Essay on Baisakhi in Hindi | बैसाखी पर निबंध

Essay on Baisakhi in Hindi: बैसाखी’ अथवा ‘वैसाखी की गिनती भारत के मुख्य पर्वों में की जाती हैं. यह एक ऋतु विशेष पर्व हैं. मुख्य रूप से पंजाब और हरियाणा में इन्हें बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता हैं. आज के Baisakhi par Nibandh में स्टूडेंट्स के लिए हम Baisakhi Short Essay लेकर आए हैं. जिनके द्वारा आप इस पर्व को अच्छी तरह से जान सकते हैं. Essay on Baisakhi in Hindi | बैसाखी पर निबंध

Essay on Baisakhi in Hindi | बैसाखी पर निबंध 2019

हमारे देश में बहुत से मेले उत्सव और त्योहार मनाए जाते हैं. उनमे से बैसाखी का मेला भी प्रमुख हैं. यह बैसाखी का मेला वैशाख महीने के पहले दिन मनाया जाता है ,जो प्रायः 13 अप्रैल को पड़ता हैं. इस समय तक भारत में गर्मी आरम्भ हो जाती हैं. इसलिए हमारे पूर्वजों ने इस मेले के लिए नदी स्नान का रिवाज चलाया होगा.

सवेरे चार बजे ही नींद छोड़कर लोग अपने संगी साथियों के साथ नदी की ओर चल पड़ते हैं. इसलिए कि इस दिन नदी में स्नान करना बड़ा पवित्र माना जाता हैं. यूँ तो कई लोग इस दिन हरिद्वार जाकर गंगा मैया के पवित्र जल में स्नान करते हैं. पर जो वहां नहीं जा सकते हैं. वे अपने ही नगर के समीप नदी के तट पर पहुचते हैं. जहाँ नदी नहीं हैं वहां तालाब, नहर आदि के किनारे बैसाखी का मेला लगता हैं.

दिल्ली में यमुना तट पर दिन बढने से पहले ही लाखों लोग पहुच जाते हैं. फिर भी पूरे दिन जनता की एक नदी सी उमड़ती दिखाई देती हैं. तट पर कपड़े उतारकर लोग यह यमुना मैया कहते हुए जल में उतरकर, स्नान करके तन मन को शान्ति प्रदान करते हैं. कई लोग भजन गाते हैं, कई कीर्तन करते हैं. कई तट पर बने मन्दिरों में भगवान् की पूजा करते हैं और कुछ घाट पर ही बैठकर आँखे मूंदकर प्रभु का ध्यान करते नजर आते हैं.

कुछ लोग जल में तैरते हुए व्यायाम करते हैं. तो कुछ लोग छलांगे लगाकर मन को प्रसन्न करते हैं. इस समय तट पर अनोखी शोभा होती हैं. जहाँ तक दृष्टि जाती है, अपार जनसमूह दिखाई पड़ता है. मन्दिरों में घंटों, घड़ियालों और शंखों की आवाज गूंज उठती हैं. ठंडी ठंडी हवा में उड़ते हुए जल के छांटे अंग अंग को शीतल करते हैं. नर नारी जहाँ भक्ति की ओर मन लगाते हैं. वहां बालज बालिकाएं किलकारियां भरते हुए उछल कूद मचाते हुए दिखाई देते हैं.

कुछ दानी लोग स्नान के बाद तट पर आए ब्राह्मणों को दक्षिणा देते हैं. ऐसे में कुछ भिखारी भी दान पाने के लिए हाथ फैलाएं दिखाई देते हैं.

पूजा पाठ और दान के बाद कुछ खाने पीने के कार्यक्रम चलते हैं. कुछ स्त्रियाँ भक्ति के गीत गाने लगती हैं. कुछ लोग वेदों के मन्त्र और प्रार्थना के श्लोक उच्चारित करते हैं.

बहुत से गाँवों में नर नारी भी नगर के घाटों पर मेले की झांकी देखने आ जाते हैं और जनता के अपार समुदाय को देखकर हैरान होते हैं. कि ये लाखों लोग आ कहाँ से गये.

बच्चे स्नान के बाद पूरी, मिठाई और फल की दुकानों की ओर लपकते हैं. मनचाही वस्तु पाकर वे खुश होकर खाते पीते हैं और मन में ख़ुशी मनाते हैं कि ऐसे वैसाखी के मेले और त्योहार जल्दी जल्दी आया करे.

पंजाब में वैसाखी का मेला बड़ी धूमधाम से मनाया जाता हैं. सतलज, व्यास, रावी, चिनाब आदि नदियों या नहरों के किनारे लोग इकट्ठा होते हैं. गाँव के लोग कबड्डी, कुश्ती आदि खेल खेलते हैं. कई लोग मुहं से दोहरी बांसुरी बजाते हैं, जिन्हें अलगोजे कहा जाता हैं. कई जगह पशुओं की प्रदर्शनी भी होती हैं.

मेले और त्योहारों से राष्ट्रीय एकता बढ़ती हैं. राष्ट्र में प्रसन्नता तथा उत्साह की वृद्धि होती हैं. आगे कार्य करने की शक्ति परिवर्धित होती हैं. अतः हमें इन त्योहारों को बड़े उत्साह से मनाना चाहिए.

आशा करता हूँ दोस्तों यहाँ लिखा गया Essay on Baisakhi in Hindi का यह लेख आपकों अच्छा लगा होगा. वैसाखी के मेले पर एक निबंध आपकों अच्छा लगा हो तो प्लीज इसे अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करे.

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