Essay On Child Labour In Hindi | बाल श्रम व बाल तस्करी

Essay On Child Labour In Hindi देश भर में हर रोज सवा सौ से अधिक बच्चे लापता हो जाते है. जिनमे से ज्यादातर कभी लौटकर नही आते है. लापता बच्चे आखिर जाते कहाँ है? इसका जवाब ज्यादा मुश्किल नही है. कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों के अध्ययन से यह साबित हो चुकि है कि मानव तस्करी करने वाले गिरोह इस काम में बड़े पैमाने पर सक्रिय है.

Essay On Child Labour In Hindi | बाल श्रम व बाल तस्करी

शहरों के गरीब इलाकों या गाँव देहांत से अपहरण कर या बहला फुसला कर लाए गये बच्चों को न सिर्फ बंधुआ मजदूरी या भीख मांगने के कार्य में लगा दिया जाता है. बल्कि बहुत सारे मानव अंगो के तस्करों के जाल में फस जाते है. लड़कियों को नौकरानी का काम करने या देह व्यापार के लिए बेच दिया जाता है.

बीते कुछ सालों में हमारे यहाँ यौन पर्यटन एवं बाल तस्करी एक संगठित अपराध के रूप में सामने आया है. इसमे मासूम बच्चो का, पैसो के लिए शोषण, मजदूरी कराने के लिए शोषण, अंगो की तस्करी, भीख मांगने आदि के लिए इस्तमोल होता है.

बाल श्रम व तस्करी के कारण (Causes of child labor and Smuggling)

  • हमारे देश में भारी आर्थिक विषमता है, मात्र 50 लोगों के पास देश की आधी दौलत है. ज्यादातर लोग गरीब है. जिनके सामने परिवार पालन का बड़ा संकट है. इस स्थति के चलते माँ बाप नही चाहते हुए भी नाबालिग बच्चों को श्रमसाध्य कामों में लगाने पर विवश होते है. जिनके परिणामस्वरूप बच्चें होटलों, ढाबों, एवं कारखानों में दिन रात मेहनत करते हुए सार्वजनिक स्थलों पर भीख मांगते दीखते है. यहाँ वे विभिन्न अपराधिक व्यक्तियों के जाल में फस जाते है और कालान्तर में वे अपराधिक कार्य करने पर मजबूर हो जाते है. कई अपराधिक गिरोह नशीले पदार्थो की तस्करी, जेबकटी, जैसे अपराधों में बच्चों का दुरूपयोग करते है.
  • बीड़ी, माचिस, पटाखे,आरीतारी व चूड़ी निर्माण जैसे व्यवसायों में बच्चों को लगाना बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है. कम मजदूरी में अच्छा श्रम उपलब्ध हो जाता है. लालची व्यवसायी बच्चों के माता-पिता को को भी पैसों का प्रलोभन देकर सहमत कर लेते है. वे बच्चों से दिनरात मेहनत करवाते है. उनके बचपन का भारी दुरूपयोग करते है.
  • कृषि प्रधान आर्थिक व्यवस्था – हमारे देश की 75 प्रतिशत आबादी गाँवों में रहती है. जो खेती पर निर्भर है. वर्षा, अकाल, ओलावृष्टि जैसी कई अनिश्चिंताओ के अलावा खेती करने में भारी मानव श्रम की आवश्यकता होती है. खेती का धंधा लाभकारी नही होने के कारण हर आदमी खेती के लिए मजदूरों का प्रबंध नही कर पाता है और वह मजबूरन अपने नाबालिग बच्चों को पढ़ाई के स्थान पर खेतों के काम में लगा देते है.
  •  नशाखोरी-समाज के बड़े वर्ग नशे की चपेट में है. शराब, भांग, गाजा, अफीम जैसे नशीले पदार्थ व्यक्ति की शारीरिक और बौद्धिक क्षमताओं को बुरी तरह प्रभावित किया है. नशीले पदार्थो की लत पड़ जाने से छोड़ना मुश्किल हो जाता है. तथा नशाखोर व्यक्ति शारीरिक और बौद्धिक श्रम करने में असमर्थ होता है. इसी दशा में मज़बूरी में माताएं अपने नाबालिग बच्चों को श्रमसाध्य कार्यो में लगाने या भीख मंगवाने पर विवश होती है.
  • महंगी व रोजगार विहीन शिक्षा व्यवस्था- गरीब माँ बाप भी अपने बच्चों से अमीरों जितना प्यार करते है. वे भी अमीरों की तरह अमीरों की तरह अच्छी स्कूलों में अपने बच्चों को पढ़ाना चाहते है. किन्तु वे आर्थिक विफलताओं के कारण अच्छे स्कुलो का खर्चा वहन करने की स्थति में नही होते है. इसके अलावा यह कटु वास्तविकता है कि हमारी शिक्षा व्यवस्था में रोजगार की गारंटी नही है.अधिकाशं पढ़े लिखे व्यक्ति रोजगार हेतु इधर -उधर भटकते हैं इस स्थति में माँ बाप की यह सोच है कि वे पढ़ने की अपेक्षा बच्चो को रोजगार में लगाए. जिसकी परिणति बाल मजदूरी में हो रही है.

