बाल उत्पीड़न पर निबंध | Essay on child abuse In Hindi

बाल उत्पीड़न पर निबंध | Essay on child abuse In Hindi: बच्चों के साथ किसी प्रकार का शारीरिक लैंगिक या भावनात्मक दुर्व्यवहार, अत्याचार एवं हिंसा करना बाल उत्पीड़न (child abuse) माना जाता है. बाल उत्पीड़न समाज द्वारा सामना की जाने वाली सामाजिक बुराईयों में से सबसे ज्यादा है। इसकी उपेक्षा के कारण भारत में बाल उत्पीड़न की घटनाएं बहुत तेजी से बढ़ रही है। इस पर ध्यान देने की जरुरत है. इसके कई प्रकार विद्यमान है जिस कारण इसे आसानी से नियंत्रित नही किया जा सकता है. बाल उत्पीड़न के मामलों में बहुत से सामाजिक कारणों के चलते परिवार समाज के साथ यह मामले सार्वजनिक नही कर पाटा है, हमेशा उसे अपने परिवार की गरिमा मिटटी में मिल जाने के भय के चलते वह बाल उत्पीड़न को किसी क़ानूनी स्तर तक ले जाने पर भयभीत रहते है,

बाल उत्पीड़न पर निबंध | Essay on child abuse In Hindi

  1. Child abuse- शारीरिक उत्पीड़न का मतलब ऐसे किसी कार्य से है जो बच्चे को पीड़ा दे चोट पहुचाए या तकलीफ दे. Child abused माना गया है.
  2. बाल यौन दुर्व्यवहार में वे सभी अपराध सम्मिलित है, जो लैंगिक अपराधों से बालकों को संरक्षण (पोस्को) अधिनियम में सम्मिलित किये गये है.
  3. भावनात्मक दुर्व्यवहार में वे कार्य या चूक सम्मिलित है जिनके कारण बच्चा किसी तरह के तनाव भावनात्मक या मानसिक पीड़ा का शिकार बनता है.
  4. ऐसी किसी भी पूर्वाग्रही व्यवहार जो बच्चे की जाति, लिंग व्यवसाय धर्म या क्षेत्र के आधार पर किया जाता है.

बच्चों को सजा देना उन्हें अनुशासित करने और वयस्क के अधिकार में लाने का एक परम्परागत तरीका माना जाता है, किन्तु शारीरिक हो या मानसिक बच्चों के खिलाफ किसी तरह की हिंसा गलत है. ये बाते दीर्घावधि में बालकों के व्यक्तित्व को प्रभावित करती है. ये गतिविधियाँ बालकों में शारीरिक एवं व्यवहारपरक नकारात्मक पैटर्न विकसित कर देती है.

इसके प्रभावस्वरूप बच्चों में अनिद्रा, नैराश्य की भावना, खुद को बेकार समझना, क्रोधित होकर चिल्लाना, चिडचिडापन बढ़ना, दोस्तों से अलग होना, ध्यान केन्द्रित नही कर पाना, पढ़ाई में कमजोरी,झगड़ालू व्यवहार, नफ़रत, विद्यालय या घर से भागना जैसी स्थतियाँ सामने आ सकती है, बच्चे की आत्मसुरक्षा की भावना खत्म हो सकती है.

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