दुर्गा पूजा पर निबंध | Essay On Durga Puja In Hindi

दुर्गा पूजा पर निबंध | Essay On Durga Puja In Hindi 

हमेशा से भारत को त्योहारों का देश माना गया है. यहाँ विभिन्न जातियों और धर्मो के लोग एक साथ रहते है, ऐसा दुनिया के किसी अन्य राष्ट्र में देखने को नही मिलता है. सभी पंथो धर्मो के अपने अपने पर्व त्यौहार है. अधिकतर तीज त्यौहार एक या दो दिन चलते है. मगर दुर्गा पूजा जो पश्चिम बंगाल में सर्वाधिक लोकप्रिय है, दस दिन तक चलने वाला त्यौहार है.

माँ दुर्गा को हिन्दू धर्म में शक्ति की देवी कहा जाता है. सभी देवों में श्रेष्ट दुर्गा को समर्पित दुर्गा पूजा के ये 10 दिन प्रत्येक इंसान के जीवन में महत्वपूर्ण होते है. व्यस्त दिनचर्या से निकलकर इंसान को दुर्गा पूजा के मौके पर अपने मित्रों रिश्तेदारों से मिलने तथा जीवन में नई उर्जा उत्पन्न करने में इसका महत्वपूर्ण स्थान है.

दुर्गा पूजा कब है (When is Durga Puja )

एक साल में दो बार नवरात्र आते है,पहले चैत्र महीने में और दुसरे आश्विन माह में. चैत्र महीने के नवरात्र को वासन्तिक नवरात्र कहा जाता है, जबकि आश्विन माह के नवरात्र को शारदीय नवरात्र कहा जाता है. इस साल वर्ष 2017 में दुर्गा पूजा का त्यौहार 26 सितम्बर से 30 सितम्बर तक पश्चिम बंगाल सहित पुरे देश में श्रद्धा भाव से मनाया जाता है.

नौ दिनों तक चलने वाले इन नवरात्र में माँ दुर्गा के नौ रूपों की विधिवत पूजा की जाती है. दुर्गा पूजा यानि शारदीय नवरात्र आश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होकर नवमी तक होते है. प्रतिपदा के दिन इसकी स्थापना होती है नौ दिनों के बाद इसका बड़ा आयोजन होता है.

महत्व (Significance/Importance)

यह हिन्दू धर्मं का महत्वपूर्ण त्यौहार है. जिनका बड़ा धार्मिक, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं सांसारिक महत्व है. माँ काली (दुर्गा) के भक्त इस दिन दुर्गा पूजा करते है. इस दिन भक्तजन व्रत रखते है तथा देवी के नाम अखंड ज्योति जलाते है.जिस तरह हर त्यौहार को मनाने का धार्मिक तथा सामाजिक महत्व होता है. उसी प्रकार दुर्गा पूजा का भी अपना सांस्कृतिक महत्व है.

चूँकि हमारा देश एक कृषि प्रदान देश है, यहाँ के अधिकतर लोग खेती का व्यवसाय करते है. आश्विन महीने तक लगभग खरीफ की फसल काट ली जाती है. तथा अगली खेती की सीजन से पूर्व लोगों के पास खाली वक्त रहता है. साथ ही ख़ुशी तथा उल्लास का यह पर्व लोगों में नया उत्साह भर देता है.

कथा (durga puja Katha)

इस त्यौहार को मनाने के पीछे एक धार्मिक कथा जुड़ी हुई है. जिसके अनुसार महिषासुर और देवराज इंद्र के बिच युद्ध हुआ था. जिसमे देवराज को पराजित होना पड़ा था, तथा उनकी जगह महिषासुर ने इंद्र लोक पर अपना आधिपत्य जमा लिया था. ब्रह्माजी के नेतृत्व में सभी देव सहायता के लिए शिवजी के पास गये.

शिवजी देवताओं की कायरता पूर्ण बाते सुनकर क्रोधित हो गये, तथा उनके शरीर से अग्नि सभी दिशाए जलने लगी. तथा यही से शिवजी के तेज का एक पुंज माँ दुर्गा के रूप में परिवर्तित हो गया.तब सभी देव जनों ने माँ दुर्गा की शरण ली और महिषासुर नामक दानव को समाप्त करने की याचना की. देवो की बात सुनकर देवी दुर्गा ने स्वय महिषासुर से युद्ध किया और उसे समाप्त कर डाला.