बाल श्रम व बाल तस्करी के दुष्परिणाम (Side effects of child labor and child trafficking)

  • बच्चे देश के भविष्य है, बच्चे यदि स्वस्थ, शिक्षित एवं बुद्धिमान होंगे तो निश्चित रूप से देश भी विकसित होगा. अन्यथा बच्चो के अस्वस्थ, अशिक्षित व् अविकसित होने पर देश का पराभव निश्चित है.
  • आर्थिक विपन्नताओं के चलते अधिकाश बच्चे कुपोषण के शिकार होते है. उनका समुचित रूप से शारीरिक व बौद्धिक विकास नही हो पाता है. बौद्धिक व शारीरिक विकास नही होने से वे कुशलतापूर्वक श्रम भी नही कर पाते है. जिससे देश की अर्थव्यवस्था को सहारा मिलने के स्थान पर वे समाज पर बोझ बनकर रह जाते है.
  • शिक्षा का अभाव-: माँ-बाप की गरीबी के चलते अधिकाश बच्चे या या तो शिक्षा प्रारम्भ ही नही कर पाते या वे जल्दी पढ़ाई छोड़कर काम में लग जाते है. अशिक्षित व्यक्ति नशाखोरी, अन्धविश्वास व अनेकों सैम,सामाजिक बुराइयों में आसानी से लिप्त हो जाता है. वह समाज की आर्थिक प्रगति में भागिदार नही हो पाता है. यह स्थिति उनके लिए व देश के लिए हानिकारक है.
  • नशे के कारोबार व अपराध की दुनिया में लिप्त लोग स्वयं कानून से बचने के लिए नाबालिक बच्चों का दुरूपयोग करते है. ऐसे धंधो में लिप्त रहने पर बच्चे भी नशाखोरी में लिप्त हो जाते है. तथा उन्हें ये अपराधिक दुनिया अच्छी लगने लगती है. इस तरह उन्हें खूखार अपराधी बनने एवं अपराध की दुनिया में जाने में देर नही लगती है. यह स्थिति उनके साथ साथ समाज के लिए भी घातक है.

बाल मजदूरी व बाल तस्करी रोकने हेतु कानून (Laws to prevent child labor and child trafficking)

  • बच्चों का भीख मांगने के लिए अन्यथा अपहरण भारतीय दंड सहिता में दंडनीय अपराध है.
  •  भारतीय दंड सहिता की धारा 370, 367, 368
  • बंधुआ श्रम पद्धति उन्मूलन अधिनियम 1976
  • बाल अधिकार सरक्षण आयोग अधिनियम 2005
  • उपरोक्त कानूनों में भीख मांगने के लिए या अन्यथा बच्चों का अपहरण भारतीय दंड सहिता में दंडनीय अपराध है. 14 वर्षो के बालकों को मजदूरी में लगाना वर्जित है. ऐसा किया जाने पर शासित एवं कठोर दंड के प्रावधान है.
  • आर्थिक विषमताओं एवं उपरोक्त सामाजिक समस्याओं के चलते उक्त कानूनों का वास्तविक प्रभाव नही हो पा रहा है. इन बुराइयों पर नियन्त्रण के लिए कानूनी उपाय पर्याप्त नही है. बल्कि समाज में व्याप्त बुराइयों को दूर करने के लिए चौतरफा सघन प्रयास आवश्यक है.

