महिलाओं की स्थिति पर निबंध- Essay On Bhartiya Nari In Hindi- Bhartiya Samaj Me Nari Ki Dasha

महिलाओं की स्थिति पर निबंध- Essay On Bhartiya Nari In Hindi- Bhartiya Samaj Me Nari Ki Dasha: हमारे देश में महिलाओं की स्थिति, वुमेन सेफ्टी पर निबंध, भारत में महिलाओं की स्थिति व समाज में भूमिका पर निबंध भाषण को Class 1, Class 2, Class 3, Class 4, Class 5, Class 6, Class 7, Class 8, Class 9, Class 10 के स्टूडेंट्स के लिए भारतीय समाज में नारी की दशा पर निबंध भाषण या लेख लिखने को कहा जाता हैं. वुमेन स्टेट्स इन इंडिया के लेख को 100,200,300,400,500 शब्दों में महिलाओं की स्थिति पर लेख, आर्टिकल के रूप में लिख सकते हैं. प्राचीन भारत में नारी की स्थिति, वर्तमान में नारी की समाज में स्थिति इत्यादि बिन्दुओं पर यह निबंध तैयार किया गया हैं.

Essay On Bhartiya Nari In Hindiमहिलाओं की स्थिति पर निबंध- Essay On Bhartiya Nari In Hindi- Bhartiya Samaj Me Nari Ki Dasha

bhartiya nari nibandh:- भारत देश में नारी को सम्मान देने की गौरवशाली परम्परा रही हैं. हमारी सांस्कृतिक धारणा हैं कि जिस परिवार में नारी के साथ अच्छा तथा सम्मानजनक व्यवहार होता हैं, उस पर देवता प्रसन्न रहते हैं. वहां सुख शान्ति और सम्रद्धि होती हैं. अतः नारी को गृहलक्ष्मी कहा गया हैं जिस परिवार में नारी के साथ अच्छा व्यवहार नही होता हैं, वहां सुख शान्ति और सम्रद्धि का अभाव होता हैं तथा उस परिवार का विकास रुक जाता हैं.

सरस्वती के रूप में नारी समाज को शिक्षा प्रदान करती हैं. माता हर बालक की पहली शिक्षक हैं. वह बालकों में अच्छे गुणों का विकास करती हैं, नारी को शक्ति का प्रतीक माना गया हैं. स्पष्ट हैं कि सांस्कृतिक परम्पराओं के अनुसार भारतीय समाज में नारी का सम्मानजनक स्थान रहा हैं. नारी ने अपने त्याग, प्रेरणा, क्षमा, सहिष्णुता, प्रेम और ममता से परिवार, समाज और राष्ट्र को समुन्नत किया हैं.

महिलाओं की स्थिति पर निबंध

प्राचीन कालीन भारतीय समाज और नारी- प्राचीन भारत में नारी की स्थिति सुखद थी. उस काल में महिलाएं सभी कार्यों में पुरुषों के समान बराबरी से भाग लेती थी. कोई कार्य लिंग के आधार पर बंटा हुआ नही था. स्त्री-पुरुष और बालक बालिकाओं का समान महत्व था.

उस काल में गार्गी, मैत्रेयी, लोपामुद्रा आदि उच्च शिक्षित महिलाओं का उल्लेख मिलता हैं, जो पुरुषों के साथ शास्त्रार्थ में भाग लेती थी. अनेक वैदिक ऋचाओं की रचना महिलाओं (ऋषिकाओं) द्वारा की गई. महिलाएं राजकार्य एवं युद्धों में भाग लेती थी. राजतरंगिणी में उल्लेख हैं कि सुगंधा, दिददा और कोटा नामक महिलाओं ने बहुत समय तक कश्मीर में शासन किया था.

Bhartiya Samaj Me Nari Ki Dasha

मध्यकाल में नारी की स्थिति-परवर्तीकाल में विशेषकर मध्यकाल में भारतीय नारी की पारम्परिक स्थिति में गिरावट आ गई थी. शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य मामलों में बालक, बालिका के बिच अंतर किया जाने लगा. बदली हुई परिस्थतियों में उसे शिक्षा से वंचित रहना पड़ा. उसे घरेलू कार्यों की जिम्मेदारियों तक सिमित कर घर की चारदीवारी में ही रहने को बाध्य किया गया.

बालविवाह, सतीप्रथा, पर्दाप्रथा, दहेज प्रथा जैसी अनेक कुप्रथाओं से उन्हें पीड़ित होना पड़ा. उसकी पुरुष पर निर्भरता बढ़ती गई. अनेक सामाजिक मान्यताओं के प्रभाव से महिलाओं की स्थति कमजोर हो गई. इस काल में दुर्गावती, अहिल्याबाई और 19 वीं शताब्दी में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई जैसी साहसी महिलाओं ने अपने राज्य का शासन संचालन करते हुए शत्रु से लोहा लिया. भक्तिमति मीराबाई ने जनमानस पर व्यापक प्रभाव डाला.

Essay On Bhartiya Nari In Hindi

19 वीं शताब्दी के समाज सुधार और भारतीय नारी की दशा– 19 वीं शताब्दी के समाज सुधारकों ने नारी की स्थिति के लिए अनेक प्रयास किए. राजा राममोहन राय ने सतीप्रथा के विरुद्ध कानूनी प्रतिबन्ध लगाया. ईश्वरचंद्र विद्यासागर ने विधवा विवाह के समर्थन में जन जागृति पैदा की.

इनके संबंध में स्वामी दयानन्द सरस्वती ने महिला शिक्षा के लिए उल्लेखनीय कार्य किए. महात्मा ज्योतिबा फुले और सावित्री बाई फुले ने भी नारी उत्थान के लिए कार्य किया. आजादी की लड़ाई में महिलाओं ने भी प्रमुखता से भाग लिया. 20 वीं शताब्दी में महिला आंदोलन ने जोर पकड़ा, जिसने महिलाओं की स्थिति में सुधार लाने में एक बड़ी भूमिका निभाई. हालांकि इस क्षेत्र में अभी और अधिक प्रयासों की आवश्यकता हैं.

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