बौद्ध धर्म की भारतीय संस्कृति को देन पर निबंध | Essay on Buddhism Contribution to Indian culture In Hindi

बौद्ध धर्म की भारतीय संस्कृति को देन पर निबंध Essay on Buddhism Contribution to Indian culture In Hindi: महात्मा बुद्ध द्वारा प्रवर्तित बौद्ध धर्म का उदय भारत की भूमि पर हुआ. सत्य अहिंसा जैसे विचारों को मूल आधार बनाते हुए हिन्दू धर्म से बौद्ध धर्म की नींव रखी गई थी. आज के निबंध में बौद्ध धर्म की देन तथा भारतीय संस्कृति में योगदान को विस्तार से समझने का प्रयास करेंगे.

Essay on Buddhism Contribution to Indian culture In Hindi

Essay on Buddhism Contribution to Indian culture In Hindi

बौद्ध धर्म असमानता पर समानता के उद्देश्य से उदय हुआ. धन के संचय न करने का विचार इसके मूल में था. गौतम बुद्ध के विचारों में मानव की घ्रणा, क्रूरता, हिंसा तथा दरिद्रता का मूल कारण धन ही हैं. बुद्ध का मानना था कि एक कृषक को उनके समस्त साधन मिलने चाहिए एक व्यापारी को अपने कारोबार की समस्त सुविधाए मिलती चाहिए तथा एक मजदूर को उसके हक की कमाई हासिल होनी चाहिए भारतीय संस्कृति को बौद्ध धर्म की देन निम्नलिखित रही हैं.

सरल स्पष्ट और लोकप्रिय धर्म (Simple clear and popular religion)

भारत में सर्वप्रथम बौद्ध धर्म ही एक लोकप्रिय धर्म के रूप में फैला. इसमें वैदिक धर्म की तरह कर्मकांड, यज्ञ, आदि नहीं थे न जाति भेद था. इसके द्वार सभी के लिए खुले हुए थे. यह ऐसा धर्म था, जिसे आसानी से ग्रहण कर सकते थे. पहली बार धर्म में व्यक्तित्व को महत्व और प्रधानता दी गई.

वैदिक धर्म पर प्रभाव (Influence on Vedic religion)

बौद्ध धर्म ने हिन्दू धर्म को बहुत प्रभावित किया. बाह्य आडम्बर, यज्ञ अनुष्ठान आदि इस समय हिन्दुओं में प्रचलित थे. बौद्ध धर्म की शिक्षाओं के कारण वे कम हो गये थे. यज्ञों में पशुबलि की प्रथा समाप्त होती चली गई.

मूर्तिपूजा का प्रसार (Promotion of idol worship)

महायान सम्प्रदाय के बौद्ध लोगों ने बुद्ध की मूर्ति बनाकर उनकी पूजा करना शुरू कर दिया. उनका हिन्दू धर्म के अनुयायियों पर भी प्रभाव पड़ा. और उन्होंने अपने देवी देवताओं की मूर्तियाँ बनाकर उनकी पूजा करना शुरू कर दिया.

संघ व्यवस्था (Union system)

महात्मा बुद्ध ने बौद्ध भिक्षुओं के लिए संघ की व्यवस्था की थी. इन बौद्ध संघों के प्रचार में महत्वपूर्ण योगदान दिया. बौद्धों की मठ प्रणाली हिन्दू धर्म को भी प्रभावित किया. स्वामी शंकराचार्य ने भारत में चारों दिशाओं में मठों की स्थापना की.

आचार की शुद्धता (Purity of conduct)

बौद्ध धर्म ने दस शील को अपनाकर भारतीय जनता को नैतिकता, लोकसेवा और सदाचार का मार्ग दिखलाया.

धार्मिक सहिष्णुता (religious tolerance)

बौद्ध धर्म ने भारतीय समाज को धार्मिक सहिष्णुता का पाठ पठाया. बुद्ध ने दूसरे धर्मों की निंदा कभी नहीं की और बौद्धिक स्वतंत्रता पर बल दिया. इसका प्रभाव हिन्दू धर्म पर भी पड़ा.

दर्शन का प्रभाव (Philosophy effect)

बौद्ध विद्वान् नागार्जुन ने शून्यवाद तथा माध्यमिक दर्शन को प्रतिपादित किया. बौद्ध धर्म के अनात्मवाद, अनीश्वरवाद, प्रतीत्य समुत्पाद, कर्मवाद एवं पुनर्जन्मवाद, निर्वाण आदि दार्शनिक विचारों ने भारतीय चिंतन प्रणाली के विकास में योगदान दिया.

असंग, वसु, बन्धु, नागार्जुन, धर्म कीर्ति आदि से बौद्ध दार्शनिकों ने बौद्ध विचारधारा को विकसित किया और अपनी रचनाओं से भारतीय दार्शनिकों को प्रभावित किया. बौद्ध धर्म का खंडन करने के लिए अन्य सम्प्रदायों के दार्शनिक सामनें आए, इनमें शंकराचार्य का नाम प्रमुख हैं.

