विद्यार्थी और अनुशासन पर निबंध | Essay On Discipline In Student Life

Essay On Discipline In Student Life: अनुशासन का जीवन में गहरा महत्व है| अनुशासन ही वह कुंजी है जिससे हम जीवन का विकास कर पाते है तथा सफलता के अनेक चरण छूते है| यदि हम देखे तो समूची प्रकृति भी एक अनुशासन में बंधी हुई है| सूर्य का नित्यप्रति एक ही दिशा में उगना तथा उसी तरह अस्त होना अनुशासन के ही प्रमाण है| चन्द्रमा, तारे, बादल, बिजली, सबका अपना अनुशासन है| इनमे भी जब किसी का अनुशासन भंग होता है तब कुछ अप्रतिक्षित तथा विध्वंसकारी घटनाए घटती होती है| एक क्रम से ही वस्तुओं का आना -जाना होता है| समुद्र में ज्वार -भाटा आने पर भी समुद्र मर्यादित रहता है|

विद्यार्थी और अनुशासन पर निबंध/ Vidhyarti Aur Anushasan Par Nibandh In Hindi

(Essay On Discipline In Student Life)

एक निश्चित गति से पृथ्वी का सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाना या अनेक उपग्रहों का अपनी गति से गतिमान रहना उनके अनुशासन का ही परिचायक है| ठीक इसी प्रकार विद्यार्थी के जीवन में भी अनुशासन का अत्यधिक महत्व है| कहा गया है कि -काक चेष्टा बको ध्यानम श्वान निद्रा तथैव च| अल्पाहारी ब्रर्हचारी विद्यार्थी पंच लक्षणम| विद्यार्थी के ये पाचों गुण उसके अनुशासन की ही विभिन्न सीढिया है| विद्यार्थी जीवन व्यक्ति के सघन साधना का काल है| जिसमे वह स्वयं का शारीरिक, मानसिक तथा रचनात्मक निर्माण करता है|

एक निश्चित गति से पृथ्वी का सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाना या अनेक उपग्रहों का अपनी गति से गतिमान रहना उनके अनुशासन का ही परिचायक है| ठीक इसी प्रकार विद्यार्थी के जीवन में भी अनुशासन का अत्यधिक महत्व है| कहा गया है कि -काक चेष्टा बको ध्यानम श्वान निद्रा तथैव च| अल्पाहारी ब्रर्हचारी विघार्थी पंच लक्षणम| विद्यार्थी के ये पाचों गुण उसके अनुशासन की ही विभिन्न सीढिया है| विद्यार्थी जीवन व्यक्ति के सघन साधना का काल है| जिसमे वह स्वयं का शारीरिक, मानसिक तथा रचनात्मक निर्माण करता है|

अत; आत्मानुशार की प्रेरणा विद्यार्थी के जीवन निर्माण की पहली सीढी है|’दूसरी ओर बार्हानुशार स्वयं के अलावा किसी दुसरे व्यक्ति के दबाव होने तथा उसके अधिकारों के कारण माना जाने वाला अनुशासन है| अनुशासन का शाब्दिक अर्थ ही अनु +शासन है| अनु का अर्थ है अनुरूप या अनुसार तथा शासन का अर्थ है शासित होना या परिचालित होना| इसका आशय यह हुआ की विद्यार्थी बहुत से कार्यो में स्वयं के द्धारा परिचालित होता है तथा बहुत से दुसरे कार्यो में शिक्षक, माता -पिता अथवा विघालय द्धारा परिचालित होता है|

चुकि विद्यालय में शिक्षा ग्रहण करने की अवस्था में बालक का निर्माण सीखने की प्रिक्रिया में होता है| इसलिए इस अवस्था में जो वह सीखता है वे उसके जीवन के स्थाई मूल्य बन जाते है |संसार में अनेक महापुरुषों ने अनुशासित रहकर ही समूचे विश्व का मार्गदर्शन किया है |

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