति का परिचय करवाते हुए समाज में प्रचलित रूढ़ियो जैसे मूर्तिपूजा, मत मतान्तर, विभिन्न सम्प्रदाय, श्राद्ध, जाति पांति, बहुदेववाद, अवतारवाद, पुरोहितवाद, अस्प्रश्यता, कन्या वध, बाल विवाह, कन्या वर विक्रय आदि का घोर विरोध कर अपनी मान्यताएं प्रचलित की.

ईश्वर को निराकार बताकर मूर्ति पूजा का खंडन भी किया गया. धर्मों के बारे में बताते हुए उन्होंने वैदिक धर्म को ही सर्वोपरि माना. इस प्रकार आर्य समाज के धार्मिक सुधारों के प्रयत्नों से हिन्दू वैदिक धर्म का पुनरुत्थान हुआ. हिन्दुओं में अपने धर्म के मूल स्वरूप को जानने की जिज्ञासा हुई और उसमें आत्म विश्वास उत्पन्न हुआ.

आर्य समाज के सामाजिक सुधार एवं योगदान– सामाजिक सुधार के क्षेत्र में आर्य समाज का निम्न योगदान हैं.

  1. आर्य समाज ने नारी शिक्षा और विधवा विवाह का समर्थन किया
  2. सती प्रथा को एक महान क्रूरता व पाप का अभिशाप बताया.
  3. बाल विवाह से असहमत होते हुए पुरुष की आयु २५ वर्ष और कन्या की आयु १६ वर्ष विवाह के लिए सुनिश्चित की.
  4. अंतरजातीय विवाह का समर्थन किया.
  5. स्त्री विकास के अनेक प्रयास किये गये. विभिन्न जगहों पर कन्या पाठशालाएं स्थापित की गई.
  6. आर्य समाज ने जाति प्रथा, उंच नीच के भेदभाव तथा छुआछूत की कटु आलोचना की तथा सामाजिक समानता पर बल दिया.
  7. आर्य समाज ने अनेक अनाथालयों, विधवाश्रमों आदि की व्यवस्था की.
  8. आर्य समाज ने दलित वर्ग के उत्थान में महत्वपूर्ण योगदान दिया.
  9. अछूतों को भी यज्ञोपवीत पहनने का अधिकार दिया गया. उनके लिए स्कूल खोले गये, उन्हें गायत्री मंत्र सिखाया गया तथा उनके साथ सहभोज किया गया.
  10. शुद्धि आंदोलन द्वारा धर्म परिवर्तन कर ईसाई एवं मुसलमान बने हिन्दुओं को पुनः हिन्दू धर्म के अंतर्गत लाया गया.

आर्य समाज का शुद्धि आंदोलन– शुद्धि आंदोलन आर्य समाज की महत्वपूर्ण देन हैं. धर्मांतरण के फलस्वरूप हिन्दू धर्म से विचलित लोगों को पुनः शुद्ध करके हिन्दू बनाने का क्रांतिकारी कार्यक्रम शुरू किया गया. इससे हजारों ईसाई और मुसलमान पुनः हिन्दू हो गये.

आर्य समाज के शैक्षणिक कार्य– स्वामी दयानन्द ने स्त्री शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए अपने सतत प्रयत्नों व आर्य समाज के तत्वाधान में अनेक कन्या पाठशालायें आरम्भ कराई. शिक्षा के क्षेत्र में गुरुकुल प्रणाली की महत्ता दर्शाते हुए गुरुकुलों की आश्रम व्यवस्था की गई.

स्वामीजी की मृत्यु के बाद आर्य समाज दो भागों में विभक्त हो गया. एक दल के मुखिया लाला हंसराज थे, जो पाश्चात्य शिक्षा प्रणाली का समर्थन करते थे. उन्होंने देश में विभिन्न जगहों पर डी ए वी स्कूल एवं कॉलेज खोले. जिनमें से कई आज भी आर्य समाज के संरक्षण में कार्यरत हैं.

दूसरे दल के नेता स्वामी श्रद्धानंद थे, जो गुरुकुल प्रणाली के समर्थक थे, उन्होंने हरिद्वार में 1902 ई में गुरुकुल की स्थापना की. अतः देश में राष्ट्रीय शिक्षण के श्रीगणेश का श्रेय आर्य समाज को ही हैं.

आर्य समाज द्वारा राजनीतिक जागरण– जन जीवन में आर्य समाज द्वारा राजनीतिक जागृति में महत्वपूर्ण योगदान किया गया. तिलक, लाला लाजपतराय, गोखले और विपिनचंद्र पाल जैसे व्यक्ति आर्य समाज के विचारों से प्रभावित थे. स्वामी दयानन्द ने अपने ग्रंथ सत्यार्थ प्रकाश में स्वराज्य की महत्ता का प्रतिपादन किया.

वस्तुतः आर्य समाज ने ऐसे व्यक्तियों के निर्माण में सहयोग दिया जो राष्ट्रीय आंदोलन में सक्रिय भाग लेते रहे तथा राजनीतिक आंदोलन में अग्रणी बने रहे क्योंकि आर्य समाज का मुख्य आदर्श भारत समाज का समुन्नयन करना था.

आर्य समाज की महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ– हिन्दू धर्म की पौराणिकता का खंडन कर वैदिक धर्म को बढ़ावा देकर आर्य समाज ने हिन्दुओं में नवीनतम गौरव का संचार किया. आर्य समाज ने शुद्धि आन्दिलं को संगठित कर हिन्दू धर्म की जड़े मजबूत कर दी. ईसाईयत और इस्लाम की चुनौतियों का आर्य समाज साकार प्रत्युतर था.

हिंदी भाषा के प्रचार में आर्य समाज ने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की तथा राष्ट्रीय शिक्षा पद्धति का श्रीगणेश भी इसी समाज का श्रेयस्कर कृत्य हैं. वर्तमान राष्ट्रीय चेतना का विकास आर्य समाज द्वारा किये गये हिन्दुओं की धार्मिक और सामाजिक जागृति के आंदोलन का परिणाम था.

यह भी पढ़े

आशा करता हूँ फ्रेड्स यहाँ दिया गया Essay on Arya Samaj In Hindi का यह जानकारी आपकों पसंद आया होगा, यदि आपकों Arya Samaj In Hindi mandir, bhajan, founder, arya samaj ki sthapna, was founded by, wedding, ki sthapna kisne ki thi, history, niyam, books, school, pdf आर्टिकल में दी गई जानकारी पसंद आई हो तो प्लीज इसे अपने दोस्तों के साथ सोशल मिडिया पर जरुर शेयर करें.

Leave a Reply

Your e-mail address will not be published. Required fields are marked *