बाल श्रम व बाल तस्करी के रोकथाम के उपाय (Measures to prevent child labor and child trafficking)

  • सघन प्रचार प्रसार विधिक सेवा संस्थाओं का दायित्व है कि वे बाल श्रम व बाल तस्करी से जुड़े सरकारी विभागों से समन्वय स्थापित कर उनके साथ मिलकर बाल श्रम व बाल तस्करी के विरोध में एकजुट होकर जन जन तक जागृति फैलाए कि बाल श्रम व बाल तस्करी अपराध है तथा इसमे लिप्त होने पर सजा मिलना निश्चित है. ऐसी जन जागृति हो तो इस समस्या पर काबू पाया जा सकता है.
  • सस्ती, गुणवतापूर्ण व रोजगारपरक शिक्षा व्यवस्था-कल्याणकारी राज्य का दायित्व है. कि वह ऐसी सस्ती गुणवतापूर्ण व रोजगारपरक शिक्षा व्यवस्था करे कि देश का हर बच्चा शिक्षा प्राप्त कर सके तथा इसके उपरांत रोजगार प्राप्त कर अपना जीवन मानवीय गरिमा के अनुसार जी सके, ऐसा न किया जाने पर बाकी प्रयास वृक्षों की जड़ो को सीचने के स्थान पर पत्तों को पानी देने के समान है.
  • विधिक सेवा संस्थाए पुलिस, स्वयंसेवी संस्थाओं एवं अन्य संस्थाओं से मिलकर कार्य योजना तैयार करे और बीड़ी माचिस फटाखे व आरी-तारी चूड़ी जैसे अन्य उद्ध्योगो पर निगरानी रखे इन स्थानों पर या भीख मांगने व नशाखोरी के धंधो में लिप्त बच्चों को मुक्त कराने एवं दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही करने व् बच्चों के मुक्त होने पर उनके पुनर्वास तथा प्रतिकर की माकूल व्यवस्था सुनिश्चित करे.
  • वर्तमान में बाल श्रमिकों को मुक्त कराने पर वे जिस प्रदेश में होते है उन्हें उस प्रदेश की गाड़ी में बिठाकर उनके राज्य में भेज दिया जाता है, जो पुनः वहां जाकर उसी धंधे में लिप्त हो जाते है या दूसरे राज्यों में चले जाते है. ऐसी स्थति में हमे सुनिश्चित करना होगा कि मुक्त कराएं गये बच्चों को उनके माता-पिता के पास पहुचाया जाए और यदि उनके माता-पिता उन्हें रखने में समर्थ नही है तो पालनहार जैसी योजना की संस्थाओं में भेजकर उन बच्चों की देखभाल व शिक्षा की व्यवस्था की जाए.

बाल तस्करी से मुक्त कराये गये बच्चों का पुनर्वास एवं प्रतिकर व्यवस्था (Rehabilitation and rehabilitation of children released from child trafficking)

  • बाल तस्करी से मुक्त कराए गये बच्चों को पुनर्वास एवं प्रतिकर हेतु एक लाख रूपये प्रदान किये जाने की व्यवस्था है. लेकिन इसका लाभ नही मिल पा रहा है. राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने बाल बंधको को मुक्त कराने पर उनके पुर्नवास व प्रतिकर दिलाने में मदद करने की व्यवस्था की है. आशा है इसका परिणाम सामने आएगा.
  • बाल पीड़ितो को विधिक सहायता- बंधुआ मजदूरी व बाल श्रमिक या बाल अपराध के मामले में यह सुनिश्चित किया जाए कि पीड़ित बालकों को समुचित सहायता मिले, उनके मामले में ठोस पैरवी हो और दोषियों को निश्चित रूप से सजा मिले.
  • न्यायालय का दायित्व– बाल बंधुआ मजदूर, बाल अपराधों से जुड़े न्यायालयों का दायित्व है कि ऐसे मामले का प्राथमिकता से निस्तारण करे. बाल अपराध एक गंभीर समस्या है इसका प्रभाव पूरे देश व समाज पर पड़ता है. ऐसे में दोषी व्यक्ति को कठोर दंड दे जिससे वह बाल अपराधों से दूर रहे.

उपरोक्तानुसार ऐसे सम्मलित प्रयासों की आवश्यकता है कि बाल श्रम करवाने वालों को ऐसा साफ़ एवं वास्तविक संदेश दिया जाए कि ऐसी गतिविधियों में लिप्त व्यक्ति नही बचेगे वे निश्चित रूप से कानून के हवाले होंगे, तो वह दिन दूर नही जब बाल बंधुआ मजदूरी पर नियंत्रण हो जाएगा.

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