Essay On Crops In Hindi – फसलों पर निबंध

दोस्तों आपका स्वागत करता हूँ आज का हमारा निबंध Essay On Crops In Hindi – फसलों पर निबंध पर हैं यहाँ हम जानेगे कि फसल अर्थात क्रॉप क्या है इसकी मीनिंग अर्थ प्रकार तथा रबी खरीफ नकदी फसलों के उदाहरण क्या क्या हैं. यदि आप भारत की मुख्य फसलों की जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो इस निबंध को पढ़े.

Essay On Crops In Hindi – फसलों पर निबंध

Essay On Crops In Hindi - फसलों पर निबंध

indian crops in hindi- फसल को सस्य भी कहा जाता हैं एक ऋतु चक्र में मानव तथा जीव जन्तुओं के खाद्यान्न के लिए खेतों में उगाई गई वनस्पति, पेड़ पौधों की पैदावार को फसल कहा जाता हैं. गेहूं एक रबी की फसल है जो भारत भर में उगाई जाती हैं जब इसके दाने पककर पीले हो जाते है तो गेंहूँ की फसल को काट लिया जाता हैं. बाग़ बगीचों में फलों तथा सब्जियों की पैदावर भी की जाती है.

मौसम के अनुसार फसलें

खरीफ की फसल– यह फसल वर्षा के आरंभ में जून से जुलाई तक बोई जाती है और वर्षा की समाप्ति पर सितम्बर से अक्टूबर नवम्बर माह तक काटी जाती हैं. खरीफ की मुख्य फसलें चावल, ज्वार, बाजरा, मक्का, मूंग, मोठ, उड़द, तिल, मूंगफली, सोया बीन, जूट, गन्ना, कपास तथा तम्बाकू हैं.

रबी की फसलें– रबी मौसम शरद ऋतु के साथ प्रारम्भ होता हैं. रबी की फसल शीतकाल के आरंभ में अक्टूबर से दिसम्बर तक बोई जाती हैं. और फरवरी अप्रैल तक काट ली जाती हैं. गेहूँ, जौ, चना, मटर, सरसों, राई, वरसीम, सूरजमुखी, अलसी, अरहर, मसूर, अरबी, शकरकंद, चुकन्दर, प्याज लहसून आदि रबी की फसल हैं.

कैच क्रॉप (Catch Crop)– यह फसल अगस्त सितम्बर में बोई जाती है और दिसम्बर से जनवरी तक काट ली जाती है. इसमें तोरिया, मौसमी फल व सब्जियाँ आदि शामिल हैं.

जायद रबी की फसल– यह फसल मार्च से जून तक होती हैं, इसमें मैथी, शाक, सब्जियाँ, खरबूजे, तरबूज, ककड़ियाँ आदि शामिल हैं.

बारहमासी फसलें– कुछ फसलें खेत पर वर्षपर्यंत खड़ी रहती हैं. इन्हें बारहमासी फसलें कहते हैं. जैसे चाय, कॉफी, नारियल आदि.

कुल कृषि उत्पादन में खरीफ की फसलों का भाग 62 प्रतिशत, रबी की फसलों का भाग 24 प्रतिशत तथा बारहमासी फसलों का भाग 14 प्रतिशत हैं. केवल खाद्यान्नों के उत्पादन में खरीफ की फसलों का हिस्सा 71 प्रतिशत तथा रबी की फसलों का हिस्सा 29 प्रतिशत रहता हैं.

खरीफ की फसलों का भाग प्रत्यक्ष रूप से दक्षिणी पश्चिमी मानसून पर आधारित होता हैं. मानसूनी वर्षाओं के द्वारा छोड़ी गई नमी की शेष मात्रा रबी की फसलों को भी प्रभावित करती हैं. इस तरह दक्षिणी पश्चिमी मानसून रबी और बारहमासी फसलों की उपज पर भी प्रभाव डालता हैं. अतः देश की कृषि अर्थव्यवस्था में दक्षिणी पश्चिमी मानसून एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता हैं.

उपयोग के अनुसार फसलें

उपयोग की दृष्टि से भारतीय फसलों को दो भागों में विभाजित किया जा सकता हैं.

  1. खाद्य फसलें (Food crops)
  2. नकदी अथवा व्यापारिक फसलें (Cash or commercial crops)

खाद्य फसलें (Food Crops)- वे फसलें जिनका उत्पादन मुख्यतः भोजन के लिए किया जाता हैं. खाद्य फसलें कही जाती हैं. इनमें अन्न व दालें दोनों शामिल हैं. भारत में इन फसलों में चावल, गेंहूँ, दालें, ज्वार, बाजरा व मक्का प्रमुख हैं.

नकदी अथवा व्यापारिक फसलें (Cash or commercial crops)- इन फसलों के उत्पादन का मुख्य उद्देश्य इन्हें बेचकर धन प्राप्त करना होता हैं. किसान इन फसलों के उत्पादों को या तो सम्पूर्ण रूप से बेच देता हैं अथवा आंशिक रूप से उपयोग करता हैं. तथा शेष बड़ा भाग बेच देता हैं. इन फसलों में कपास, जूट या पटसन, चाय, कॉफ़ी, रबड़, गन्ना, तम्बाकू तथा तिलहन आदि प्रमुख हैं. नकदी अथवा व्यापारिक फसलों को निम्न भागों में विभाजित किया जा सकता हैं.

