डॉ भीमराव अम्बेडकर पर निबंध | Essay On Dr. Bhimrao Ambedkar In Hindi

डॉ भीमराव अम्बेडकर पर निबंध | Essay On Dr. Bhimrao Ambedkar In Hindi: गीता में कहा गया है यदा कदा ही धर्मस्य ग्लानिर्भवती भारतः अभ्युथानम अधर्मस्य तदात्मानम स्रजाम्यह्म अर्थात जब धरती पर पाप का बोझ बढ़ जाता है तो भगवान् स्वयं उसे मिटाने के लिए प्रकट होते हैं, 20 वी सदी का वातावरण इस तरह का ही था. दुष्ट अंग्रेज भारतीय जनता पर नाना प्रकार के अत्याचार ढहा रहे थे. बुद्धिजीवी अपनी राजनीतिक धरातल खोज रहे थे. तो कुछ धर्म जाति के नाम पर लोगों में भेद कर उन्हें विभाजित करने के षड्यंत्र रच रहे थे. ऐसी दुर्व्यवस्था में बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर ने जन्म दिया. उन्होंने न सिर्फ दलितों का उद्धार किया बल्कि देश के लोगों को अधिकार देकर उन्हें सदियों की दासता से मुक्त कराया. आज हम छोटा बड़ा Bhimrao Ambedkar Par Nibandh पढ़ेगे.

Essay on BR Ambedkar in HindiEssay on BR Ambedkar in Hindi

भीमराव अम्बेडकर की जीवनी (Biography of Bhimrao Ambedkar In Hindi)

16 अप्रैल 1891 को मध्यप्रदेश के महू में बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर का जन्म हुआ था. इनके पिताजी का नाम रामजी मालोजी सकपाल सेना में मेजर की नौकरी करते थे तथा उनकी नियुक्ति महू में ही थी. अम्बेडकर की माता का नाम भीमाबाई मुरबादकर था.

भीमराव की जाति म्हार थी ये हिन्दू धर्म के अनुयायी थे. यह वह दौर था जब उच्च जाति स्वर्ण हिन्दू जातियों द्वारा म्हार तथा निम्न जातियों के लोगों को अप्रश्य समझते थे तथा इनके साथ अमानवीय व्यवहार किया जाता था. अम्बेडकर को भी बचपन में सवर्णों के इसी अपमानजनक व्यवहार को झेलना पड़ा.

भीमराव अम्बेडकर की शिक्षा व बचपन (Education and childhood of Bhimrao Ambedkar)

जब ये पढने के लिए स्कूल जाते तो इनके साथ बुरा बर्ताव किया जाता था. अम्बेडकर को अन्य छात्रों के साथ बैठने की बजाय अलग से बैठना पड़ता था. उन्हें पानी पीने तक के लिए औरों पर निर्भर रहना पड़ता था. यदि स्कूल में चपरासी होता तो ही पानी पी पाते थे. वो भी पानी का लोटा ऊपर रखकर पानी पिलाता था.

उन्हें लोगों के बर्तन को छूने तक का हक नहीं था. अपमान भरे इस बाल्य जीवन का असर उनके जीवन पर पड़ा. उन्होंने तभी निश्चय कर लिया कि वे अब से दलित शोषित वर्ग का नेतृत्व करते हुए सम्पूर्ण समाज से हक के लिए लड़ेगे तथा उन्हें वास्तविक अधिकार व सम्मान दिलाकर ही रहेगे.

भीमराव अम्बेडकर का विवाह व उच्च शिक्षा (Marriage and higher education of Bhimrao Ambedkar)

वर्ष 1905 में अम्बेडकर का विवाह रमाबाई के साथ हो गया, इसी वर्ष इनके पिताजी इन्हें लेकर मुंबई आए गये तथा इनका दाखिला एलफिंसटन स्कूल में करवा दिया. 1907 में अम्बेडकर ने दसवी की परीक्षा अच्छे अंकों के साथ उतीर्ण की तो बडौदा के महाराजा सयाजी राव गायकवाड़ ने इनकी 25 रूपये प्रति माह छात्रवृति देनी शुरू कर दी.

जब 1912 में भीमराव अम्बेडकर ने बी ए कर ली तो उसके बाद महाराजा गायकवाड ने इन्हें अपनी सेना में उच्च पद पर नियुक्त कर दिया. अगले ही साल इनके पिता का देहांत हो जाने पर भीमराव ने अपनी नौकरी से त्याग पत्र दे दिया तथा आगे की पढ़ाई के लिए विदेश जाने का निश्चय किया.

अम्बेडकर विदेश में उच्च शिक्षा (Ambedkar Higher Education Abroad)

जब इन्होने सेना की नौकरी से इस्तीफा देकर आगे की पढ़ाई के लिए विदेश जाने की इच्छा जताई तो गायकवाड़ ने इस निर्णय का फैसला की तथा इस कार्य के लिए उन्हें आर्थिक मदद भी दी. भीमराव अम्बेडकर आगे की पढ़ाई के लिए अमेरिका गये. तथा वहां के कोलम्बिया युनिवर्सिटी न्यूयार्क से 1915 में एमए किया.

अगले ही साल इन्होने पीएचडी की पदवी प्राप्त कर ली. इतना कुछ करने के बाद भी इनकी ज्ञान पिपासा शांत नहीं हुई तथा 1923 में अमेरिका से ब्रिटेन चले गये जहाँ इन्होने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से डॉक्टर ऑफ साइंस की उपाधि प्राप्त की, इसके बाद अपना करियर कानून में बनाने के लिए अम्बेडकर ने बाए एट लॉ की डिग्री हासिल की.