पूजा विधि (durga puja vidhi )

दुर्गा पूजा की शुरुआत शारदीय नवरात्र की प्रतिपदा तिथि से ही हो जाता है. इस दिन कलश की स्थापना के साथ ही देवी की मूर्ति मन्दिर या प्रतिष्ठान के मध्य में स्थापित की जाती है. माँ दुर्गा के साथ जया, सरस्वती, कार्तिकेय, लक्ष्मी, शिव तथा गणेश जी की मुर्तिया भी लगाईं जाती है. अगले नौ दिनों तक दुर्गा के नौ रूपों शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्माण्डा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी तथा सिद्धिदात्री की पूजा भी की जाती है.

इन दुर्गा पूजा के नौ दिनों में छटवां दिन यानि षष्टी का दिन बड़ा महत्वपूर्ण होता है. इस दिन दुर्गा पूजा की प्राण प्रतिष्ठा की शुरुआत हो जाती है. जिन्हें बंगाली भाषा में बोधन भी कहा जाता है. अब तक दुर्गा समेत सभी देवी देवताओं की मूर्तियों पर कपड़े का आवरण रहता है जो इस दिन ही हटाया जाता है.

मनाने का तरीका (durga puja in hindi)

लगातार नौ दिन के नवरात्र के बाद दशमी तिथि को दुर्गा पूजा का विसर्जन किया जाता है. इस दिन को देशभर में विजयादशमी यानि दशहरे का पर्व भी मनाया जाता है. रामायण के अनुसार भगवान् श्री राम जी ने रावण को युद्ध में परास्त करने के लिए इन्ही शारदीय नवरात्र में माँ दुर्गा की नौ दिन तक पूजा की थी. परिणामस्वरूप दशमी के दिन उन्होंने रावण को मार गिराया था.

(Essay On Durga Puja In Hindi)

इसलिए इस दिन लोग शक्ति पूजन दिवस के रूप में दशहरे के दिन अस्त्र-शस्त्र का पूजन भी करते है. बुराई पर अच्छाई, असत्य पर सत्य की विजय के प्रतीक के रूप में दशहरे के त्यौहार में रावण मेघनाद और कुम्भकर्ण के पुतले जलाए जाते है.

इन शारदीय नवरात्रों के दौरान गुजरात तथा इसके आस-पास के क्षेत्रों में गरबा नृत्य खेला जाता है.नवरात्री में दुर्गा के नव रूपों की पूजा के साथ-साथ जगह जगह पर रामलीलाओ का भी आयोजन होता है.विजयादशमी के दिन देशभर में हर्ष और उल्लास का माहौल रहता है. बंगाल में दुर्गा पूजा का आयोजन इसी दिन होता है, जिनमे माँ दुर्गा की मूर्तियों से बाजार सजा रहता है.

संदेश (Durga Puja 2017)

हर साल बंगाल व देशभर में दुर्गा पूजा के त्यौहार को अनीति अत्याचार और सभी प्रकार की बुरी मानवीय प्रवृतियों के नाश के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है. हमारी संस्कृति ने नारी को पूजनीय मानकर सम्मानजनक स्थान प्रदान किया है. मगर आज के परिद्रश्य में हमे आज के हालत देखकर शर्म महसूस होती है.

आज महिषासुर जैसे हजारों राक्षस है, जो नारी शक्ति की प्रगति उन्नति के राह में रोड़ा बने हुए है. दुर्गा पूजा के अवसर पर हमे यह संकल्प करना चाहिए कि हम अपने व्यावहरिक जीवन में भी नारी शक्ति को उच्च सम्मान प्रदान करेगे. तभी सही मायनों में दुर्गा पूजा जैसे पर्वो का मनाना सार्थक सिद्ध होगा.

दुर्गा पूजा पर निबंध “Essay On Durga Puja In Hindi ” आज का यह लेख दोस्तों आपकों कैसा लगा, कमेंट कर हमे जरुर बताए. साथ ही Essay On Durga Puja से जुड़ी आपकों अन्य कोई जानकारी चाहिए तो कमेंट कर जरुर बताए.

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