  • रेशे वाली फसलें (fibre Crops)- जैसे कपास, जूट, मेस्टा तथा सनई आदि.
  • बागान फसलें (Plantation Crops)- जैसे चाय, कोफी, नारियल, सुपारी, काजू तथा रबर आदि
  • शर्करा वाली फसलें (Sugar Crops)- जैसे गन्ना, चुकन्दर आदि.
  • तिलहन फसलें (Oilseeds Crops)- जैसे मूंगफली, सरसों, तिल, अलसी, अंडी तथा सूर्यमुखी आदि.
  • उद्दीपक फसलें (Narcotic Crops)- जैसे तम्बाकू अफीम आदि.
  • बागवानी फसलें (Horticulture)- जैसे फल, सब्जियाँ, मसाले, फूल आदि.

भारत में बागवानी फसलें (Horticultural Crops in India)

  • कृषि बागवानी उत्पादों का हिस्सा 30 प्रतिशत से अधिक हैं.
  • 2016-17 के चौथे अग्रिम अनुमानों के अनुसार देश में बागवानी फसलों का क्षेत्र 25109 हजार हैक्टेयर व उत्पादन 2,99, 853 हजार मीट्रिक टन हुआ हैं.
  • देश में बागवानी फसलों का वर्ष 2015-16 में कुल उत्पादन 286188 हजार मैट्रिक टन हुआ व क्षेत्र 24472 हजार हैक्टेयर रहा. इस वर्ष कुल बागवानी फसलों में सर्वाधिक योगदान सब्जियों का 61 प्रतिशत तक व द्वितीय स्थान फलों का 30 प्रतिशत हैं.
  • हमारे देश में 2016 में प्रति व्यक्ति फल की उपलब्धता 195 ग्राम प्रतिदिन है प्रति व्यक्ति सब्जियों की उपलब्धता वर्ष 2016 में 355 ग्राम हो गई हैं.
  • भारत का फल व सब्जियों के उत्पादन में चीन के बाद दूसरा स्थान हैं.
  • भारत मसालों और मसाला उत्पादों का सबसे बड़ा उत्पादक, उपभोक्ता व निर्यातक हैं. भारत को मसालों का घर कहा जाता हैं.
  • सौंफ, सूखी लाल व काली मिर्च के उत्पादन में भारत का विश्व में प्रथम स्थान हैं.
  • नागपुर के संतरे, गंगानगर के माल्टे, मध्यप्रदेश के कागजी नींबू, आंध्रप्रदेश के अनोबशाही अंगूर, केरल मैसूर के क्यू अन्नानास और पूवन व सराय किस्म के केले प्रसिद्ध हैं.
  • सब्जियों के अंतर्गत देश में सर्वाधिक क्षेत्र व मात्रा में आलू का उत्पादन होता हैं.
  • भारत केला, आम, सपोटा, नींबू, अनार तथा आँवला जैसे फलों के उत्पादन में प्रथम स्थान रखता हैं.
  • सेब, नाशपाती, आडू, आलूबुखारा, खुबानी, बादाम और अखरोट शीतोष्ण फल व गिरीदार फल कहे जाते हैं.
  • सेब भारत की चौथी मुख्य फल फसल हैं.
  • भारत में सब्जियों में क्रमशः बैंगन, टमाटर, बंदगोभी व प्याज आदि प्रमुख सब्जी फसलें हैं.

आम (Mango Crop)

भारत में क्षेत्र के हिसाब से आम का प्रथम स्थान हैं. आम भारत का सर्वाधिक महत्वपूर्ण फल हैं. यह देश के प्रायः सभी भागों में पैदा किया जाता हैं. किन्तु पर्याप्त वर्षा एवं उपजाऊ और चिकनी मिटटी होने के कारण गंगा यमुना के मैदानों में आम बहुत होता हैं. दसेरी, लंगड़ा, हापुस, फजली, हुश्नारा, सिरौली, वृंदावनी, केसर, अलफांसों आदि आम की मुख्य किस्में हैं.

केला (Banana Crops)

यह उष्णकटिबंधीय फल हैं, इसे उपजाऊ भूमि, अधिक वर्षा और ऊँचे तापमान की आवश्यकता होती हैं. भारत में सबसे उत्तम किस्म का केला दक्षिण भारत में पैदा किया जाता हैं. फल उत्पादन में भारत में केले का प्रथम स्थान हैं. क्षेत्र में केले का तीसरा स्थान हैं.

  • कुल बागवानी फसलों में सर्वाधिक उत्पादन सब्जियों का दूसरा फलों का है.
  • सब्जियों के अंतर्गत देश में सर्वाधिक क्षेत्र एवं मात्रा में आलू का उत्पादन होता हैं.

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