साहित्यिक क्षेत्र (Literary field)

साहित्य के क्षेत्र में भी बौद्ध धर्म की महान देन हैं. बौद्ध विद्वानों ने संस्कृत भाषा में अनेक ग्रंथों की रचना की जो भारतीय साहित्य की अमूल्य निधियाँ हैं. इस ग्रंथों में दिव्यावदान, बुद्धचरित, सौन्दरानन्द, महावस्तु, ललित विस्तार, मंजु श्री मूल कल्प, चान्द्र व्याकरण आदि प्रमुख हैं.

जातक कथाओं, विनयपिटक, सुतपिटक, अभिधम्मपिटक, मिलिन्दपन्हों, दीपवंश, महावंश आदि ग्रंथों की रचना पालि भाषा में की गई. बौद्ध साहित्य से हमें प्राचीन भारत का इतिहास जानने में भी बहुत सहायता मिलती हैं.

लोक भाषाओं में उन्नति (Advancement in local languages)

बौद्ध धर्म ने लोक भाषाओं के विकास में भी पर्याप्त योगदान दिया हैं. बौद्ध धर्म साधारण बोलचाल की भाषा द्वारा प्रचलित किया गया था. पालि साहित्य का प्रचार भी इसी कारण हुआ.

कला के क्षेत्र में देन (Contribution to the field of art)

कला के क्षेत्र में बौद्धों की महान देन रही हैं. गुहा गृहों, मन्दिरों और स्तूपों का निर्माण बौद्धों द्वारा हुआ. साँची और भरहुत के स्तूप तथा अशोक के शिला स्तम्भ बौद्ध कला के विशाल और सुंदर नमूने हैं. अजंता और बाघ की अधिकांश चित्रकारी बौद्ध कालीन हैं.

सम्राट अशोक के शिला स्तम्भ, कार्ले का गुहा मन्दिर तथा गया का बौद्ध मन्दिर तत्कालीन स्थापत्य कला के श्रेष्ठ नमूने हैं. बौद्धों के कारण भारत में मूर्ति कला के क्षेत्र में एक नई शैली का जन्म हुआ, जो गांधार शैली के नाम से प्रसिद्ध हैं.

विचारों की स्वतंत्रता (Freedom of thought)

बुद्ध ने अपने शिष्यों से कहा था कि उनके वचनों का अन्धानुकरण न कर अपनी बुद्धि से परखना चाहिए. इस प्रकार बौद्ध धर्म ने बौद्धिक स्वतंत्रता को प्रोत्साहन दिया.

शिक्षा का प्रसार (Spread education)

शिक्षा के प्रसार में बौद्ध धर्म का विशेष योगदान रहा, नालंदा विश्वविद्यालय के द्वारा शिक्षा का व्यापक प्रसार हुआ. नालंदा, तक्षशिला और विक्रमशिला के विश्वविद्यालय तत्कालीन शिक्षा के प्रसिद्ध केंद्र थे. इन विश्वविद्यालयों ने भारतीय शिक्षा एवं भारतीय संस्कृति के प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दिया.

सामाजिक समानता (social equality)

बौद्ध धर्म के प्रभाव के फलस्वरूप हिन्दू समाज में प्रचलित जाति प्रथा के बंधन शिथिल होते चले गये तथा निम्न वर्ग के लोगों में आत्म विश्वास तथा आत्म सम्मान की भावनाएं उत्पन्न हुई.

राजनीतिक प्रभाव (Political influence)

राजनीतिक क्षेत्र में बौद्ध धर्म की सबसे बड़ी देन यह है कि अहिंसा का उपदेश देकर इसने भारतीय नरेशों तथा सम्राटों के ह्रदय में रक्तपात तथा युद्ध के प्रति घ्रणा उत्पन्न कर दी. बौद्ध धर्म से प्रभावित होने के कारण ही सम्राट अशोक ने युद्ध न करने का संकल्प लिया था. बौद्ध धर्म ने भारतीय शासकों को समाज सेवा तथा लोककल्याण का पाठ पढ़ाया.

राजनीतिक तथा सामाजिक एकता (Political and social unity)

बौद्ध धर्म से राष्ट्रीयता की भावना को प्रोत्साहन मिला. बौद्धों के जाति विरोध तथा समानता के सिद्धांत ने इस भावना को मजबूत बनाया. निर्वाण का द्वार ऊंच नीच और धनी निर्धन सबके लिए द्वार खोलकर समाज में एकता उत्पन्न की. भारत के कोने कोने में धर्म का प्रसार कर बौद्ध भिक्षुओं ने एकता की भावना जागृत की.

भारतीय संस्कृति का प्रसार विदेशों में (The spread of Indian culture abroad)

इस धर्म के द्वारा भारतीय संस्कृति का प्रसार चीन, जापान, मंगोलिया, बर्मा, लंका, अफगानिस्तान, जावा, सुमात्रा आदि में हुआ. ये देश भारत को एक तीर्थ समझने लगे. यह बौद्ध धर्म की सबसे बड़ी देन हैं.

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