भीमराव अम्बेडकर की स्वदेश वापसी (Bhimrao Ambedkar returns home)

वर्ष 1923 में भीमराव अम्बेडकर भारत लौट आए, उन्होंने बम्बई उच्च न्यायालय में कानूनी वकालत के पेशे को चुना. उनकी राह यहाँ भी आसान नहीं थी निम्न जाति के होने के कारण यहाँ भी उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया जाता रहा. उन्हें कोर्ट में कुर्सी तक नहीं दी जाती थी न कि उनके हाथ में कोई केस आता था. अचानक एक दिन एक हत्या के केस की सभी वकीलों ने पैरवी करने से इंकार कर दिया, वह केस अम्बेडकर को मिला उन्होंने इस केस की पैरवी इतने पुरजोर तरीके से की जज को उसके मुवक्किल के हक में फैसला देना पड़ा. इस घटना के बाद हर तरफ उनकी चर्चा होने लगी.

मगर अम्बेडकर का लक्ष्य अपने शोषित समाज को उनका हक दिलाना था. इस दिशा में उन्होंने 1927 में बहिस्कृत भारत नाम से एक पत्रिका का सम्पादन शुरू किया जिसके द्वारा दलितों के शोषण तथा उनके उद्धार करने के लिए समाज को जागृत करने का प्रयास किया. 1930 में तीस हजार दलितों के साथ इन्होने कालामंदिर में दलितों के प्रवेश पर रोक के विरुद्ध सत्याग्रह किया.

सवर्णों द्वारा उन पर लाठिया भांजी गई कई लोग घायल हुए मगर वो अपने निश्चय से पीछे नहीं हटे. आखिरकार उन तीस हजार लोगों को मंदिर में प्रवेश कराकर ही दम लिया. इस घटना के बाद लोग उन्हें बाबा साहब के नाम से जानने लगे.

भीमराव अम्बेडकर के दलितउद्धार कार्य (Dlituddhar Works Of BR Ambedkar)

1935 में भीमराव अम्बेडकर ने इंडिपेंडेंट लेबर पार्टी की स्थापना की जिसके माध्यम से उन्होंने सवर्ण समाज के खिलाफ दलितों के हितों की लड़ाई लड़ी. 1937 में बम्बई के स्थानीय निकाय के चुनावों में भीमराव अम्बेडकर की पार्टी को पन्द्रह में से 13 स्थानों पर विजय मिली. वे गांधीजी के दलितोंद्धार की नीति से संतुष्ट नहीं थे. मगर अपनी सोच तथा विचारधारा के कारण ये सरदार पटेल तथा महात्मा गाँधी जैसे राष्ट्रीय नेताओं को अपनी ओर आकर्षित करने में सफल रहे.

जब 15 अगस्त 1947 को भारत को आजादी मिली तो पहले मंत्रिमंडल में इन्हें कानून मंत्री बनाया गया तथा संविधान सभा के गठन के बाद अम्बेडकर को संविधान प्रारूप समिति का अध्यक्ष बनाया गया. इन्हें भारत के संविधान का निर्माता पिता आदि कहा जाता हैं क्योंकि इन्होने संविधान निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

भीमराव अम्बेडकर की पुस्तकें (Books of Bhimrao Ambedkar)

बाबा साहब ने अपने समाज को हक दिलाने के उद्देश्य से कई किताबे लिखी. उन्होंने अपने जीवनकाल इतिहास में कई पुस्तकों एवं पत्रिकाओं का सम्पादन किया जिनमे कुछ नाम – भारत का राष्ट्रीय अंश, भारत में जातियां और उनका मशीनीकरण, भारत में लघु कृषि और उनके उपचार, मूल नायक (साप्ताहिक), ब्रिटिश भारत में साम्राज्यवादी वित्त का विकेंद्रीकरण, रुपये की समस्या: उद्भव और समाधान, ब्रिटिश भारत में प्रांतीय वित्त का अभ्युदय, बहिष्कृत भारत (साप्ताहिक), जनता (साप्ताहिक), जाति विच्छेद, संघ बनाम स्वतंत्रता, पाकिस्तान पर विचार, श्री गाँधी एवं अछूतों की विमुक्ति, रानाडे, गाँधी और जिन्ना, कांग्रेस और गाँधी ने अछूतों के लिए क्या किया, शूद्र कौन और कैसे, महाराष्ट्र भाषाई प्रान्त, भगवान बुद्ध और उनका धर्म.

भीमराव अम्बेडकर का इतिहास कहानी (History of Bhimrao Ambedkar)

अम्बेडकर सर्वधर्म सद्भाव के विचार रखते थे. वे हिन्दू धर्म के खिलाफ न होकर वो हिन्दू धर्म में व्याप्त बुराइयों और कुरीतियों को समाप्त करना चाहते थे. उनहोंने आजीवन परिवर्तन किया कि धर्म में सुधार हो, लेकिन दकियानूसी सोच के लोगों को ऐसा कभी मंजूर नही था. अतः जीवन के अंतिम पड़ाव में अम्बेडकर ने अपना धर्म परिवर्तन कर बौद्ध धर्म की दीक्षा ले ली.

14 अक्टूबर 1956 के दशहरे के दिन उन्होंने नागपुर में एक बड़े कार्यक्रम में दो लाख लोगों के साथ हिन्दू धर्म से बौद्ध धर्म को अपना लिया. वे एक महान विधिवेता, समाज सुधारक शिक्षाविद और राजनेता थे. उन्होंने आजीवन अछूत वर्ग के हितों की लड़ाई लड़ी.

6 दिसम्बर 1956 को दलितों के भगवान् मसीहा बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर की मृत्यु हो गई. उनके कार्यों के लिए भारत सरकार ने 1990 में उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न से नवाजा गया.

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